
*छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपा स्मरण पत्र, पूर्व में 15 अक्टूबर को दिए गए ज्ञापन पर शीघ्र कार्रवाई की मांग
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश के विभिन्न शासकीय विभागों में कार्यरत लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों की वेतनवृद्धि, वेतन से वसूली तथा विभागीय नियमों के नाम पर उत्पन्न हो रही विसंगतियों के निराकरण की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने एक बार फिर शासन का ध्यान आकृष्ट कराया है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी के नेतृत्व में सामान्य प्रशासन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, महानदी भवन, नवा रायपुर में ज्ञापन सौंपकर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के परिप्रेक्ष्य में समस्त संबंधित विभागों के लिए स्पष्ट सामान्य आदेश एवं आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई।
उल्लेखनीय है कि संघ द्वारा इस विषय पर पूर्व में पत्र क्रमांक 155, दिनांक 15.10.2026 को विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया गया था। उक्त ज्ञापन पर अपेक्षित कार्रवाई सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से संघ ने अब पत्र क्रमांक 178 एवं स्मरण पत्र क्रमांक-01, दिनांक 02.11.2026 के माध्यम से पुनः शासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
न्यायालयीन आदेशों का पालन सभी विभागों में एकरूपता से हो
संघ ने अपने स्मरण पत्र में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित महत्वपूर्ण आदेशों का उल्लेख करते हुए विशेष रूप से निम्न प्रकरणों की ओर शासन का ध्यान आकृष्ट कराया है—
1. WPS 9471/2023 – माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश, जिसमें प्रकरण से संबंधित OR एवं AND की व्याख्या के संबंध में स्थिति स्पष्ट की गई है तथा संबंधित याचिका में वसूली आदेश पर रोक का संदर्भ दिया गया है।
2. WPS 12525/2025 – दिनांक 06.10.2026 को पारित आदेश के परिप्रेक्ष्य में वर्ष 2013 से 2023/2024 तक के लिपिकों से संबंधित हिंदी मुद्रलेखन परीक्षा एवं उससे जुड़ी विभागीय कार्रवाई के विषय में शासन से आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
3. न्यायालय के आदेशों के अनुरूप वर्ष 2013 से 2023 तक वार्षिक वेतनवृद्धि रोके जाने के मामलों का परीक्षण कर पात्र कर्मचारियों को तीन माह की अवधि में वेतनवृद्धि का लाभ प्रदान करने की मांग रखी गई है।
4. प्रदेश में अनुकंपा नियुक्ति से कार्यरत लिपिकों को भी नियमानुसार वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ सुनिश्चित करने का विषय उठाया गया है।
सघ ने उठाया वित्तीय भार एवं प्रशासनिक विसंगति का महत्वपूर्ण मुद्दा
ज्ञापन में संघ ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा है कि यदि शासन द्वारा सामान्य आदेश जारी करने में विलंब किया जाता है तो प्रदेश के सैकड़ों प्रभावित लिपिक अलग-अलग माननीय उच्च न्यायालय में याचिकाएं प्रस्तुत करने के लिए विवश होंगे। इससे शासन पर अनावश्यक मुकदमेबाजी, अधिवक्ता शुल्क एवं अन्य प्रशासनिक व्यय का वित्तीय भार बढ़ेगा।
अतः शासन को चाहिए कि न्यायालयीन आदेशों की भावना के अनुरूप एकमुश्त सामान्य आदेश जारी कर सभी संबंधित विभागों में एकरूपता से उसका पालन सुनिश्चित करे।
प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी का स्पष्ट एवं दो टूक बयान
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने कहा कि,
“हमारा उद्देश्य किसी विभाग अथवा शासन से टकराव करना नहीं, बल्कि प्रदेश के लिपिक कर्मचारियों को उनका न्यायसंगत अधिकार दिलाना है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के बावजूद यदि अलग-अलग विभागों में अलग-अलग व्याख्या करके कर्मचारियों की वेतनवृद्धि रोकी जाती है अथवा वेतन से वसूली की कार्रवाई की जाती है, तो यह कर्मचारियों के साथ अन्यायपूर्ण स्थिति उत्पन्न करता है।
संघ ने इस विषय पर 15 अक्टूबर 2026 को पत्र क्रमांक 155 के माध्यम से शासन को विस्तृत ज्ञापन दिया था। अब स्मरण पत्र के माध्यम से पुनः आग्रह किया गया है कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का समग्र परीक्षण कर सामान्य प्रशासन विभाग सभी संबंधित विभागों के लिए स्पष्ट एवं एकरूप दिशा-निर्देश जारी करे।
वर्षों से शासकीय सेवा दे रहे लिपिक कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए बार-बार न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर न हों। शासन की जिम्मेदारी है कि न्यायालयीन आदेशों का सम्मान करते हुए पात्र कर्मचारियों को समयबद्ध लाभ प्रदान करे तथा अनुचित वेतनवसूली एवं वेतनवृद्धि रोकने जैसी कार्रवाई पर प्रभावी रोक सुनिश्चित करे।
लिपिक कर्मचारियों के सम्मान, अधिकार और न्याय की लड़ाई में संघ सदैव प्रतिबद्ध रहा है और आगे भी पूरी मजबूती से अपनी आवाज उठाता रहेगा।”
प्रतिनिधिमंडल में ये पदाधिकारी एवं साथी रहे शामिल
*ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी, संभागीय अध्यक्ष रायपुर दीपक मिश्रा, जिलाध्यक्ष रायपुर जवाहर यादव, प्रांतीय सचिव अमितेष तिवारी, विभोर चतुर्वेदी, प्रतीक तिवारी, रायपुर जिला उपाध्यक्ष टिकेंद्र साहू, सदस्य देवेंद्र साहू, विष्णु सेन सहित अन्य साथी शामिल रहे।*
संघ ने शासन से अपेक्षा व्यक्त की है कि कर्मचारियों के हितों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर प्रदेश के प्रभावित लिपिकों को न्याय प्रदान किया जाएगा।


