
बिलासपुर , (CGN 36) । जैसे की कल ही हमने पूरी संभावना जताई थी कि प्रधानमंत्री सड़क योजना के मुख्य अभियंता के के कटारे को उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छान बीन समिति द्वारा उनके जाति प्रमाण पत्र को पूर्णतः निरस्त करने के आदेश के विरुद्ध स्थगन मिल जाएगा,छग हाईकोर्ट ने श्री कटारे की अपील को स्वीकार करते हुए स्टे दे दिया है । इस स्टे से कटारे समेत उन सारे लोगों को कुछ वक्त के लिए राहत मिल गई है जो विवाद में हमेशा रहना पसंद करते है । एक बात और श्री कटारे के अपील के विरुद्ध शासन का पक्ष रखने में कही न कही बड़ी चूक हुई है । विभाग से लेकर हाईकोर्ट तक शासन का पक्ष रखने में जिनकी भी जिम्मेदारी है वे लोग और शासन भी इस पर गंभीरता से चिंतन करेंगे ऐसा लगता तो नहीं क्योंकि सिस्टम बता रहा है कि सारे कुएं में भांग घुली हुई है । स्टे हासिल कर सीना चौड़ा हो जाना स्वाभाविक है और फिर हर कोई को न्यायालय की शरण में जाना मौलिक अधिकार है । पूरे मामले में प्रश्न यही उठता है कि क्या राज्य शासन के पास कटारे का कोई काट नहीं है ?
इधर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने श्री कटारे के मामले को विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना अंतर्गत उठाते हुए शासन की मंशा पर भी संदेह जाहिर किया है । पढ़िए श्री बघेल ने ध्यानाकर्षण सूचना पर श्री बघेल ने क्या कहा है:
छत्तीसगढ़ विधानसभा, रायपुर
मुख्य अभियंता, छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के फर्जी जाति प्रमाण पत्र की पुष्टि के उपरांत भी पद पर बने रहने एवं विभागीय निष्क्रियता के संबंध में ध्यानाकर्षण।.
महोदय,
मै नियम 138 (1) के अधीन आज दिनांक 10/03/2026 को उप मुख्यमंत्री (पंचायत एवं ग्रामीण विकास) महोदय का ध्यान निम्नलिखित अविलम्बनीय सार्वजानिक महत्त्व के विषय की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ और अनुरोध करता हूँ कि अध्यक्ष महोदय उसे उठाने की अनुज्ञा प्रदान करने की कृपा करेंगे.
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण, विकास भवन, रायपुर में पदस्थ एक मुख्य अभियंता, जो वर्तमान में विकास आयुक्त कार्यालय में प्रमुख अभियंता के अतिरिक्त प्रभार पर भी कार्यरत हैं, के विरुद्ध फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर शासकीय सेवा प्राप्त करने की गंभीर शिकायत प्राप्त हुई थी। उक्त प्रकरण की विस्तृत जांच छत्तीसगढ़ उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति, संचालनालय आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा की गई, जिसमें 07 सदस्यीय समिति ने अपने आदेश दिनांक 23.02.2026 (पारित दिनांक 26.02.2026) के माध्यम से संबंधित अधिकारी के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को पूर्णतः निरस्त कर दिया है। समिति ने अपने निष्कर्ष में स्पष्ट किया है कि महामहिम राष्ट्रपति, भारतीय गणराज्य की अधिसूचना दिनांक 06.08.1950 के पूर्व संबंधित अधिकारी के पूर्वज मूल रूप से ग्राम व पोस्ट-तुमसर, जिला-भण्डारा (महाराष्ट्र) के निवासी थे, जिसके कारण उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जाति के संवैधानिक आरक्षण की कोई पात्रता नहीं है। यह तथ्य अत्यंत विचारणीय है कि संबंधित अधिकारी ने लोक सेवा आयोग द्वारा 1994 में संचालित ‘बैकलॉग विशेष भर्ती अभियान’ जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के तहत अनुसूचित जाति संवर्ग का अनुचित लाभ लेते हुए न केवल शासकीय सेवा में प्रवेश किया, बल्कि निरंतर पदोन्नतियां भी प्राप्त कीं। स्थापित नियमों एवं विधिक सिद्धांतों के अनुसार, जाति प्रमाण पत्र निरस्त होने के तत्काल पश्चात संबंधित अधिकारी द्वारा उक्त प्रमाण पत्र के आधार पर अर्जित की गई शासकीय सेवा, समस्त पदोन्नतियां और संबंधित शैक्षणिक अर्हताओं को तत्काल प्रभाव से शून्य घोषित कर उन्हें पदमुक्त करने का उत्तरदायित्व शासन का है। किंतु यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि छानबीन समिति के स्पष्ट आदेश के बावजूद, विभागीय उच्चाधिकारियों के कथित संरक्षण के कारण संबंधित अधिकारी आज भी सभी महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं। शासन की इस संदिग्ध चुप्पी और कार्रवाई में विलंब से न केवल वास्तविक पात्र वर्ग के अधिकारों का हनन हो रहा है, बल्कि आम जनता के मध्य शासन की पारदर्शिता और नियत पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं तथा व्यापक जन-रोष व्याप्त है।


