
दुनिया की तालीम के साथ दीन की तालीम को भी बराबर महत्व दिया जाना चाहिए।
बिलासपुर। मोहर्रम के पावन अवसर पर उसकी देन कमेटी द्वारा आयोजित शोहदाए कर्बला की याद में चल रहे सात दिवसीय मजलिस एवं तकरीर कार्यक्रम में दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की। दिल्ली से पधारे मुख्य वक्ता प्रोफेसर मौलाना मुख्तार अशरफ ने अपने संबोधन में कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) की मोहब्बत, कर्बला का पैगाम और अहले बैत की शिक्षाएं किसी एक समुदाय के लिए नहीं बल्कि पूरी इंसानियत के लिए हैं।
उन्होंने कहा कि जिक्र-ए-हुसैन सुनना अल्लाह तआला की विशेष नेमत है, जो केवल अक्ल या दौलत से नहीं बल्कि उसकी रहमत से नसीब होती है। उन्होंने उसकी देन कमेटी की सराहना करते हुए कहा कि पिछले 47 वर्षों से लगातार शोहदाए कर्बला की याद में जलसे आयोजित कर कमेटी एक महान धार्मिक और सामाजिक सेवा अंजाम दे रही है। यह सिलसिला नई पीढ़ी तक कर्बला के संदेश को पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
प्रो. मुख्तार अशरफ ने कहा कि इतिहास में कई बार कर्बला के संदेश और अहले बैत की शिक्षाओं को मिटाने की कोशिश की गई, लेकिन औलिया-ए-किराम, खानकाहों और सूफी संतों ने इसे हमेशा जीवित रखा। उन्होंने हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, हजरत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी, बाबा फरीद और हजरत निजामुद्दीन औलिया का उल्लेख करते हुए कहा कि इन बुजुर्गों ने प्रेम, भाईचारे और इंसानियत का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया।
इसी क्रम में रमजानी बाबा शेड में आयोजित दूसरे दिन के तकरीरी कार्यक्रम में वक्ता ने महिलाओं को दीन की ओर रुजू करने, पर्दे की अहमियत समझने तथा हजरत फातिमा ज़हरा (स.अ.) और शोहदाए कर्बला की सीरत को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज में फातमी और हुसैनी खवातीन तैयार करने के लिए दीन की सही तालीम, हया, पर्दा और नेक अखलाक को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने महिलाओं से अपने घरों में दीन का माहौल बनाने, नई पीढ़ी को इस्लामी शिक्षाओं से जोड़ने और सिरात-ए-मुस्तकीम पर चलने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि दुनिया की तालीम के साथ दीन की तालीम को भी बराबर महत्व दिया जाना चाहिए।
अपने बयान में उन्होंने तिजारत (व्यवसाय) के उसूलों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस्लाम सच्चाई, ईमानदारी और भरोसे की शिक्षा देता है। यदि कोई व्यक्ति व्यापार करता है तो उसे झूठ, धोखाधड़ी और बेईमानी से बचते हुए सच बोलकर और ईमानदारी के साथ अपनी तिजारत करनी चाहिए। हलाल और पाकीज़ा कमाई इंसान की दुनिया और आख़िरत दोनों को संवारती है।
वक्ता ने हजरत उमर फारूक़ (रज़ि.) की सवानिह-ए-हयात पर भी विस्तार से चर्चा करते हुए उनकी सादगी, न्यायप्रियता, प्रशासनिक क्षमता और जनकल्याणकारी कार्यों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी इंसाफ, जवाबदेही और जनसेवा का बेहतरीन उदाहरण है।
कार्यक्रम में कर्बला के पैगाम पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी इंसानियत को सत्य, न्याय, सब्र, त्याग और अत्याचार के खिलाफ डटकर खड़े रहने की प्रेरणा देती है। जलसे के दौरान शोहदाए कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया गया तथा अमन, भाईचारे और इंसानियत की दुआ की गई।
इस अवसर पर फरहान बक्स, हसनैन अली, जियाउद्दीन प्यारे, इकराम भईया, अदनान अली, शहीद लालखादान, शाहिल शेख, अब्दुल कलीम (पत्रकार), मोहम्मद अली, अब्दुल रज्जाक बड़े, इंसान अली बब्बू, आदिल भाई, असद, अब्दुल रशीद, रिजवान शानू, ज़ैद, वसीम बक्स, हाजी कादिर, हाजी निशार, हाजी जफर, खालिद भाई (सिटी मैन टेलर), प्यारू भाई, अबरार भाई, आरिफ बेग, शेख निजामुद्दीन, मिर्जा वसीम बेग, शाहिद सहित कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य एवं शहर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह जानकारी कमेटी के संयोजक शेख नजीरुद्दीन छोटे ने दी।
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Thu Jun 18 , 2026
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