बिलासपुर । प्रधानमंत्री सड़क योजना के मुख्य अभियंता के के कटारे के जाति प्रमाण पत्र को लेकर हुई शिकायतों पर उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति द्वारा प्रमाण पत्र अमान्य करने के बाद राज्य शासन द्वारा हालांकि कटारे के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है लेकिन कटारे के द्वारा हाईकोर्ट में छानबीन समिति के आदेश के खिलाफ अपील दायर किया गया है जिस पर आज शुक्रवार को सुनवाई होनी है । यह भी पता चला है कि कटारे की अपील पर शासन और विभाग द्वारा कैविएट दायर करने का प्रोसेस तो किया गया लेकिन उसमें भी कोई झोल की संभावना जताई जा रही है । शायद हो सकता है कैविएट के झोल में कटारे को स्थगन मिल जाए हालांकि यह सब हाईकोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करता है।
उल्लेखनीय है कि राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करपशन ब्यूरो द्वारा दिसंबर 2024 में राज्य शासन को पत्र लिखकर हरिओम शर्मा तत्कालीन कार्यपालन अभियंता आरईएस और कार्यपालन अभियंता आरईएस केके कटारे के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विवेचना के लिए पूर्वानुमोदन प्रदान करने की अनुमति मांगी थी। इन दोनों अधिकारियों का राज्य शासन में इतना दबदबा है कि सरकार ने अनुमति नहीं दी ।
यही दो अधिकारी गुरु चेला बनकर विभागीय मंत्री तक को अपने विश्वास में ले रखा है । असली मास्टर माइंड हरिओम शर्मा को होना बताया जाता है ।भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद भी हरिओम शर्मा का मंत्रालय से लेकर सरकार और विभाग में इतना जलवा जलाल है कि उन्हें एन आर डी ए का प्रभारी सर्वेसर्वा बना दिया गया यही नहीं हरिओम शर्मा 4,5 विभाग के और प्रभारी बन बैठे है । जब नवा रायपुर विकास प्राधिकरण मे प्रतिनियुक्ति पर शर्मा को भेजा गया है तो मूल विभाग में भी उन्हें यथावत क्यों रखा गया है यह बड़ा सवाल है । यही दो अधिकारी प्रधानमंत्री सड़क योजना और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को चला रहे है । आरोप है कि इन दोनों अधिकारियों की मर्जी के बिना विभाग का कोई कागज सरकता नहीं । इन दोनों अधिकारियों ने विभागीय मंत्री पर पता नहीं कौन सा मोहनी डाल कर रखे हुए है । एसीबी राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण विभाग द्वारा दोनों चालाक अधिकारियों की नकेल कसने की कोशिश की तो सरकार सुस्त पड़ गई । जब सरकार ही भ्रष्ट अधिकारियों को कथित रूप संरक्षण देने का काम करने लगे तो भ्रष्ट्राचार पर जीरो टारलेंस का ढोल पीटना बेमानी है । कायदे से जाति प्रमाण पत्र का खुलासा होने के बाद बचा ही क्या रह जाता है ,उस रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। सवाल यह उठता है कि इन दोनों जाबाज़ अधिकारियों को कौन बचा रहा है और किसका संरक्षण उन्हें मिल रहा है और इस संरक्षण के पीछे किसका किसका स्वार्थ है । ?






