भीषण गर्मी में स्कूल खोलने का फैसला अमानवीय , 16 जून से स्कूल खोलने के निर्णय पर सरकार पुनर्विचार करे, तिथि आगे बढ़ाई जाए शैलेश पाण्डेय

बिलासपुर। पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं राज्य सरकार से 16 जून से स्कूल खोलने के निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है और ऐसी स्थिति में छोटे बच्चों को स्कूल भेजना उनके स्वास्थ्य के साथ गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

शैलेश पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार को बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। वर्तमान मौसम परिस्थितियों में स्कूल खोलने का निर्णय पूरी तरह अव्यावहारिक और संवेदनहीन प्रतीत होता है। प्रदेश के लाखों अभिभावक अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं, लेकिन सरकार उनकी आशंकाओं को नजरअंदाज कर रही है।

उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के कारण बच्चों में डिहाइड्रेशन, लू लगना, चक्कर आना, उल्टी, बुखार और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। खासकर प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के छात्र-छात्राएं इस मौसम का सामना करने में अधिक असुरक्षित होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो कई स्कूलों में पेयजल, पंखे और पर्याप्त छायादार व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बच्चों को स्कूल बुलाना उनके जीवन और स्वास्थ्य को खतरे में डालने जैसा है।

पूर्व विधायक ने कहा कि जब मौसम विभाग लगातार गर्मी और हीट वेव को लेकर चेतावनी जारी कर रहा है, तब सरकार का स्कूल खोलने पर अड़ी रहना समझ से परे है। सरकार को एयर कंडीशनर कमरों में बैठकर निर्णय लेने के बजाय जमीनी हकीकत को समझना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा किसी भी प्रशासनिक कैलेंडर से अधिक महत्वपूर्ण है।

शैलेश पांडेय ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, स्कूल शिक्षा मंत्री तथा संबंधित विभाग से मांग की कि प्रदेश में मौसम की वास्तविक स्थिति का आकलन कर स्कूल खोलने की तिथि कम से कम एक से दो सप्ताह आगे बढ़ाई जाए। साथ ही तापमान सामान्य होने तक वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाए ताकि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार बच्चों के स्वास्थ्य और अभिभावकों की चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए स्कूल खोलने के निर्णय पर कायम रहती है, तो यह जनभावनाओं के विपरीत कदम माना जाएगा। सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल निर्णय की समीक्षा करनी चाहिए और विद्यार्थियों के हित में उचित फैसला लेना चाहिए।

 

निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176

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