नरोत्तम मिश्रा को मोदी ,शाह की भाजपा ने निपटा दिया ,अर्श से फर्श में आ चुके मिश्रा जी का राज खुल रहा धीरे धीरे

मप्र  की राजनीति उबाल पर है। सत्तारूढ़ भाजपा में भगदड़ मची है । सूबे के गृह मंत्री रहते हुए राजनीति में काफी बवाल काट चुके नरोत्तम मिश्रा के ग्रह नक्षत्र ऐसे खराब हुए कि मोदी, शाह की भाजपा ने उन्हें अर्श से फर्श पर ला पटका है। उप चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट न देकर एक तरह से उनकी औकात बता दिया है तो दूसरी तरफ नए चेहरे को टिकट देकर पार्टी ने यह भी संदेश दे दिया है भाजपा को अब पुराने और बदनाम चेहरों की जरूरत नहीं है।

अब बताइए मिश्रा जी कमलनाथ  सरकार में विधायक खरीद रहे थे। स्टिंग ऑपरेशन में भी नाम आया। अब इन्हें खुद ही खड़े खड़े बीजेपी वालों ने बेच दिया है ।

ऐसे आदमी को बहुत पहले बेदखल करना था। केवल भ्रष्ट व्यक्ति ही इसकी उम्मीदवारी का समर्थन कर सकता है।  इन पर लगे आरोपों की सूची पर गौर करेंगे तो आप भी उनसे कन्नी काट लेंगे और कहेंगे भाजपा अच्छा ही किया।

 नरोत्तम मिश्रा पर जो आरोप लगते रहे है उसकी बानगी आप भी पढ़ें और विचार करें :साल 2008 के विधानसभा चुनाव में उन पर ‘पेड न्यूज’ छपवाने और चुनाव खर्च का सही ब्यौरा न देने का गंभीर आरोप लगा। इस मामले में 2017 में चुनाव आयोग ने उन्हें 3 साल के लिए अयोग्य भी घोषित किया था, जिसके खिलाफ मामला बाद में कोर्ट पहुंचा।

शहरी विकास मंत्री रहते हुए उन पर हैदराबाद की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को 267 करोड़ रुपये का टेंडर देने के बदले करोड़ों रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा था। आरोप था कि यह पैसा मुखौटा (शेल) कंपनियों के जरिए उनके करीबियों तक पहुंचाया गया। हालांकि, बाद में उन्हें आयकर ट्रिब्यूनल से राहत मिल गई थी।

 साल 2019 में मध्य प्रदेश के बहुचर्चित 80,000 करोड़ रुपये के ई-टेंडरिंग घोटाले में उनका नाम सामने आया था, जब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने उनके निजी सचिवों और करीबियों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, जांच में उनके खिलाफ सीधे तौर पर कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले।

साल 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने के दौरान, व्यापम घोटाले के व्हिसलब्लोअर द्वारा सोशल मीडिया पर एक कथित स्टिंग वीडियो जारी किया गया था, जिसमें नरोत्तम मिश्रा पर कांग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त में शामिल होने का आरोप लगाया गया था।

 विपक्ष और स्थानीय नेताओं द्वारा उन पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पुलिस के जरिए राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने, डराने-धमकाने और झूठे मुकदमों में फंसाने के आरोप भी लगते रहे हैं।

निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176

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