
छत्तीसगढ़ के तीन जिलों में करोड़ों रुपये के सरकारी निर्माण कार्य करने वाले धमतरी के ठेकेदार मेसर्स अशोक खंडेलवाल पर श्रम कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगा है। RTI से मिली जानकारी के अनुसार ठेकेदार ने श्रम संविदा लाइसेंस नहीं बनवाया और न ही श्रमिकों का PF, ESI व भवन निर्माण उपकर जमा किया। इससे न केवल सैकड़ों श्रमिकों के अधिकार प्रभावित हुए हैं, बल्कि शासन के राजस्व को भी नुकसान पहुंचा है। मामले में उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
*क्या कहता है RTI*
धमतरी, रायपुर और बिलासपुर के श्रम कार्यालयों से RTI में पूछा गया था कि मेसर्स अशोक खंडेलवाल द्वारा किए गए कार्यों के लिए श्रम लाइसेंस जारी किया गया है या नहीं। तीनों कार्यालयों से जवाब में कहा गया कि उनके यहां ऐसा कोई लाइसेंस पंजीकृत नहीं है।
श्रमिक संविदा अधिनियम 1970 की धारा 7 और 12 के तहत 20 या अधिक श्रमिक रखने वाले ठेकेदार के लिए हर कार्य हेतु अलग लाइसेंस अनिवार्य है। साथ ही PF, ESI और भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर की 1% राशि जमा करना भी जरूरी है।
*कहाँ-कहाँ हुए काम*
दस्तावेजों के अनुसार ठेकेदार को पिछले वर्षों में 100 करोड़ से अधिक के कार्य मिले।
*बिलासपुर*: साइंस कॉलेज में प्रगति मैदान 11 करोड़, हाईकोर्ट में अतिरिक्त कक्ष, शासकीय आवास निर्माण लगभग 80 करोड़, नगोई मल्टी यूटिलिटी सेंटर 4 करोड़।
*रायपुर*: RCTRC भवन नवा रायपुर लगभग 14-15 करोड़।
*धमतरी*: चार मल्टी यूटिलिटी सेंटर लगभग 16 करोड़।
*दोहरा नुकसान*
श्रम विशेषज्ञों का कहना है कि लाइसेंस और उपकर न जमा करने से दोहरा नुकसान हुआ। एक ओर श्रमिकों को PF, ESI, बीमा और सुरक्षा उपकरण जैसी सुविधाएं नहीं मिलीं। दूसरी ओर भवन उपकर की राशि श्रम कल्याण बोर्ड में जमा न होने से निर्माण श्रमिकों की योजनाएं प्रभावित हुईं।
*मजदूरी भुगतान की भी हो जांच*
श्रम विभाग के नियमानुसार ठेकेदारों को श्रमिकों का वेतन अनिवार्य रूप से चेक या बैंक खाते में NEFT/RTGS से देना होता है। नकद भुगतान मान्य नहीं है। RTI में लाइसेंस न मिलने के बाद अब यह जांच भी आवश्यक है कि मेसर्स अशोक खंडेलवाल ने 100 करोड़ के कार्यों में लगे श्रमिकों को मजदूरी किस माध्यम से दी। यदि नकद भुगतान हुआ है तो यह भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगाs
*जांच की मांग*
शिकायतकर्ताओं ने मुख्य सचिव और श्रम आयुक्त को पत्र लिखकर मांग की है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज कर राशि की वसूली की जाए और उसे ब्लैक लिस्ट किया जाए। साथ ही जिन अधिकारियों ने बिना लाइसेंस बिल पास किए उनकी जवाबदेही भी तय हो।
*विभाग का कहना*
इस संबंध में संबंधित विभागों से संपर्क किया गया। अधिकारियों ने कहा कि दस्तावेजों की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ठेकेदार का पक्ष भी मांगा जाएगा।
*श्रम कानून क्या कहता है*
*श्रमिक संविदा अधिनियम 1970 की धारा 7* के तहत 20 या अधिक श्रमिक लगाने वाले हर ठेकेदार को कार्य शुरू करने से पहले श्रम लाइसेंस लेना अनिवार्य है।
*धारा 12* में कहा गया है कि प्रत्येक कार्य के लिए अलग लाइसेंस होगा।
इसके साथ ठेकेदार को श्रमिकों का PF, ESI जमा करना और भवन उपकर की 1% राशि श्रम कल्याण बोर्ड में जमा करना जरूरी है। उल्लंघन पर 3 महीने तक जेल या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। जवाबदेही मुख्य ठेकेदार की होती है।
*पीड़ित श्रमिकों को क्या मिलना चाहिए था*
यदि श्रम लाइसेंस और कानूनों का पालन होता तो प्रत्येक श्रमिक को ये सुविधाएं मिलतीं:
1. *PF और ESI* – रिटायरमेंट और इलाज की सुरक्षा
2. *न्यूनतम मजदूरी* – समय पर भुगतान
3. *सुरक्षा उपकरण* – हेलमेट, जूते, दस्ताने
4. *बीमा और दुर्घटना मुआवजा*
5. *भवन उपकर से योजनाएं* – शिक्षा, आवास, मातृत्व सहायता
लाइसेंस न बनने से श्रमिक इन सभी अधिकारों से वंचित रह गए।
*नकद में वेतन देना है अवैध*
छत्तीसगढ़ श्रम विभाग के निर्देशों के अनुसार फैक्ट्री मालिकों और ठेकेदारों को श्रमिकों का वेतन चेक या बैंक खाते में डिजिटल ट्रांसफर के माध्यम से ही देना अनिवार्य है। नकद भुगतान मान्य नहीं है।
इसका उद्देश्य न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करना और पारदर्शी भुगतान करना है। यह नियम अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल सभी श्रमिकों पर लागू है। नियम तोड़ने पर ठेकेदार पर कार्रवाई का प्रावधान है।: नियम निर्देशों का उल्लंघन करना अनियमितता है लेकिन क़ानून (अधिनियम) का उल्लंघन अपराध है ,
श्रम क़ानूनो का उल्लंघन करने वालों के विरुध्द श्रम न्यायालय में सुनवाई होगी ।श्रम विभाग की उदासीनता/निष्क्रियता ध्यान देने योग्य है
अशोक खंडेलवाल (नाम से) द्वारा श्रम क़ानूनों का उल्लंघन करने पर विधानसभा के बजट सत्र में विधायक बेलतरा ने सवाल किया था… श्रम मंत्री जॉंच करवाने आश्वस्त किया था ।
ALC (सहायक श्रम आयुक्त) से RTI जानकारी के लिए आवेदन लगा है कि-
विधानसभा प्रश्न के संदर्भ जॉंच एवं कार्यवाही की जानकारी दें जवाब नहीं आया है ।
विधानसभा में इस विषय पर सवाल जवाब 17 या 18 मार्च 2026 को हुआ था
Highcourt के इतने बड़े काम का किसी उच्चाधिकारी ने निरीक्षण नहीं किया ?
गजब हो गया !
: नगर निगम किए काम का लाइसेंस नहीं बनवाया, लेबर डिपार्टमेंट की जानकारी है
: RES धमतरी में काम किए काम का लाइसेंस नहीं बनवाया, लेबर डिपार्टमेंट की जानकारी है।
: PMGSY रायपुर में काम किया, लाइसेंस नहीं बनवाए.. लेबर डिपार्टमेंट रायपुर की जानकारी

