बिलासपुर। सिम्स अस्पताल में कल फिर हंगामा बरप गया । अपने आपको हिंदूवादी संगठन का नेता बताने वाला ठाकुर रामसिंह का हंगामा , गालीगलौच सभी ने देखा और सबसे बड़ी बात सिम्स का पुलिस चौकी और वहां का पुलिस स्टाफ क्या कर रहा था ? सिम्स में पुलिस चौकी की स्थापना किसलिए की गई है? कानून व्यवस्था संभालने चौकी के पुलिस कर्मियों का क्या कोई दायित्व नहीं है ? मरीजों के परिजनों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिको लीगल केस में ही ज्यादा रुचि रखने वाले सिम्स चौकी के पुलिस कर्मियों को सिम्स में होने वाले विवाद, झगड़ा, गुंडागर्दी करने वालों से कोई मतलब नहीं है । क्या ये सबके लिए सिम्स प्रबंधन जिम्मेदार है? बड़ा सवाल यह है कि सिम्स चौकी में ही लंबे समय तक खूंटा गाड़ के रहने का मोह पुलिस कर्मियों को क्यों रहता है? अभी भी जो पुलिस कर्मी तैनात हैं उनको चार साल से ज्यादा हो गया है और बड़ी बात यह है कि यहां कोई नया पदस्थ होता है तो उसे टिकने नहीं दिया जाता ।
सबसे पहले तो सिम्स पुलिस चौकी की पूरी सर्जरी की जरूरत है। पूरे के पूरे स्टाफ को बदलने से ही दुकानदारी खत्म हो सकती है। कुछ माह पहले मरीजों से आन लाइन भुगतान लेने की खबर उजागर हुई थी ।इसके लिए तत्कालीन चौकी प्रभारी द्वारा वाहन स्टैंड ठेकेदार के कर्मी के मोबाइल नंबर पर मरीज के परिजन से रकम ट्रांसफर करवाने का मामला मीडिया में उजागर हुआ था तो उन्हें राशि वापस भी करनी पड़ी थी। सवाल यह है कि चौकी कहीं वसूली का अड्डा तो नहीं बनता जा रहा? मेडिको लीगल मामलों में पीड़ित परिवार वैसे भी परेशान रहता है और पुलिस पूछताछ से लेकर तमाम दिक्कतों से तथा अस्पताल से जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहते है । रिपोर्ट बनाने,बयान दर्ज करने से लेकर रिपोर्ट देने तक में राहत की बात आती है तो बिना सुविधा शुल्क के कोई भी राहत संभव नहीं है।
हम कोई व्यतिगत किसी के ऊपर लांछन नहीं लगा रहे लेकिन चौकी की सामान्य प्रक्रिया में एक बार “पूरे घर को बदल डालूंगा” की तर्ज पर आमूल चूल परिवर्तन बहुत जरूरी हो गया है ताकि नए स्टाफ से सिम्स में कानून व्यवस्था नियंत्रित करने की उम्मीद की जा सके। आश्चर्य तो तब होता है जब चौकी के स्टाफ पर आर्थिक लेनदेन या कोई और आरोप लगते है तो विभागीय अधिकारी ,वरिष्ठ अधिकारी तुरत एक्शन लेने के बजाय हिलहवाला करते है और मामले की जांच की बात कहते है और मामला ठंडा पड़ जाता है। अब आइए कल क्या हुआ उसे जानते है।
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) अस्पताल में शुक्रवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब एनआईसीयू वार्ड के बाहर ड्यूटी पर तैनात गार्ड और एक हिंदूवादी संगठन के नेता के बीच विवाद हो गया। मामले में गार्ड के साथ गाली गलौज और अभद्रता का आरोप लगाया गया है। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।जानकारी के अनुसार, हिंदूवादी संगठन से जुड़े राम सिंह ठाकुर सी.यू. एनआईसीयू की ओर जा रहे थे। उसी दौरान वहां सफाई कार्य चल रहा था और फर्श पर पोंछा लगाया जा रहा था। ड्यूटी पर मौजूद गार्ड मनीष कश्यप ने उन्हें कुछ देर रुकने के लिए कहा। सिंह ठाकुर नाराज हो गए और गार्ड के आरोप है कि इसी बात को लेकर राम सिंह ने उसके साथ गाली-गलौज करते हुए उसका कॉलर पकड़ लिया। इस दौरान दोनों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, जिसमें गार्ड के गले की चेन और लॉकेट टूटने की बात सामने आई है।वायरल वीडियो में राम सिंह ठाकुर अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ पर नाराजगी जताते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में वे डीन और स्वास्थ्य मंत्री को बुलाने की बात कहते हुए कर्मचारियों को आम लोगों से सही व्यवहार करने की नसीहत देते नजर आ रहे हैं।वहीं, राम सिंह ठाकुर का कहना था कि गार्ड ने उनसे दुर्व्यवहार किया और अपमानजनक लहजे में बात की, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। उनका आरोप है कि अस्पताल के कुछ कर्मचारी मरीजों और परिजनों से ठीक व्यवहार नहीं करते।
इधर, सिम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. लखन सिंह ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि अस्पताल का गार्ड भी संस्थान के स्टाफ का हिस्सा है और उसके साथ गाली गलौज, अभद्रता’ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले की शिकायत पुलिस में की जाएगी ताकि कल ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।


