
बिलासपुर । जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। एक पटवारी को गंभीर आरोपों के आधार पर निलंबित किए जाने के बाद महज एक सप्ताह में ही पुनः बहाल कर दिया गया, जिससे पूरे घटनाक्रम की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बिल्हा द्वारा 01 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के तहत पटवारी विष्णु प्रसाद निर्मलकर (पटवारी हल्का क्रमांक 03, हरदीकला टोना, तहसील बोदरी) को गंभीर अनियमितताओं के आरोप में निलंबित किया गया था। यह कार्रवाई तहसीलदार बोदरी द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर की गई थी, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप प्रमाणित पाए गए थे।निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया था कि संबंधित पटवारी के विरुद्ध विस्तृत विभागीय जांच की जाएगी और निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय एसडीएम कार्यालय बिल्हा निर्धारित रहेगा हालांकि, घटनाक्रम ने अप्रत्याशित मोड़ तब लिया जब 07 अप्रैल 2026 को प्रस्तुत एक नए जांच प्रतिवेदन के आधार पर 08 अप्रैल 2026 को निलंबन आदेश को निरस्त करते हुए पटवारी को पुनः उनके पूर्व पदस्थापना स्थल पर बहाल कर दिया गया। आदेश में उल्लेख किया गया कि नवीन प्रतिवेदन के अनुसार आरोपों की स्थिति बदलने के कारण यह निर्णय लिया गया।
इस त्वरित कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय किसानों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए गए थे, तो इतनी जल्दी बहाली कैसे संभव हो गई। लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई केवल औपचारिकता निभाने के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है।वहीं इस मामले में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। संबंधित अधिकारियों से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
अब आमजन के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह निर्णय नियमों के तहत लिया गया या फिर किसी दबाव में। क्षेत्र के लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और प्रशासनिक विश्वसनीयता बनी रहे।


