बिलासपुर (CGN 36 ) पुलिस अगर चाहती तो फरहदा गांव के कनक पटेल की जान बच सकती थी और वह आत्महत्या नहीं करता । जी हाँ सच्चाई यही है । आरोपी बलराम यादव का पूरे गांव में आतंक था । उप सरपंच सहित दर्जन भर पंचो ने और गांव की महिलाओं ने भी पुलिस में आरोपी व उसके साथियों के खिलाफ छेड़छाड़ ,गुंडागर्दी,धमकी ,मारपीट की लगातार शिकायतें की थी मगर सीपत पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की । ग्रामीणों ने एस एस पी से भी लिखित शिकायत की थी लेकिन वहां से भी ग्रामीणों की कोई सुनवाई नहीं हुई नतीजन आरोपी का आतंक सिर चढ़कर बोलने लगा । गांव के सरपंच का आरोपी बलराम पटेल को प्रश्रय मिला हुआ था । मारपीट ,धमकी और आरोपी के गुंडों के आए दिन मकान जमीन खाली करने के दबाव से मानसिक रूप से परेशान पटेल ने आखिरकार जहर का सेवन कर लिया । सिम्स में भी उसे बचाया नहीं जा सका । मृतक ने एक पत्र भी लिख छोड़ा है जिसमें उसने आरोपी को ही जिम्मेदार ठहराया है।
एक तरफ एसएसपी पूरे जिले में गुंडा तत्वों,निगरानी शुदा बदमाशों वारंटियों की खोज खबर लेकर सोशल मीडिया में वाहवाही लगातार वाहवाही लूट रहे है तो दूसरी तरफ फरहदा गांव में आरोपी बलराम यादव और उसके साथियों द्वारा छेड़छाड़ ,धमकी,दबाव ,मारपीट की शिकायतों पर सीपत पुलिस चुप बैठी रही ,नतीजा एक पीड़ित ने जहर खा कर जान दे दी । आश्चर्य तो यह कि मृतक कनक पटेल का अस्पताल में इलाज होते तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की और शायद उसके मरने का इंतजार करते रही । सिम्स में उसकी मौत के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया लेकिन मृतक तो अब लौटकर आने से रहा ।
सीपत पुलिस ने समय रहते कार्रवाई नहीं की यह तो समझ में आता है लेकिन आश्चर्य तो यह भी है कि एसएसपी रजनेश महिलाओं, पंचों और ग्रामीणों के आवेदन पर सीपत पुलिस को तत्काल जांच कार्रवाई करने का निर्देश देने से चूक कैसे गए? जबकि ग्रामीण और महिलाएं आरोपी और उसके किराए के बदमाशों के आतंक से परेशान होकर उससे निजाद दिलाने के लिए एसएसपी से गुहार लगाई थी।
अगर समय रहते उन गुंडों बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई हो जाती तो उस बेचारे जहर खाकर जान देने विवश नहीं होना पड़ता। अभी केवल उस आरोपी को ही गिरफ्तार किया गया है ।उसके साथी गुंडे पकड़ से बाहर है । उनके और आरोपी को प्रश्रय देने वाले सरपंच के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।



