
!तीन छोटी मछलियों को निगलने तो नहीं आ गई है बड़ी मछली?
बिलासपुर,(CGN 36)। व्यवसायिक प्रतिद्वंदिता किसी भी हद तक जा सकती है। इसकी स्क्रिप्ट शायद लिखी भी जा चुकी है। प्रदेश के 3 डिस्टलरीज पर खतरा मंडराने लगा है और इसकी शुरुआत हो चुकी है। अभी 3 दिनों से इसका ट्रेलर साफ दिख रहा है ।
शिवनाथ नदी की मछलियां मरने और पानी काला हो जाने की खबरों के पीछे का कारण इसी व्यवसायिक प्रतिद्वंदिता के होने की आशंका है हालांकि खबर के बाद पर्यावरण विभाग और मत्स्य विभाग के अधिकारियों की टीम ने मौके पर जाकर जांच की । तहसीलदार अतुल वैष्णव का कहना था कि जांच टीम ने 3 स्थानों से सेंपल लिया है और उसे जांच के लिए भेजा गया है । जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस बारी कुछ कहा जा सकता है। श्री वैष्णव ने यह भी कहा कि नदी किनारे रेत में कुछ छोटी मछलियां मृत पाई गई लेकिन नदी का पानी पहले जैसा ही है । काला नहीं हुआ है।
शिवनाथ नदी में मछलियों की मौत और पानी काला होने की खबरों के बीच अब प्रशासन की तरफ से बड़ी अपडेट सामने आई है।
“जी हां, शिवनाथ नदी को लेकर फैल रही खबरों पर अब स्थिति काफी हद तक साफ होती नजर आ रही है।
पथरिया तहसीलदार अतुल वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि नदी किनारे कुछ छोटी-छोटी मछलियां जरूर मृत अवस्था में मिली हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की बात सही नहीं है।
वहीं, सबसे अहम बात ये है कि नदी का पानी काला होने की खबर को भी खारिज किया गया है। प्रशासन के मुताबिक, नदी का पानी पहले की तरह सामान्य स्थिति में है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच टीम ने नदी के तीन अलग-अलग स्थानों से पानी के सैंपल लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है।बताया जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने में करीब 3 से 4 दिन का समय लग सकता है। रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। अब आइए व्यवसायिक प्रतिद्वंदिता की आशंका वाली बात पर तो यहां यह बता दें कि छत्तीसगढ़ में केडिया डिस्टलरी,भाटिया डिस्टलरी और कोटा के क्षेत्र के वेलकम डिस्टलरी संचालित है । दो साल पहले पंजाब के एक नेता ने मुंगेली जिले में डिस्टलरी शुरू करने की प्रक्रिया प्रारंभ की थी और यह संयोग ही है कि दो साल पहले से ही छत्तीसगढ़ के कुछ डिस्टलरी के खिलाफ सुनियोजित ढंग से पर्यावरण प्रदूषण, ग्रामीणों में विभिन्न प्रकार के रोग जनित समस्या होने और मछलियों के बड़े पैमाने पर मरने की खबर फैलाई गई जिसका मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है। यह उल्लेखनीय है कि धूमा स्थित भाटिया डिस्टलरी की क्षमता 60 केएलडी ,वेलकम डिस्टलरी की 40 केएलडी और केडिया डिस्टलरी की उत्पादन क्षमता 100 केएलडी की है ।इस तरह तीनों डिस्टलरी की कुल क्षमता 200 केएलडी की है लेकिन मुंगेली जिले के सिल्ली ग्राम में प्रस्तावित डिस्टलरी की अकेले की क्षमता 600 केएलडी की होगी जाहिर है पहले से छग में संचालित तीनों डिस्टलरी से व्यवसायिक प्रतिद्वंदिता होना स्वाभाविक है ।
आशंका तो यह है कि प्रस्तावित डिस्टलरी के कर्ताधर्ता छग में अपनी ही मोनोपली कायम रखने के लिए अपने प्रभाव के बल पर कुछ भी कर सकते है ।तीनों डिस्टलरी वालो को किस तरह परेशानी में डाला जाए इसकी भी रणनीति यदि तैयार हो गया हो तो कोई आश्चर्य नहीं होगा जिसकी शुरुआत शायद हो भी चुकी है।
आइए जानें सिल्ली में प्रस्तावित डिस्टलरी के बारे में
:— मुंगेली जिले के फास्टरपुर इलाके में लगने वाले मल्टी इन्टीग्रेटेड प्लांट से इलाके के तकरीबन 20 गांव में पेयजल, निस्तारी जल तथा फसलों की सिचाई के लिये पानी की किल्लत हमेशा बनी रहेगी। फरवरी से जून तक इस इलाके के अधिकांश बोरबेल्स सूख जाते हैं तथा पेयजल के लिये ग्रामीणों को भारी मसक्कत करना पड़ता है। इस क्षेत्र में नाला एवं नहर तथा नदी नही हैं, जिससे की प्राकृतिक जल स्तर को रीचार्ज किया जा सके और दूसरे शब्दों में कहें तो समूचा इलाका बंजर हो जायेगा। इस इलाके के कैथ नवागांव में दिगर प्रांत के बड़े औद्योगिक घराने के द्वारा आर.एस.एल.डी. बायोफ्यूल्स प्रा.लि. नाम का प्लांट लगाया जा रहा है जिसमें 600 केएलडी रेक्टिफाईड स्प्रिट का डिस्टलरी, एथेनॉल प्लांट तथा 12 मेगावाट का बिजली का प्लांट लगेगा। इन तीनों संयंत्रों के लिये प्रतिदिन करोड़ों घनलीटर पानी की आवश्यकता पड़ेगी जिसे आधुनिकतम तकनीक से जमीन के हजारों मीटर नीचे से पानी लिया जायेगा। इसका दुष्परिणाम यह होगा कि आसपास के 20 किलोमीटर के क्षेत्र के गांवों में पानी की भारी किल्लत होगी। पीने का पानी, निस्तारी का पानी तथा फसलों की सिंचाई के लिये पानी ही नहीं मिलेगा। परिणाम स्वरूप समूचा फास्टरपुर एरिया सूना हो जायेगा। इसकी जन सुनवाई 17 नवंबर 2025 को हो चुकी है।
क्या कहते है विपक्षी दल के नेता
कांग्रेस के वरिष्ट नेता अर्जुन तिवारी ने इस पर कड़ा एतराज जताते हुये मुंगेली जिले के नेताओं की चुप्पी पर आश्चर्य व्यक्त किया है साथ ही संयंत्र के प्रबंधन से आग्रह किया है कि वे इस प्लांट को ऐसे इलाके में लगायें जहां नदी, बड़े बांध या पानी की प्रचुर उपलब्धता हो।
श्री तिवारी ने संयंत्र प्रबंधन को चेतावनी भी दिया है कि 17नवंबर.2025 को इस प्लांट के पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु जो जन सुनवाई आयोजित की गई थी उसमें अनेकों त्रुटियां हैं, जिसे एन.जी.टी. न्यायालय तथा आवश्यकता पड़ी तो उच्चतम न्यायालय में चुनौती देकर निरस्त कराया जावेगा और किसी भी स्थिति में प्लांट लगने नहीं दिया जायेगा। इसके लिये वे बहुत जल्द इस इलाके में अपने स्वयंसेवी सामाजिक संस्थाओं के साथ जन संपर्क कर स्थिति का जायजा लेंगे।
निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176
Sun May 3 , 2026
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