
बिलासपुर, 2026 । सर्वप्रिय प्रकाशन, रायपुर-दिल्ली द्वारा सद्यः प्रकाशित कृति “कीर्तिशेष डा. पालेश्वर प्रसाद शर्मा” इन दिनों साहित्यिक एवं बौद्धिक जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है।
इस महत्वपूर्ण कृति का संपादन डा. शर्मा के शिष्य एवं हिंदी- छत्तीसगढ़ी के समर्थ रचनाकार डा. देवधर महंत ने किया है। ग्रन्थ में 47 कलमकारों ने डा. पालेश्वर प्रसाद शर्मा के विराट व्यक्तित्व और कृतित्व का विश्लेषण एवं व्याख्यान किया है। 51 सारगर्भित आलेखों, संस्मरणों एवं टिप्पणियों से समन्वित यह कृति डा. शर्मा कीर्ति कौमुदी से अनुप्राणित है।
डा. पालेश्वर प्रसाद शर्मा का जीवन वृत्त बहुआयामी रहा है। सन् 1942 के 14 वर्षीय किशोर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित स्वयंसेवक, गंभीर अध्येता एवं गहन शोधार्थी, तेज धावक, कबड्डी के निष्णात खिलाड़ी, अंग्रेजी के अध्यापक, हिंदी के प्राध्यापक, प्राचार्य, एन.सी.सी. के मेजर, शोध निदेशक, छत्तीसगढ़ी के ललित निबंधकार एवं कथाकार, छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक इतिहासकार, ‘गुड़ी के गोठकार’, छत्तीसगढ़ी के प्रामाणिक शब्दकोशकार, हिंदी के निबंधकार, लेखक, उपन्यासकार, चिंतक, विचारक, संपादक एवं समीक्षक, प्रखर वक्ता जैसे अनेक आयामों से उनका व्यक्तित्व निर्मित हुआ।
भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक, ऋषि एवं कृषि संस्कृति के उपासक, छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य के युगप्रवर्तक, हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार, भाषाविद् एवं शिक्षाविद् डाँ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा वस्तुतः छत्तीसगढ़ी लोकभाषा के चलते-फिरते इंसाइक्लोपीडिया थे।
यदि डाँ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा के साढ़े सतासी वर्षीय जीवन यात्रा की सार्थकता से परिचित होना है, तो इस कृति से गुजरना अनिवार्य हैइस ग्रन्थ को सजाने-संवारने में पं. दानेश्वर शर्मा, पं. राजेन्द्र- प्रसाद शुक्ल, दिनेश शर्मा, डा. विमलकुमार पाठक, डा. गणेश खरे, ईश्वर शरण पांडेय, डा. चित्तरंजन कर, सतीश जायसवाल, परदेशी राम वर्मा, राहुल सिंह, रामेश्वर वैष्णव, गिरीश पंकज, जागेश्वर प्रसाद, मन्नीलाल कटकवार, डा. अजय पाठक, डा. राजन यादव, डा. महेन्द्रकुमार ठाकुर, बजरंग केडिया, डा. बलराम, डा. देवधर महंत, डा. पीसीलाल यादव, डा. गिरधर शर्मा, भरत चंदानी, उमाकांत खुबालकर, प्रो. भूपेन्द्र पटेल, डा. फूलदास महंत, विजय मिश्रा “अमित”, डुमनलाल ध्रुव, राजेश चौहान, हरिश्चंद्र वाद्यकार, अमृतलाल पाठक, केशव शुक्ला, संजीव चंदेल, डा. हरिहर प्रसाद सराफ, बद्री सिंह कटहरिया, डा. मंतराम यादव, देवीप्रसाद शुक्ल, डा. कोमल प्रसाद राठौर, सत्येन्द्र तिवारी, प्रेमशंकर पाटनवार, महेश श्रीवास, डा. गंगाधर पटेल ‘पुष्कर’, अनन्य शर्मा सहित विदुषियों सरला शर्मा, शशि दुबे, डा. बेला महंत, मेघा तम्हाने ने अपने शब्द-पुष्प अर्पित किए हैंइस भव्य पुष्प-माल्य को एक मजबूत धागे में गूंथने का गुरुतर दायित्व डा. देवधर महंत ने कुशलता से निभाया है।
प्रकाशक: सर्वप्रिय प्रकाशन, रायपुर-दिल्ली संपादक: डा. देवधर महंत
कृति: कीर्तिशेष डा. पालेश्वर प्रसाद शर्मा
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