इधर एएसपी रजनेश सिंह अपराधियों पर नकेल कसने पूरी टीम के साथ जी तोड़ मेहनत कर रहे तो कुछ नामुराद कर्मी भयादोहन के लालच में मेहनत पर पानी फेर रहे, वसूली बाजों को आखिर किसका संरक्षण ?

: बिलासपुर। एक तरफ जहां अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह अपने अधीनस्थ जिले के सारे पुलिस अधिकारी ,कर्मचारी और विभाग के सारे अमले को जनता की सुरक्षा में लगाते हुए होली त्यौहार को बिना किसी आपराधिक घटना के शांति पूर्ण मनवाने के लिए रात दिन एक कर दिया है ।उनकी मेहनत ने अपराधियों,चोर उचक्कों,गुंडा,आपराधिक तत्वों में ऐसा डर और दहशत पैदा कर दिया है कि वे घरों में दुबक गए है या फिर कोई अपराध करने के पहले दस बार सोचेंगे। पुलिस की इस अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था और मेहनत को सेल्यूट है वहीं दूसरी तरफ पुलिस के ही कुछ लोग विभाग की मिट्टी पलीद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे । कोटा की घटना इसका प्रमाण है । आधा दर्जन अदने से लोग अपने को क्राइम ब्रांच का होना बता भयादोहन के लिए चार पहिया वाहनों में पहुंच जाएं ,विश्वास नहीं होता लेकिन ऐसा हुआ है । इस पूरे मामले की तह तक पहुंचना जरूरी है । हो सकता है इसके पीछे पुलिस के ही किसी अधिकारी का दिमाग चला हो । लाखों रुपए वसूली की नियत में पहुंचे इन वसूली बाजों को भले ही 54 हजार रुपए ही मिले लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में पर्दे के पीछे कौन कौन थे इसकी जांच तो बनती है ।

वैसे सामान्य खबर यही थी कि पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई से प्रभावित पुलिस वाहन चलाने वाले कुछ चालकों ने भयादोहन का रास्ता अपनाकर – थाना कोटा क्षेत्र में क्राइम ब्राच का अधिकारी बनकर धमकी देने और जबरन वसूली करने का कृत्य कर बैठे । पुलिस ने शिकायत पर कुछ चालकों को गिरफ्तार भी किया है। पूरे मामले में आधा दर्जन लोगों के शामिल होने की खबर है। बड़ा सवाल तो यह है कि आधा दर्जन ! पुलिस वाहन चालक धमकी और भयादोहन के लिए जा धमके और कोटा पुलिस तथा टी आई को इसकी भनक तक नहीं लगी। ये चालक किस चार पहिया वाहन में भया दोहन करने गए थे उस वाहन के बारे में भी पतासाजी होनी चाहिए। उक्त स्कॉर्पियो किसके लिए आबंटित है यह भी स्पष्ट होना चाहिए।

घटना क्रम कुछ यूं था कि ग्राम करगीखुर्द निवासी प्रार्थी अभिषेक सिंह ने थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई । जिस पर पुलिस ने देव बघेल, विनय साहू और योगेश पाण्डेय उर्फ भूरू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बी एन एस) की धारा 296, 3(5), 308(7) और 319 (2) के तहत अपराध कायम किया है। प्रार्थी के अनुसार 26 फरवरी 2026 की रात लगभग 12:05 बजे आरोपी उसके घर के सामने पहुंचे और करीब 50 मिनट तक गाली-गलौज करते रहे। इसके बाद एक मोबाइल नंबर से फोन कर बुलाया गया। थोड़ी देर बाद योगेश पाण्डेय ने दोबारा फोन कर उसे मिलने के लिए कहा। आरोप है कि आरोपियों ने उसे CG 10 नंबर की स्कॉर्पियो वाहन में बैठाकर घर से करीब एक किलोमीटर दूर ले गए और 1.50 लाख रुपये की मांग की। रकम नहीं देने पर अवैध नशा सामग्री रखकर फंसाने की धमकी दी गई। डर के कारण प्रार्थी ने 54 हजार रुपये नगद आरोपियों को दे दिए। घटना के दौरान एक सफेद स्कॉर्पियो और एक लाल रंग की स्विफ्ट सीजी 10 बी डब्ल्यू 3926 वाहन मौके पर मौजूद थी। प्रार्थी ने देव बघेल, विनय साहू और योगेश पाण्डेय उर्फ भूरू को पहचान लिया है।

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि आरोपियों ने कोरीपारा पटैता निवासी मनोज यादव के घर जाकर भी गाली-गलौज और धमकी दी। घटना के बाद से पीड़ित परिवार दहशत में है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

इधर पुलिस विज्ञप्ति में बताया गया है कि प्रार्थी अभिषेक सिंह निवासी करगी खुर्द कोटा द्वारा थाने आकर लिखित आवेदन प्रस्तुत किया गया की अन्य जिले के एक आरक्षक द्वारा अपने कुछ साथियों के साथ जो पूर्व में पुलिस लाइन में हायर व्हीकल के ड्राइवर थे अपने आप को रायपुर क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर प्रार्थी को डरा धमका कर अपराध में फसाने की धमकी देकर पैसे लिए गए हैं ,प्रार्थी की रिपोर्ट पर कोटा में अपराध क्रमांक 169/26 धारा308(7), 319(2),296,170,3(5) के तहत दर्ज किया गया है ।प्रकरण में कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किया जा रहा है ।

सवाल तो यह भी उठता है कि घटना की रिपोर्ट 26 फरवरी की है और अपराध दर्ज 6 दिन बाद होता है । ऐसा क्यों? वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने कई मामलों में तत्काल कार्रवाई की है । कोटा थाने की ही एक घटना में गांजा मामले बिना किसी रिपोर्ट और बिना कोई शिकायत के दो पुलिस कर्मियों को लेनदेन के आरोप में निलंबित कर दिया गया और टी आई को शोकाज नोटिस जारी किया गया ।उस नोटिस के जवाब में टी आई ने ऐसा  क्या स्पष्टीकरण दिया कि सब कुछ ओके हो गया ।

भयादोहन मामले में सच्चाई क्या है यह तो कोटा थाने के sdop ,TI  और स्टाफ ही जाने लेकिन कोटा से बिलासपुर  तक यही चर्चा  जमकर है कि घटना में लगभग 6 लोग थे जिसमे sdop का ड्राइवर , एडिशनल एसपी का ड्राइवर,सी एस पी कोतवाली का ड्राइवर भी  था  । कुल मिलाकर 6 लोग थे । अब ये लोग सही ने शामिल थे कि नहीं उसके अधिकारी जाने।
बात यही खत्म नहीं हो जाती । एक आरोपी देव बघेल है जिसे टीआई का वाहन चालक होना बताया जा रहा है  और इसके साथ 2 ड्राइवर हैं जिसके खिलाफ प्रकरण बना हैं जबकि कुल 5-6 लोग थे जिसमे sdop कोटा और बिलासपुर के सी एस पी, एडिशनल एसपी का ड्राइवर भी होना बताया गया है  थाना प्रभारी कोटा तो जहां जहां भी पदस्थ रहे बड़े ही चर्चित रहे है  । सीपत थाना, रतनपुर थाना,और कोटा में जहां भी रहे उनके कारनामों ने उन्हें चर्चित कर दिया है ।  नाबालिग से कथित गांजा जब्ती मामले में इनकी भूमिका को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रही । बहरहाल एसएसपी ने टीम वर्क की भावना तथा अधीनस्थों को छोटी छोटी सफलता पर बधाई देकर जिस तरह प्रोत्साहित करते हुए होली त्यौहार पर शांति ,सद्भाव का माहौल बनाए रखने  के लिए जो मेहनत की है वह निश्चित ही तारीफे काबिल है लेकिन लालची और दागदार स्टाफ पर नजर रखने की उम्मीद भी है।

 

निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176

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