उसलापुर माल गोदाम शेड मामले में कलेक्टर  द्वारा बुनियादी सुविधाओं की रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश 

रिपोर्ट में उसलापुर गुड्स शेड में कई बुनियादी सुविधाओं में कमी की बात कही गई

22 जुलाई को हाई कोर्ट में  मामले पर अंतिम सुनवाई होगी

बिलासपुर 16 जुलाई । बिलासपुर का माल गोदाम शेड बंद कर उसलापुर में प्रारंभ करने के निर्णय के खिलाफ लगी मजदूर यूनियन और ट्रक मालिक संघ की दो याचिकाओं पर आज हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट के पिछले आदेश के अनुरूप कलेक्टर के द्वारा एक टीम गठित करके उसलापुर माल गोदाम में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर मांगी गई रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

गौरतलब है कि हाई कोर्ट की पिछली सुनवाई में जस्टिस एके प्रसाद ने उसलापुर माल गोदाम शेड में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की जांच के लिए कलेक्टर को एक कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था और यह रिपोर्ट 13 जुलाई तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के परिपालन में कलेक्टर बिलासपुर में नगर निगम के म्युनिसिपल कमिश्नर की अध्यक्षता में रेलवे के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक और पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता की टीम बनाई थी इस टीम के द्वारा आज हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में यह बात साफ तौर पर स्वीकार की गई है कि कई बुनियादी सुविधाओं का उसलापुर गुड्स शेड में नितांत अभाव है। जैसे कि वहां पर शेड और गोदाम ही नहीं है दूसरी ओर ट्रकों के घूमने की जगह नहीं है। साथ ही साथ जल भराव की स्थिति में ड्रेनेज आदि का पूरा अभाव है । वही जो एप्रोच रोड है उसे मरम्मत की आवश्यकता है। इसके अलावा मजदूरों के बैठने नहाने आदि के लिए जो रूम है वह बिलासपुर छोर पर 1किलोमीटर दूर है वहीं उसलापुर छोर पर अभी यह काम अधूरा है। उसलापुर गोदाम शेड में जीरो लेवल प्लेटफॉर्म का उल्लेख भी है। आज हुई सुनवाई के दौरान याचिका कर्ताओं की ओर से उपस्थित अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने गुड्स शेड क्षेत्र के कुछ फोटोग्राफ भी प्रस्तुत किया जिसमें वहां सुविधाओं का भाव साफ दिख रहा था। सुनवाई के दौरान याचिका कर्ताओं की ओर से जोर देकर कहा गया कि रेलवे लगातार  न्यायालय को गुमराह करने वाले बयान दे रहे हैं और गलत जानकारियां प्रस्तुत कर रही है। इसका रेलवे की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने विरोध किया और कहा कि नहीं हमने बुनियादी सुविधाएं निर्मित की है। याचिका में हस्तक्षेप याचिका दायर करने वाले संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रफुल्ल भारत ने भी कहा कि वह अपना जवाब इस मामले में प्रस्तुत करना चाहते हैं इसलिए उनके हस्तक्षेप याचिका स्वीकार की जाए जिससे  उच्च न्यायालय ने याचिका के समर्थन में इस हस्तक्षेप याचिका को स्वीकार कर लिया।

सुनवाई के अंत में आदेश लिखाते हुए जस्टिस ए के प्रसाद ने कहा कि सभी पक्ष 22 जुलाई के पहले और जो भी दस्तावेज आदि प्रस्तुत करना चाहते हैं वह प्रस्तुत कर दें। 22, जुलाई को इस मामले की अंतिम सुनवाई की जाएगी।

निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176

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