
संस्कार धानी न्यायधानी बिलासपुर मां महामाया रतनपुर के अंचल में स्थित ग्राम सेमरताल में आयोजित कूर्मि परिवार दर्शन ग्रंथ के विमोचन एवं इस अवसर पर वृहद कुर्मी समाज के साथ छत्तीसगढ़िया संस्कृति में रचे-बसे तुलसीदल ,गंगाजल ,महाप्रसाद जैसे मितान परंपरा परिवार के अभिन्न अंग की उपस्थिति में एक 69-70 वर्ष के दार्शनिक संयोजक व पुस्तक के प्रधान संपादक ईंजी लक्ष्मी कुमार गहवई जी के कुशल नेतृत्व में गहवई कूर्मि संपादक मंडल ने ग्रंथ प्रकाशित कर ऐतिहासिक कार्य किया है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ के जातिय समुदाय के लिए एक दर्शन ही नहीं अपितु ऐतिहासिक दर्पण भी है । इस पुराण में कूर्मि कौशिक गहवई सहित अन्य कूर्मि उपजाति का वृत्त है। भविष्य में अनेक जातिय समाज वंशावली हेतु ऐतिहासिक दस्तावेज सहित मार्गदर्शन के साथ- साथ समाज- शास्त्र विषय के शोधार्थियों के लिए यह शोध का भी सशक्त आधार बनेगा।
कूर्मि परिवार सेमरताल का जीवन दर्शन पुस्तक इंजी.लक्ष्मीकुमार गहवई की धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती गंगा गहवई को समर्पित है। इस भाव से कि किसी पुरुष या उसके परिवार को बढ़ने व गढ़ने में मातृशक्ति का ही हाथ होता है। प्रस्तुत ग्रन्थ का संपादन कौशिक परिवार के 20 सदस्यों ने मिलकर किया है।
इस अंचल में 1798 ईस्वी सन् से निवासरत कुर्मी गहवई कौशिक परिवार के 9 पीढ़ियों का कालावधि पूर्ण कालजयी दस्तावेज को खंगालने में बहुत ईमानदारी व निष्ठापूर्वक जिन सदस्यों ने अपना श्रमस्वेद बहाया है उनमें कूर्मि मूलचंद कौशिक से.नि. प्रधान पाठक, रामावतार गहवई रिटायर डिप्टी रेंजर, रघुनंदन गहवई ,राधावल्लभ गहवई रविशंकर ,त्रियुगीनारायण ,बबीता पाटनवार ,जयप्रकाश, चंद्रप्रभा गहवई,गायत्री कौशिक, कुंजकली सुरेश कौशिक ,श्रद्धा ,दिव्या , रविन्द्र गहवई , यज्ञेश कौशिक ,अनिमेश गहवई के महत्वपूर्ण योगदान सहित स्वामी सिध्देश्वर पाटनवार, डॉ जीतेन्द्र सिंगरौल का उचित मार्गदर्शन मिला है। पुस्तक लेखन में हिन्दी के विद्वान व्याख्याता , साहित्यकार कूर्मि अनिल कुमार वर्मा ने अपने अथक परिश्रम व प्रयास से अपने पूर्वजों के परिवार दर्शन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कूर्मि परिवार दर्शन किताब न केवल सेमरताल का इतिहास है बल्कि छत्तीसगढ़ में निवासरत तामाम लोगों के लिए बहु उपयोगी है जो यहां के इतिहास, शिक्षा,लोक संस्कृति, खान-पान रहन-सहन, कृषि संस्कृति आदि क्षेत्रों में इन परिवारों की संपूर्ण जानकारी सहित गहवई कौशिक परिवार के उत्तरोत्तर विकास की गाथा है। उन्नत कृषि तकनीकी विकास के साथ शासकीय शिक्षकीय सेवाओं में अग्रणी ये परिवार इंजीनियर , अधिवक्ता, डाक्टर, पत्रकार, अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं देकर बहुमुखी प्रतिभा का दर्शन कराते हैं। इसमें ऐसे अनेक लोगों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को पढ़कर जिज्ञासा बढ जाती है। पितृ सत्तात्मक देश में महिलाओं के पूर्वजों का विवरण पाना दुर्लभ होता है लेकिन संपादक मंडल ने उनके भी कुल -परिवारों का वर्णन कर सराहनीय कार्य किया है।
जिन महान् पूर्वजों के संतान हैं, जिनका वटबीज विशाल वटवृक्ष के रूप में पल्लवित-पुष्पित हुआ है उनमें पूर्वज स्व माधो प्रसाद कौशिक से लेकर देवतूल्य, मातृ सत्ताओं में दादा- दादी,नाना- नानी के जो 152 दुर्लभ चित्रों (फोटो) का प्रकाशन हुआ है वह इस ग्रंथ को और भी प्रामाणिक बनाता है जो स्तूत्य है ।
इस ग्रंथ के निर्माण का उद्देश्य केवल इतिहास संकलन नहीं, बल्कि समाज की नई आधुनिक पीढ़ी को स्वयं के पूर्वजों के बारे में तथ्य -परख जानकारी देना भी है जिससे वे अपनी जड़ों को पहचान सके और समाज के विकास में सक्रिय योगदान दे सके।पुस्तक में दी गई कलेवर से यह दृष्टिगत होता है कि जब कोई परिवार या समाज उन्नति या विकास करता है तो अपने आसपास के परिवार के लिए भी वह प्रेरणा स्रोत होता है और वे लोग भी सहज प्रवर्तमान होते हैं क्योंकि इससे अच्छी स्पर्धा बढ़ती है। इस पुस्तक को प्रकाशित करने में अनेक लोगों ने आर्थिक सहयोग भी किया है। इनमें इंजी लक्ष्मी कुमार गहवई ने 15000/, डॉ मनोज चंद्रा ने 15000/ , सुप्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ एल सी मढरिया ने 10000/ का आर्थिक सहयोग प्रदान कर प्रकाशन को संभव बनाया है। पाठक इसे रूपए 300/ मात्र देकर प्राप्त कर सकते हैं। कुल मिलाकर यह पुस्तक समाज के लिए पठनीय ही नहीं अपितु सचमुच प्रेरणादायी है।

– *कूर्मि डॉ विश्वनाथ कश्यप*
प्राचार्य एवं साहित्यकार
प्रदेश उपाध्यक्ष
छत्तीसगढ़ कूर्मि क्षत्रिय चेतना मंच

