भाजपा पार्षद बंधु मौर्य ने अपने कार को पिस्टल दिखाकर रोकने की घटना की जानकारी आखिर पुलिस से क्यों छिपाई थी? तत्काल रिपोर्ट की स्थिति में अपराधी पकड़े भी जाते और संभव है महालक्ष्मी ज्वेलर्स के संचालक पर हमला और लूट की घटना नहीं हो पाती

 बिलासपुर। अंतर्राज्यीय कुख्यात गिरोह के लोगों को बिलासपुर बुलाकर हत्या , लूट जैसे संगीन अपराधों को अंजाम देने वाले स्थानीय अपराधियों की पोल पुलिस ने खोल कर रख दी है । बाहरी अपराधी और स्थानीय अपराधी सभी पकड़े गए है । स्थानीय पुलिस बधाई के पात्र है जिन्होंने तमाम कड़ियों को जोड़कर सारे संभावित अपराधों का खुलासा कर दिया है । पुलिस ने यह भी बताया है कि यह गिरोह भाजपा पार्षद बंधु मौर्य की हत्या करने 25 लाख रु की सुपारी ली थी जिसमें से 6 लाख रुपए का अग्रिम भुगतान भी हो गया था ।ध्यान देने वाली बात यह है कि सुपारी देने वाला राजू सोनकर बेल तरा भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा का मंडल अध्यक्ष है और बंधु मौर्य भाजपा का पार्षद है । यानी एक भाजपा के नेता दूसरे भाजपा नेता की हत्या करवाने और उससे लुट के लिए 25 लाख रु की सुपारी दे दी थी।

पुलिस के मुताबिक अपराधियों के इस गिरोह ने बंधु मौर्य के घर दुकान की रेकी भी की और चांटी डीह में बंधु मौर्य की कार को पिस्टल दिखाकर रोकने की कोशिश की मगर बंधु मौर्य ने कार नहीं रोकी बल्कि तेज रफ्तार से कार भगा कर अपनी जान बचा ली।कायदे से हत्या की कोशिश या हमले के प्रयास की सूचना बंधु मौर्य को पुलिस को देनी थी मगर बंधु मौर्य ने इतनी बड़ी घटना को छिपाए रखा उस ने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी ।इसके क्या कारण हो सकते है? बंधु मौर्य ने पुलिस से यह बात क्यों छिपाई ? हो सकता है यदि बंधु मौर्य इस बात की सूचना पुलिस में देते तो पुलिस शायद अपराधियों को पकड़ लेती और राज किशोर नगर के महालक्ष्मी ज्वेलर्स के संचालक के ऊपर जानलेवा हमला और लूट की वारदात नहीं होती। और पुलिस को इतनी मशक्कत नहीं करनी पड़ती ।

दरअसल बिलासपुर में जमीन का विवाद इतना बढ़ गया कि लोग जान के दुश्मन बनते जा रहे है । बंधु मौर्य और राजू सोनकर के बीच भी जमीन का ही झगड़ा चल रहा है। जमीन खरीद फरोख्त का धंधा पिछले कई साल से शहर इस कदर पनप चुका है कि लोग रातों रात धन्नासेठ बन जाना चाहते है । सरकारी जमीन पर कब्जा ,विवादित जमीन का लेनदेन इतना बढ़ गया है कि तमाम राजनैतिक दल के नेता ,कार्यकर्ता इस अवैध धंधे में कूद चुके है और राजस्व विभाग का अमला या तो दबाव के चलते उनका साथ दे रहे है या फिर बड़ी कमाई और अर्थ लिप्सा ने उनकी आँखें बंद कर दी है ।

जिले में अलग-अलग विभागों में माफिया राज स्थापित है.. भू माफ़िया, शराब माफिया, राशन माफ़िया, टेंडर माफ़िया ,खनन माफिया, जनपदों में अनधिकृत ठेकेदारों का माफ़िया, बिजली विभाग का वसूली माफ़िया वग़ैरह… वग़ैरह..

सबसे ख़तरनाक तथ्य है- ज़्यादातर माफ़िया सर्वदलीय हैं, जो पर्दे के पीछे किसी न किसी राजनेता द्वारा संचालित होता है… या राजनेता का घोषित संरक्षण होता है..

जिस तरह से बड़े ठेकेदार टेंडर लेकर स्थानीय बेरोज़गारों/कमजोर छोटे ठेकेदारों को पेटी में काम देते हैं उसी तरह माफ़िया गिरोह के संरक्षण में कार्यों का बँटवारा हो जाता है..

 चूँकि विभागों में सक्रिय गिरोहों को सरकारी अधिकारियों का पूरा सहयोग रहता है इसलिए गिरोह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती , कोई शिकायत भी करता है तो चोर चोर मौसेरे भाई जाँच के नाम पर लीपा पोती कर देते हैं और शिकायत कर्ता को विभिन्न प्रकार से प्रताड़ित करते हैं… फंडा ये है- भ्रष्टाचार/घोटाले , गड़बड़ी की शिकायत होने पर गड़बड़ी और गड़बड़ी करने वाले को “ठीक” करने करने की बजाय पूरा System गड़बड़ी बताने वाले को ठीक करने में जुट जाता है …

ऐसा लगता है मारने का सुपारी उद्योग तेजी से फलने फूलने लगा है । सुपारी देने के रेट में भी बढ़ोतरी होने लगी है। तीन माह पहले मस्तूरी में भी सुपारी देने की घटना हुई थी जिसमें दोनों पक्ष कांग्रेसी थे और सुपारी का रेट सिर्फ दो लाख था लेकिन पुलिस ने कल जो खुलासा किया उसमें सुपारी का रेट बढ़कर 25 लाख रु हो गया है । सत्तापक्ष के लोग है इसलिए सुपारी का रेट इतना बढ़ गया है । कांग्रेस के लोग तो बिचारे है इसलिए उनका सुपारी रेट 2 लाख ही है । मस्तूरी ,बिलासपुर के सुपारी देने वाली दोनों वारदातो को देखें तो लोग अपनी ही पार्टी के नेताओं के लिए सुपारी देना शुरू कर दिए है । इस सुपारी उद्योग पर कड़ाई से कार्रवाई होनी चाहिए। लोगो के पास पैसा इतना ज्यादा आने लगा है कि अपने स्वार्थ को पूरा करने लाखों रुपए चुटकी में देने लगे है।

तमाम विभाग के अफसर यदि ठान लें कि कोई गड़बड़ी नहीं होने देंगे और दबाव में नहीं आयेंगे तो कोई गड़बड़ी नहीं होगी ।सरकार के नुमाइंदे जीरो टारलैंस भ्रष्ट्राचार की बात तो करते है लेकिन अधिकांश लोग और उनके समर्थक उसी आकंठ भ्रष्ट्राचार में डूबे रहते है। बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे।अब राजू सोनकर और नारद श्रीवास के भी आका होंगे मगर वे इस खुलासे के बाद निश्चित ही  अपना पल्ला झाड़ लेंगे।

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निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176

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