
रिवायती राज़लें सिर्फ़ शब्द नहीं, बल्कि रूह की आवाज़ होती हैं: श्रुति प्रभला
बिलासपुर. “रिवायत का अर्थ है परंपरा, रीति-रिवाज़ शताब्दी पूर्व लिखी गई गज़लें आज भी ऐसी लगती हैं मानो हमारे अपने जीवन की ही आप-बीती हो. इन ग़ज़लों को सुनने से ऐसा लगता है कि ये हर व्यक्ति के करीब है. रिवायती गज़लों का साहित्यिक पक्ष कठिन होने के बावजूद भावपूर्ण है, अर्थपूर्ण है. जो शख्स सामान्य तौर पर भी उर्दू भाषा से ताल्लुक रखते हैं, वे इसमें मौजूद जज़्बातों को बेहतर समझ पायेंगे. गज़लों की शाम “रिवायत” में इन ग़ज़लों को सुनना एक अभूतपूर्व अनुभव से गुजरना होगा”. बिलासपुर की मशहूर शास्त्रीय, भजन व ग़ज़ल गायिका श्रुति प्रभला शुक्रवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों और मीडिया-साथियों से रूबरू थीं श्रुति 25 जनवरी 2026, रविवार की शाम 6.30 बजे से लखीराम ऑडिटोरियम में ग़ज़लों पर केंद्रित एक विशेष कार्यक्रम “रिवायत” करने जा रही है. ग़ज़ल गायकी के दौरान श्रुति प्रभला रिवायती ग़ज़लें प्रस्तुत करेंगी.

पत्र-वार्ता के दौरान रिवायती ग़ज़लें और आम तौर पर प्रचलित अन्य ग़ज़लों के बीच का अंतर समझाते हुए श्रुति ने कहा कि आम गज़लें, गीत-नुमा ग़ज़लों की श्रेणी में आती हैं जो सहज भाषा में, सहज रूप से लिखी जाती हैं, जबकि कुछ गज़लें ऐसी भी होती हैं जो गहरे भाव के साथ लिखी जाती हैं. जाहिर है, ये जज्बात, गीतों में नहीं पाए जाते. उन्होंने एक शेर पड़ा कि “अगर तू इत्तिफ़ाक़न मिल भी जाए, तिरी फुर्कत के सदमे कम न होंगे” यदि तुम इत्तेफाक से मिल भी जाओ, तब भी तेरी जुदाई का सदमा तो कम नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि दिल से महसूस किये बिना इसे समझना मुश्किल है.
श्रुति ने आगे कहा कि उर्दू जुबां में कहा गया ग़ज़ल का हर शेर प्रत्येक व्यक्ति की आत्म-गाथा बन कर उभरता है. उन्होंने फिर कहा कि “मसर्रतों (खुशियों) की तलाश में है, मगर यह दिल जानता नहीं है, अगर गम-ए-जिन्दगी न हो तो जिन्दगी में मज़ा नहीं है”.
श्रुति मूलतः शास्त्रीय गायिका है. भजन गायकी में भी उसे महारत हासिल है फिर भी ग़ज़लों के प्रति बेतरह रुझान क्यों ? इस पर श्रुति कहती है मेरी आवाज में भजन खूब फबता है. श्रोताओं को मुझसे भजन सुनना अच्छा लगता है. वस्तुतः “भजन मैं गाती हूँ लेकिन ग़ज़ल मेरे गले से बेसाख्ता निकलती है” मैं स्वयं को ग़ज़ल के बहुत करीब पाती हैं.
श्रुति प्रभला, संगीत रिसर्च अकादमी कोलकाता के गुरु एवम् आगरा संगीत घराने के उस्ताद वसीम अहमद खान की शिष्या है. उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से मास्टर ऑफ़ पफ़ॉर्मिंग आर्ट्स की उपाधि भी प्राप्त की है.
संगीत की शिक्षा के दौरान श्रुति, देश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों में अपनी गायकी की छटां बिखेर चुकी है श्रुति अंतरराष्ट्रीय गायन प्रतियोगिता “द वॉयस ऑफ़ वर्ल्ड” की विजेता भी रही है. इसके अतिरिक्त इस्कॉन नेल्लोर द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय भजन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान एवं गोल्ड मेडल, पेंड्रा में स्व. माधवराव सत्रे स्मृति महोत्सव में कबीर गायन एवं मुख्यमंत्री सम्मान और नव्या सम्मान से श्रुति को विभूषित किया गया है. डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय में युवा वसंत महोत्सव में शास्त्रीय गायन, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में ग़ज़ल गायकी व फिजी गणराज्य के राजदूत कमलेश शशि प्रकाश के सम्मान समारोह में शास्त्रीय गायन और अनेक स्थानों में कबीर गायन के साथ श्रुति ने छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में भी शास्त्रीय गायन की ओजस्वी प्रस्तुतियां दी हैं.
श्रुति ने एनटीपीसी, सीपत का आधिकारिक गीत भी गाया है. इसके अतिरिक्त ऑल इंडिया रेडियो के लिये गज़ल गायन का अनूठा कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया है.
श्रुति ने मीडिया को बताया कि अहमद फ़राज़, फैज़ अहमद फैज़, बहज़ाद लखनवी के साथ-साथ ग़ालिब की कलाम, अल्लामा इक्क़बाल जैसे मशहूर शायरों की गज़लें उनके “रिवायत” प्रोग्राम का अहम् हिस्सा होंगी. उन्होंने बताया कि मौजूदा दौर में ग़ज़ल क्वीन डॉ राधिका चोपड़ा की गाईं कुछ गज़लें वे रिवायत में प्रस्तुत करेंगी. डॉ राधिका चोपड़ा, ग़ज़ल गायकी के क्षेत्र में श्रुति की “गुरू” का ओहदा रखती हैं. श्रुति ने बताया कि अभी के दौर में इरशाद मेहंदी, ओसमान मीर, कीर्तिदान गड़वी और डॉ चोपड़ा जैसे ग़ज़ल गायक रिवायती ग़ज़लों को सहेजने और उसे ऊचाईयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं.
गज़लें प्यार-मोहब्बत की दास्तां तक ही सीमित हैं या विविध विषयों की अभिव्यक्ति का अंतहीन सिलसिला है ? श्रुति दार्शनिक अंदाज़ में कहती है- मनुष्य का सम्पूर्ण जीवन अंततः प्रेम-प्यार में ही डूबा हुआ है, प्यार के मायने प्रेमी-प्रेमिका या जीवन-साथी के साथ रिश्तों तक ही सीमित नहीं है. हम अपने माता-पिता, बंधु-बांधवों, परिजनों और ईश्वर से भी बेइंतहा प्यार करते हैं. प्यार का मायना सम्मान भी होता है. रिवायती गज़लें आपके जीवन की गाथा, प्यार भरी दास्ताँ और दुःख-दर्द के हरएक पन्ने को खोल कर रख देती हैं. रिवायती ग़ज़लें दिल की डायरी की मानिंद होती हैं. जहाँ हर शेर एक याद, एक एहसास और एक अनकहा सच समेटे होता है. इनमें मोहब्बत की नर्मी भी होती है, जुदाई का दर्द, और ज़िंदगी का सफ़रनामा भी होता है. ये ग़ज़लें सिर्फ़ शब्द नहीं, बल्कि रूह की आवाज़ होती हैं, ये आवाज़ कभी दिल को सुकून देती हैं, तो कभी पुराने ज़ख़्मों को हल्के से छूकर फिर से जगा देती हैं, तो कभी मोहब्बत का मीठा अहसास दिलाती है.
ग़ज़ल गायिका श्रुति ने पत्र-वार्ता के दौरान ग़ज़लों के प्रति रूचि रखने वाले सभी श्रोताओं को 25 जनवरी 2026, रविवार की शाम 6.30 बजे से लखीराम ऑडिटोरियम में ग़ज़लों पर केंद्रित विशेष कार्यक्रम “रिवायत” में शिरकत करने की दरख्वास्त की है.
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Sat Jan 24 , 2026
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