
एकल पीठ द्वारा सीबीआई को नोटिस जारी
मामले की सुनवाई जुलाई में होगी
बिलासपुर १५ मई । वर्ष 2017 के तत्कालीन मंत्री राजेश मूणत से जुड़े बहु चर्चित सी डी केस में आपराधिक अभियोग लगाने के सत्र न्यायालय के आदेश को मुख्य मंत्री भूपेश बघेल के राजनैतिक सलाहकार रह चुके विनोद वर्मा ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है। आज प्रारंभिक सुनवाई के बाद जस्टिस राधा कृष्ण अग्रवाल की एकल पीठ ने जांच एजेंसी सी बी आई को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में की जाएगी।
गौर तलब है कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह बहुचर्चित सी डी केस 2017 और 2018 में बहुत सुर्खियों में रहा है। तब के मंत्री राजेश मूणत से जुड़े अश्लील क्लिप वाली सी डी को बनाने और बंटवाने के अपराध में राज्य पुलिस ने मूणत की शिकायत कर तब के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और उनके मीडिया सलाहकार विनोद वर्मा के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की थी। वही इसके एक दिन पहले एक और एफ आई आर भाजपा कार्यकर्ता प्रकाश बजाज की शिकायत पर अंजान व्यक्ति के नाम पर दर्ज की गई थी। जहां पहली एफ आई आर में भयादोहन कर धन संपत्ति वसूलने का अपराध कायम हुआ था वही दूसरी एफ आई आर में आई टी एक्ट के तहत अश्लील वीडियो प्रसारित करने का आरोप था।
पहले एफ आई आर के बाद 26 -27 अक्टूबर 2017 की रात को गाजियाबाद में विनोद वर्मा के घर पर पुलिस की रेड हुई थी और उन्हें गिरफ्तार किया गया था जबकि उसके विरोध में दूसरे दिन 27 अक्टूबर 2017 को भूपेश बघेल के द्वारा एक प्रेस कांफ्रेंस करके भी तथाकथित सीडी का वितरण पत्रकारों को किया गया था। बाद में दोनों एफ आई आर को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया। सीबीआई निर्धारित अवधि में चालान प्रस्तुत नहीं कर पाई जिसके आधार पर विनोद वर्मा को दिसंबर 2017 में 63 दिन बाद जमानत मिल गई थी। अक्टूबर 2018 में सीबीआई द्वारा प्रस्तुत चालान में न केवल विनोद वर्मा और भूपेश बघेल बल्कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कैलाश मुरारका विजय पांडे और भिलाई के व्यापारी विजय भाटिया को भी आरोपी बनाया गया था। चालान में सीबीआई ने इस बात को स्वीकार किया है कि प्रकाश बजाज की पहली रिपोर्ट जिसके आधार पर विनोद वर्मा के घर पर रेड हुई थी उसमें लगाए गए आरोप साबित नहीं होते हैं परंतु चूंकि बाद में वही सीडी रायपुर में बाटी इसलिए दोनों रिपोर्ट को एक साथ मिलकर चालान प्रस्तुत कर उन्हें आरोपी बनाया गया है। इस मामले में
अन्य किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी फिर भी जमानत नामा दाखिल नहीं करने के कारण भूपेश बघेल इस मामले में तीन दिन रायपुर सेंट्रल जेल में निरुद्ध रहे थे जो एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा 2018 चुनाव के पहले बना था।
हाई कोर्ट में आज विनोद वर्मा की ओर से उपस्थित अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव और श्रेया गुप्ता ने दाखिल याचिका के तथ्यों को बताते हुए कहा कि स्वयं सीबीआई द्वारा दाखिल चालान यह स्पष्ट करता है कि उनके घर जिस रिपोर्ट के आधार पर छापा पड़ा था वह रिपोर्ट ही झूठी थी और स्वयं रिपोर्ट करता प्रकाश बजाज ने स्वीकार किया है। इसके अलावा भाजपा से जुड़े कैलाश मुरारका एवं उनके साथी विजय पांडे और रिंकू खनूजा के द्वारा एक अश्लील सीडी मुंबई में बनवाई गई थी जिसमें मंत्री राजेश मूरत का चेहरा जोड़ा गया था। उक्त पूरा क्रियाकलाप अगस्त 2017 में हुआ था और इसकी जानकारी तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के ओएसडी अरुण बिसेन को भी थी और उनके द्वारा मुंबई जाकर यह सीडी देखने की बात स्वीकार की गई है। इस कारण मंत्री राजेश मूणत की एक नकली अश्लील सीडी बनाने का आरोप उन पर नहीं मढ़ा जा सकता। वहीं दूसरी ओर उस सी डी को असली मानकर पत्रकारों को भेजना को आम जनता में अश्लील सीडी प्रसारित करने का अपराध नहीं बनता है। इन दोनों कारणों से उन पर जो अभियोग लगाए गए हैं वह अभियोग सही नहीं है और उन्हें इस मामले में पूरी तरह बरी किया जाना चाहिए।
रायपुर की निचली अदालत में विनोद वर्मा के तर्कों को स्वीकार नहीं किया है और सीबीआई के तर्क को स्वीकार किया है कि कैलाश मुरारका के द्वारा बनाए गए आपराधिक षड्यंत्र में वह किस स्तर पर शामिल हुए यह महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन क्योंकि अपराध की कड़ियां एक दूसरे से जुड़ती हैं इसलिए उन्हें भी सभी तरह के अपराध का आरोपी माना गया है। इस प्रकरण में मजिस्ट्रेट न्यायालय ने भूपेश बघेल को आरोपी से भारी कर दिया था परंतु सत्र न्यायालय रायपुर में उसे निर्णय को पलट कर उन पर भी यह अभियोग लगा दिया है।
आज की सुनवाई में जस्टिस राधा कृष्ण अग्रवाल ने यह सवाल भी पूछा कि क्या अन्य आरोपियों के द्वारा भी कोई ऐसी याचिका दाखिल हुई है जिस पर उन्हें बताया गया कि अभी तक यह पहली याचिका है। हाई कोर्ट के नोटिस के बाद अब सीबीआई इस प्रकरण में अपना जवाब प्रस्तुत करेगी और अब मामले की अगली सुनवाई जुलाई माह में निर्धारित की गई है।

