
जशपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बनाम विभा बाई उर्फ विभा केरकेट्टा एवं अन्य के मामले में न्यायालय, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जशपुर द्वारा 25 सितम्बर 2025 को फैसला सुनाया गया
यह मुकदमा वर्ष 2023 की एक घटना पर आधारित था, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि विभा बाई और उनके साथियों ने एक “चंगाई सभा” (Healing Prayer Meeting) के दौरान ऐसी बातें कहीं जिनसे हिन्दू धर्म और देवी-देवताओं का अपमान हुआ और लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
🌆 *घटना का पृष्ठभूमि
दिनांक 6 जून 2023 की शाम लगभग 8 बजे, जशपुर जिले के ग्राम बालाछापर स्कूल डीपा में एक धार्मिक सभा आयोजित की गई थी।अभियोजन पक्ष यानी राज्य का कहना था कि इस सभा में “हिन्दू देवी-देवताओं की निंदा की गई” और यह कहा गया कि “हिन्दू धर्म में कुछ नहीं रखा है, ईसाई धर्म अपनाओ तो दुख-दर्द दूर होंगे।”
इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर भारतीय दंड संहिता की धारा 295(क) के तहत अपराध दर्ज किया, जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने से संबंधित है।
👩🏽⚖️ *अदालत में क्या हुआ*
मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जशपुर के समक्ष चला।सरकार की ओर से कुल आठ गवाहों के बयान दर्ज किए गए। लेकिन जब अदालत ने इन गवाहों के बयान ध्यान से सुने, तो यह बात सामने आई कि— प्रमुख गवाह दगुर्का देवी ने खुद कहा कि वह चंगाई सभा खत्म होने के बाद पहुँची थीं।
दूसरे गवाह गंगाराम ने भी यही माना कि उन्होंने घटना को अपनी आँखों से नहीं देखा।
बाकी गवाहों ने केवल “सुनी-सुनाई बातें” बताईं, या यह कहा कि सभा में बाइबल, मोमबत्ती और टेबल रखे हुए थे — लेकिन किसी ने यह स्पष्ट नहीं बताया कि “कौन-से शब्द बोले गए” या “किस देवी-देवता का अपमान किया गया”।
अर्थात्, अदालत के सामने ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं आया जिससे यह साबित हो कि आरोपियों ने जानबूझकर हिन्दू धर्म या देवी-देवताओं का अपमान किया।
⚖️ न्यायालय का निर्णय
न्यायाधीश श्री क्रांति कुमार सिंह ने कहा कि
धारा 295(क) के तहत दोषी ठहराने के लिए यह साबित होना ज़रूरी है कि किसी व्यक्ति ने “जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से” किसी धर्म या उसके अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई हो।
लेकिन इस मामले में न तो ऐसा कोई इरादा साबित हुआ, न कोई स्पष्ट अपमानजनक शब्द या कार्य अदालत के सामने आया।इसलिए अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा।
✅ अंतिम परिणाम
दिनांक 25 सितम्बर 2025 को न्यायालय ने निर्णय सुनाया कि —“आरोपियों ने कोई अपराध नहीं किया है, अतः उन्हें संदेह का लाभ देते हुए पूरी तरह दोषमुक्त किया जाता है।”
इसमें सभी पाँच आरोपी —1. विभा बाई उर्फ विभा केरकेट्टा 2. हीरामनी बाई 3. फूलवती बाई 4. दिनेश राम उर्फ दिनेश केरकेट्टा 5. सचिन राम —सभी को बरी कर दिया गया।उनके खिलाफ चल रही जमानतें मुक्त कर दी गईं।
💬 सरल शब्दों में अर्थ
न्यायालय ने कहा कि “सिर्फ यह आरोप लगाना कि किसी ने धर्मांतरण की बात की या चंगाई सभा की, इसका मतलब यह नहीं कि उसने किसी धर्म या देवी-देवता का अपमान किया।”जब तक यह साबित न हो जाए कि किसी ने जानबूझकर, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण बातें कही हैं, तब तक किसी को सज़ा नहीं दी जा सकती। इसलिए, जशपुर, बालाछापर की घटना के इस प्रकरण में *अदालत ने सभी आरोपियों को निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया।

निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176
Fri Oct 10 , 2025
मप्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा:2028 और 2029 के चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनाने में सक्षम युवाओं को दिया जाएगा मौका बिलासपुर । मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आज यहां कहा कि कांग्रेस संगठन में जिला अध्यक्ष बनने का मौका उन्हीं लोगों को […]