
*OPD भी हो कैशलेस, आपातकालीन इलाज में न हो अनुमति की बाध्यता
कर्मचारियों को मिले संपूर्ण चिकित्सा सुरक्षा का अधिकार
छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने शासन की पहल का किया स्वागत, कर्मचारी हितों में 6 सूत्रीय सुधार की उठाई मांग।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश के शासकीय सेवकों एवं उनके आश्रित परिवारजनों के लिए जारी कैशलेस चिकित्सा सुविधा (संचालन एवं क्रियान्वयन) दिशा-निर्देश, 2026 का छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने स्वागत किया है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने कहा कि प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण एवं सराहनीय पहल है। वर्तमान व्यवस्था में गंभीर बीमारी अथवा आकस्मिक चिकित्सा की स्थिति में कर्मचारी को पहले स्वयं बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है तथा बाद में चिकित्सा प्रतिपूर्ति की लंबी एवं जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू होने से इस समस्या में काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
श्री तिवारी ने कहा कि किसी कर्मचारी के परिवार में गंभीर बीमारी आने पर उसकी वर्षों की जमा पूंजी इलाज में खर्च हो जाती है। ऐसे में कैशलेस चिकित्सा सुविधा कर्मचारियों के लिए केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और परिवार के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
हालांकि, योजना को वास्तव में कर्मचारी हितैषी एवं प्रभावी बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुधार आवश्यक हैं।
प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने शासन के समक्ष निम्नलिखित सुझाव एवं मांगें रखी हैं—
1. OPD सुविधा भी कैशलेस हो: वर्तमान दिशा-निर्देशों में OPD उपचार को पूर्व की भांति चिकित्सा प्रतिपूर्ति के अंतर्गत रखा गया है। इसे भी कैशलेस सुविधा में शामिल किया जाए।
2. CGHS पैकेज दरों की समीक्षा हो: गंभीर बीमारियों, ऑपरेशन एवं सुपर स्पेशियलिटी उपचार के लिए व्यावहारिक दरें निर्धारित की जाएं, ताकि कर्मचारी को अतिरिक्त आर्थिक भार न उठाना पड़े।
3. आपातकालीन उपचार में राहत मिले: आकस्मिक एवं जीवनरक्षक चिकित्सा की स्थिति में पूर्व अनुमति की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, जिससे उपचार में अनावश्यक विलंब न हो।
4. अधिकाधिक अस्पताल सूचीबद्ध हों: प्रदेश के सभी प्रमुख निजी, मल्टीस्पेशियलिटी एवं सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों को योजना से जोड़ा जाए।
5. उपचार की सीमा स्पष्ट हो: योजना में वार्षिक उपचार सीमा, गंभीर बीमारियों के कवरेज एवं पैकेज की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाए।
6. कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार न पड़े: अस्पतालों द्वारा निर्धारित पैकेज के नाम पर अनुचित राशि की मांग रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।
श्री तिवारी ने कहा कि संघ शासन की इस सकारात्मक पहल का अभिनंदन करता है तथा विश्वास व्यक्त करता है कि राज्य सरकार कर्मचारियों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी।
उन्होंने कहा कि शासकीय कर्मचारी प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके एवं उनके परिवारों के स्वास्थ्य की सुरक्षा शासन की प्राथमिकताओं में होनी चाहिए।
हमारा उद्देश्य किसी योजना का विरोध करना नहीं, बल्कि उसे और अधिक पारदर्शी, व्यावहारिक एवं कर्मचारी हितैषी बनाना है।
हमारी स्पष्ट मांग है कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा ऐसी हो, जिसमें बीमारी के समय कर्मचारी को इलाज के साथ-साथ आर्थिक परेशानियों से भी मुक्ति मिले।

