
बिलासपुर। शासकीय माता शबरी गर्ल्स कॉलेज में छात्राओं के लिए बनाए गए छात्रावास (हॉस्टल) की जर्जर स्थिति, वर्षों से बंद पड़े रहने और पुनः संचालन की दिशा में प्रशासन की निष्क्रियता, लैब लाइब्रेरी में पर्याप्त पुस्तक उपकरण तथा संसाधनों को लेकर आज एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह के नेतृत्व में प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में बताया गया कि यह हॉस्टल वर्ष 2016 में निर्माण के पश्चात प्रारंभ किया गया था, जो 2018–19 तक सीमित रूप से संचालित हुआ, लेकिन कोरोना काल के बाद से अब तक पूर्णतः बंद है। इस दौरान कॉलेज में पढ़ने आने वाली छात्राओं की संख्या में वृद्धि हुई, विशेषकर ग्रामीण, दूरस्थ व सीमावर्ती क्षेत्रों से आने वाली छात्राएं, जिन्हें रहने की कोई भी सरकारी सुविधा उपलब्ध नहीं है।
कॉलेज में कैंटीन का संचालन बंद है,पुस्तकालय में नई सत्र और एनईपी पाठ्यक्रम की पुस्तकों का अभाव है,विज्ञान प्रयोगशालाओं में पर्याप्त उपकरणों के न होने से प्रायोगिक कक्षाओं में असुविधा हो रही है।
जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने बताया कि कॉलेज में हज़ारों की संख्या में छात्राएं पंजीकृत हैं, जिनमें बड़ी संख्या उन छात्राओं की है जो अन्य जिलों, ब्लॉकों और गांवों से आती हैं। हॉस्टल बंद होने के कारण ये छात्राएं निजी पीजी या किराए के मकानों में अत्यधिक खर्च पर रहने को मजबूर हैं, जिससे उनके अभिभावकों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
हॉस्टल की स्थिति का मौके पर एनएसयूआई प्रतिनिधियों ने कॉलेज प्राचार्य के साथ निरीक्षण भी किया, जिसमें यह सामने आया कि भवन की दीवारें सीलन से कमजोर हो चुकी हैं, दरवाज़ों पर ताले लगे हैं, फर्श टूटी हुई है, और साफ-सफाई या सुरक्षा जैसी बुनियादी व्यवस्था नहीं है।
प्राचार्य डॉ के के भंडारी से इसके मरम्मत के संबंध में बात किए जाने पर उन्होंने बताया कि जनवरी माह से इसके मरम्मत के लिए 28 लाख का प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी विभाग से बनाकर मंत्रालय भेजा गया है, जिसके लिए बजट भी स्वीकृत हो चुका है परन्तु दुर्भाग्य है कि आज तक बजट की राशि विभाग में जमा नहीं हो पाई है और कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है। साथ ही पुस्तकालय में एनईपी और नई सत्र की पुस्तकें नहीं होने का बात स्वीकार किया।
इस मौके पर जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने कहा “माता शबरी गर्ल्स कॉलेज की छात्राएं यदि आज भी सुरक्षित, सस्ती और सम्मानजनक आवासीय सुविधा से वंचित हैं, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र पर सवालिया निशान है। हॉस्टल पर करोड़ों खर्च करने के बावजूद वह सालों से बंद है, यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि घोटाले की निशानी है। एनएसयूआई मांग करती है कि हॉस्टल को तुरंत चालू कर सभी सुविधाएं बहाल की जाएं और इसके निर्माण व बंद होने के पीछे की पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच हो। यदि 15 दिनों के भीतर समाधान नहीं हुआ, तो हम कॉलेज परिसर में तालाबंदी व गेट के बाहर चक्काजाम कर चरणबद्ध आंदोलन करेंगे।
निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176
Thu Aug 7 , 2025
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