
साय सरकार मे पूर्व पार्षद की भूमि पर तहसीलदार प्रकाश साहू का रवैया अजीबोगरीब

बिलासपुर 2 जनवरी। टीम सीमांकन से संतुष्ट आवेदक पूर्व पार्षद शिव प्रताप साव को सीमांकन रिपोर्ट देने के बजाय तहसीलदार प्रकाश साहू ने आपत्ति जता जबरिया उनकी करबला स्थित भूमि का पुनः टीम सीमांकन करा दिया राजस्व विभाग में भूमि की नाप जोख, सीमांकन का दायित्व राजस्व निरीक्षक व पटवारी पर होता है। आर आई, पटवारी द्वारा तहसील में सीमांकन रिपोर्ट जमा करने के बाद तहसीलदार का कार्य उसे नस्ती करना होता है लेकिन बिलासपुर तहसील में तहसीलदार प्रकाश साहू की पदस्थापना के बाद से सीमांकन, नामांतरण कार्यों पर रोक सी लग गई है ।
भूमि संबंधित मामले का खात्मा करना छोड़ तहसीलदार प्रकाश साहू आवेदक शिव प्रताप साव के मामले को उलझा रहे हैं । संभवतः बिलासपुर तहसील के इतिहास में यह पहला मामला होगा जिसमें आवेदक के संतुष्ट होने के बावजूद अपने निहित स्वार्थ के चलते उसे फिर से टीम सीमांकन के दंगल में कूदा दिया गया।
बिलासपुर तहसीलदार प्रकाश साहू की कार्यशैली के चलते प्रदेश में सत्तारूढ़ साय सरकार के राज मे पूर्व वरिष्ठ पार्षद शिव प्रताप साव को सीमांकन रिपोर्ट के लिए बिलासपुर तहसील कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। तहसीलदार के रवैए से परेशान होकर पूर्व पार्षद शिव प्रताप साव करबला स्थित अपनी भूमि का टीम सीमांकन होने के बाद सीमांकन रिपोर्ट के लिए कलेक्टर से मिल आवेदन दे चुके हैं किन्तु जमीन उड़ने के लिए विख्यात बिलासपुर तहसील में बिना दाम दिये काम ना करने की परिपाटी के चलते आवेदक शिव प्रताप साव को सीमांकन रिपोर्ट देने के बजाय उनकी भूमि का तहसीलदार प्रकाश साहू द्वारा सीमांकन में आपत्ति होना बताते हुए पुनः टीम सीमांकन करा दिया गया है। तहसीलदार प्रकाश साहू द्वारा दूसरे खसरा के भूस्वामी की आपत्ति स्वीकारना और टीम सीमांकन होने के बाद आश्चर्यजनक रूप से पुनः टीम सीमांकन कराया जाना बिलासपुर तहसील में चर्चा का विषय बन गया है।
पूर्व मंत्री के कथन व कलेक्टर को दिए गए आवेदन को दरकिनार करने वाले तहसीलदार प्रकाश साहू की वर्किंग बिलासपुर तहसील में चर्चा का विषय बन गई है। वर्तमान मे तहसील कार्यालय में सीमांकन प्रकरण को नस्ती करने के बजाय उसे अनावश्यक रोका जा रहा है ।
मौजा जूना बिलासपुर हल्का के करबला स्थित खसरा नंबर 275/2 मे रकबा 0.1130 हेक्टेयर भूमि आवेदक शिव प्रताप साव के नाम पर दर्ज है जिसका सीमांकन बीते 15 अक्टूबर 2025 को 7 सदस्यीय आर आई – पटवारी की टीम द्वारा किया गया सीमांकन में चिमन रावलानी द्वारा खसरा नंबर 275 के कुछ हिस्से मे कब्जा करना पाया गया गांधी चौक के पास स्थित चौधरी मोहल्ला के आसपास का खसरा नंबर 277 को चिमन रावलानी चार टुकड़े में रजिस्ट्री कर खसरा नंबर 275 मे काबिज है ।टेंट का व्यवसाय करने वाले चिमन रावलानी द्वारा नगर निगम को भी गलत जानकारी देते हुए बिल्डिंग का नक्शा पास कराना पाया गया ।शासन को धोखे में रखने किए गए अवैधानिक कृत्य की सीमांकन मे पोल खुलता देख चिमन रावलानी तहसील में आपत्ति दर्ज कराने पहुंचा। चिमन रावलानी की रीडर से भेंट के बाद दुसरे खसरा की आपत्ति को तहसीलदार प्रकाश साहू द्वारा सहर्ष दर्ज कर लिया गया। तहसीलदार प्रकाश साहू का सानिध्य पाकर पूर्व सीमांकन रिपोर्ट को दबाना और नया सीमांकन कराकर जमीन को विवादित बनाने की मंशा लेकर चल रहा चिमन रावलानी शुक्रवार 2 जनवरी को हुए सीमांकन में भी मौके पर पहुंची टीम को आपत्ति आवेदन प्रस्तुत किया और बताया कि आज के सीमांकन की जानकारी उन्हें 2 घंटे पूर्व हुई है और उनकी इस सीमांकन में आपत्ति पहले से दर्ज है। बहरहाल खसरा नंबर 275 की नाप जोख में जुटी टीम ने आवेदक की भूमि चिन्हाकिंत करने के लिए मौके पर टेप गिराना शुरू ही किया था कि तहसीलदार का फोन आते ही टीम स्थिर हो गई ।सीमांकन होल्ड करने के उद्देश्य से टीम के कुछ सदस्य अन्य कार्य का हवाला देते हुए मौके से निकल गए चंद मिनट में आधा अधूरा सीमांकन कार्य सम्पादित कर आरआई द्वारा पंचनामा तैयार किया गया टीम सीमांकन की केवल औपचारिकता होने वी खसरा नंबर 275 की भुजा को चारो दिशा से ना नापने पर आवेदक के पुत्र व अन्य ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
सीमांकन खसरा नं 275 का और आपत्ति 277 की स्वीकार करना क्या जायज है?
सीमांकन में उपस्थित आवेदक शिव प्रताप साव के पुत्र अवनीश ने बताया कि करबला स्थित भूमि उनके पिता के नाम पर दर्ज है जिसका एकल व टीम सीमांकन किया जा चुका है। टीम सीमांकन से वह संतुष्ट है ।सीमांकन रिपोर्ट तहसील में जमा कर दिए जाने के बाद तहसील कार्यालय से उन्हें सीमांकन रिपोर्ट नहीं दी गई। इस संबंध में तहसीलदार प्रकाश साहू से मिलने पर उन्होंने बताया कि आपके सीमांकन में आपत्ति आई है इसलिए उसका फिर से सीमांकन करना पड़ेगा। आवेदक ने बताया कि आपत्तिकर्ता और उनका खसरा अलग है इसलिए उसके आपत्ति का कोई औचित्य नहीं है और अगर आपत्ति एप्लीकेबल है तो उसका निराकरण करें आप पीठासीन अधिकारी हैं ।टीम सीमांकन होने और आवेदक के संतुष्ट होने के बाद पुनः सीमांकन की आवश्यकता नहीं है क्योंकि प्रायः प्रायः सीमांकन में आपत्ति आती है आपत्ति का निराकरण प्रकरण दर्ज सुनवाई कर किया जाता है। एक बार टीम सीमांकन होने के बाद पुनः सीमांकन नहीं किया जाता किंतु तहसीलदार द्वारा मनमानी करते हुए पुनः दल सीमांकन हेतु 12 दिसंबर को नोटिस जारी किया गया और टीम का गठन कर शुक्रवार 2 जनवरी को नई टीम को पुनः सीमांकन के लिए मौके पर भेजा गया टीम द्वारा आज सीमांकन के नाम पर केवल औपचारिकता की गई है चिमन रावलानी जो 277 खसरा नंबर का भूमि स्वामी है और खसरा नंबर 275 पर काबिज है नियमतः उसकी आपत्ति लेनी ही नहीं चाहिए थी क्योंकि सीमांकन खसरा नंबर 275 का किया जाना है और वह 277 का भूमि स्वामी है बहरहाल आज पुनः उसने आपत्ति दर्ज कराई कि उसे सीमांकन की जानकारी अभी 2 घंटे पूर्व हुई है चूकि 12 दिसंबर को सीमांकन का नोटिस जारी हुआ इसके बाद चिमन रावलानी द्वारा यह बताया जाना की उसे 2 घंटे पूर्व आज सीमांकन होने की जानकारी मिली है यह संदेहास्पद है तहसीलदार प्रकाश साहू द्वारा जानबूझकर उनकी भूमि को सीमांकन के नाम पर विवादित किया जा रहा है।




