10 निचले दर्जे के नक्सलियों को सजा होना जीरम घाटी मामले में न्याय नहीं 

स्वयं एनआईए ने 200 लोगों द्वारा घटना को अंजाम देना और 39 लोगों को मुलजिम बनाया था जिसमें से 10 के सिवाय आज तक कोई नहीं पकड़ाया

 पीड़ित व्यक्तियों द्वारा कराई गई दूसरी एफ आई आर के तहत वृहद राजनीतिक षड्यंत्र पर आज तक कोई जांच नहीं हुई

एन आई ए ने दूसरी एफ आई आर के तहत जांच का विरोध किया

फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी एफ आई आर पर जांच की इजाजत दी

 

2023 दिसंबर से ढाई साल में छत्तीसगढ़ पुलिस ने कोई जांच नहीं की

 

बिलासपुर। झीरम घाटी मामले में कांग्रेस पार्टी और पीड़ित परिवारों के अधिवक्ता संदीप श्रीवास्तव ने जगदलपुर एन आई ए कोर्ट के द्वारा दिए गए फैसले को इंसाफ मानने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि 10 बहुत ही निचले दर्जे के नक्सलियों को सजा देना इस मामले में न्याय नहीं कहा जा सकता। जब एन आई ए की चार्ज शीट की में ही 200 से अधिक नक्सलियों के द्वारा घटना को अंजाम देने और 39 व्यक्तियों को नाम जोड़ने की तुलना में केवल 10 लोगों को सजा होना कहीं से भी न्याय नहीं माना जा सकता। इन 10 लोगों के अलावा बाकी नक्सलियों को पकड़ने का कोई गंभीर प्रयास एन आई ए के द्वारा नहीं किया गया।

वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवारों के द्वारा हमेशा यह बात कही गई कि इस घटना में वृहद राजनीतिक षड्यंत्र हुआ है और उसकी जांच आवश्यक है इस एंगल पर एन आई एन ने कोई जांच नहीं की। जब छत्तीसगढ़ पुलिस ने 2020 में जितेंद्र मुदलियार की शिकायत पर एक नई एफआईआर दर्ज की तब इसके खिलाफ अदालत चली गई और सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले को लटकाए रखा। अंततः नवंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एन आई ए के अपील को खारिज कर इस फिर पर जांच का रास्ता साफ किया परंतु दिसंबर 2023 से ही प्रदेश में पुनः एक बार भाजपा की सरकार आने के बाद ढाई साल से इस मामले पर कोई जांच नहीं की गई। जहां तक जांच आयोग के द्वारा की गई जांच का सवाल है।

जांच आयोग ने सुरक्षा में कमी पर जांच की ना कि आपराधिक मामले में सजा दिलाने के लिए

जस्टिस प्रशांत मिश्रा जांच आयोग के द्वारा जब रिपोर्ट प्रस्तुत की गई तब राज्य सरकार ने यह कहा कि यह रिपोर्ट अधूरी है और उसे पूरा करने के लिए जस्टिस मिन्नहाजुद्दीन और जस्टिस सतीश अग्रिहोत्री का एक नया जांच आयोग बनाया

इस तरह जांच आयोग के खिलाफ तब के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक जो वर्तमान में विधायक भी है ने याचिका लगाकर इसे हाई कोर्ट से जांच पर स्टे कराया।

यह स्टे आज भी प्रभावित है

आखिर भारतीय जनता पार्टी सरकार के अंतर्गत एनआईए और भारतीय जनता पार्टी के नेता आदि किसी भी इंक्वारी या इन्वेस्टिगेशन जो झीरम घाटी मामले से संबंधित है को क्यों रोक लगा रहा चाहते हैं।

निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176

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