बिलासपुर । आज महाराणा प्रताप की जयंती है और महाराणा प्रताप चौक में लगे शिलालेख पत्थर को आखिर नगर निगम ने सुधार कर नए कलेवर में लगवा दिया है। जिस पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव जयंती अवसर पर फूल माला अर्पित करते हुए महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि देंगे । मामला यही समाप्त नहीं होता बल्कि कई प्रश्न अनुत्तरित है।
दरअसल महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण वर्ष 2001 में लोरमी के तत्कालीन विधायक धरमजीत सिंह की मौजूदगी में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने किया था तब प्रतिमा सड़क के बीचों बीच स्थापित किया गया था लेकिन राज्य में भाजपा की सरकार आने के बाद वर्ष प्रतिमा को सड़क किनारे करने के साथ ही उस वक्त भी लोकार्पण किया गया था और यही खेल भी कर दिया गया था ।
शिलालेख पत्थर में बृजेश सिंह के नाम के आगे “राष्ट्र कवि” दर्शाकर लोकार्पण को विवादास्पद कर दिया गया। इसका विरोध उस वक्त भी किया गया था लेकिन लोकार्पण करने वालों ने विरोध को अनसुना कर दिया था । पहले लोकार्पण का शिलालेख पत्थर गायब कर दिया गया । वह शिलालेख पत्थर कहां है किसी को पता नहीं है लेकिन भाजपा सरकार के दौरान लोकार्पित पत्थर में राष्ट्रकवि ब्रजेश सिंह लिखे जाने का लगातार विरोध होता रहा । राज्य में भाजपा की सरकार पुनः आने पर राष्ट्र कवि का मामला फिर उठा और विरोध का स्वर मंत्रालय तक जा पहुंचा । तब कहीं जाकर राष्ट्र कवि लिखे गए पत्थर को बदला गया । इस तरह कथित राष्ट्र कवि की पोल खुली और आनन फानन में पत्थर बदला गया मगर उन किताबों का क्या होगा जिसमें लेखक ब्रजेश सिंह ने अपने नाम के आगे राष्ट्र कवि लिखकर अपने आपको गौरवान्वित कर रहा है। राष्ट्रकवि लिखे ऐसे तमाम पुस्तकों पर भी प्रतिबंधित करने जैसी कार्रवाई होनी चाहिए। इस पूरे मामले में लगातार शिकायत कर कार्रवाई को अंजाम देने वाले रायपुर के समाजसेवी राकेश चौबे ने मुख्य सचिव छग शासन को पत्र लिखकर सार्थक कार्रवाई करने के लिए आभार जताया है।



