
सप्तारंग’ में सात भारतीय नृत्य परंपराओं की प्रस्तुति
भरतनाट्यम — शिवरंजनी हरीश
मोहिनीअट्टम — मंजुला मूर्ति
कथक — मौमाला नायक
ओडिसी — जाह्नवी बेहरा
मणिपुरी — डॉ. मंजू अंबलगम
कथकली — प्रतिष्ठित कथकली कलाकारों द्वारा
गोटिपुआ — ओडिशा की पारंपरिक लोकनृत्य शैली के कलाकारों द्वारा
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत की अलग-अलग नृत्य परंपराओं की शैली, संगीत, वेशभूषा, अभिनय, भाव-भंगिमा और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।
विशेष रूप से गोटिपुआ, जो ओडिशा की पारंपरिक नृत्य परंपरा है और ओडिसी के विकास से भी ऐतिहासिक रूप से जुड़ी मानी जाती है, को ‘सप्तारंग’ में शामिल करना श्रृंखला की सांस्कृतिक विविधता को और समृद्ध करता है।
स्पिक मैके छत्तीसगढ़ चैप्टर की ‘सप्तारंग’ श्रृंखला का भव्य समापन — गोटिपुआ एवं कथकली की प्रस्तुतियों ने मोहा दर्शकों का मन
बिलासपुर/रायपुर, 25 सितम्बर 2026।
स्पिक मैके छत्तीसगढ़ चैप्टर द्वारा भारतीय कला, संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत को युवा पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित ‘सप्तारंग’ श्रृंखला का समापन गोटिपुआ और कथकली की मनमोहक प्रस्तुतियों के साथ हुआ।
‘सप्तारंग – 7 नृत्य, 7 परंपराएं, 1 भारत’ श्रृंखला के अंतर्गत देश की सात प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों के साथ ओडिशा की पारंपरिक लोकनृत्य शैली गोटिपुआ की प्रस्तुतियां विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों ने विद्यार्थियों और युवाओं को भारतीय कला एवं संस्कृति को करीब से जानने, समझने और अनुभव करने का अवसर प्रदान किया।
कथकली और गोटिपुआ की विशेष प्रस्तुतियां
श्रृंखला के अंतिम चरण में जिंदल वर्ल्ड स्कूल, सक्ती तथा अरपा वैली वर्ल्ड स्कूल, बिलासपुर में प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा कथकली की प्रस्तुति दी गई। वहीं एनई रेलवे इंस्टीट्यूट तथा सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, कोटा में विद्यार्थियों के मध्य गोटिपुआ की आकर्षक प्रस्तुति हुई।
गोटिपुआ के कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुतियों में नृत्य की अद्भुत शारीरिक संरचनाओं, लय, ताल और भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। वहीं कथकली की पारंपरिक वेशभूषा, मुखाभिनय, नृत्य-नाट्य शैली और अभिनय ने विद्यार्थियों को भारतीय रंग एवं नृत्य परंपरा की समृद्धता से परिचित कराया।
रायगढ़ से प्रारंभ हुई सांस्कृतिक यात्रा
‘सप्तारंग’ श्रृंखला की शुरुआत रायगढ़ चक्रधर समारोह से हुई, जिसके बाद NTPC लारा सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न विद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित किए गए।
श्रृंखला के अंतर्गत Jindal World School Sakti, Arpa Valley World School Bilaspur, CMD College, Apollo Nursing College, भातखंडे संगीत महाविद्यालय, छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (CIT) कोनी, Government Polytechnic College, BLT College Ratanpur, CRS College Kota, CV Raman University Kota, Aadharshila Vidya Mandir, Atal Bihari Vajpayee Vishwavidyalaya Bilaspur, Government Higher Secondary School Navagaon, Government Atal Bihari Vajpayee Girls School Ratanpur, Government Girls School Kota एवं Pendra College सहित अनेक संस्थानों में कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं।
इसके अतिरिक्त रायपुर क्षेत्र के लगभग 20 विद्यालयों एवं संस्थानों—जिनमें JP International School Kanker, Allons Public School Bemetara, BIT Durg, IIT Bhilai, KPS Raipur, Riversale World School, The Great India School, Holy Heart School, Columbia Institute Raipur तथा DPS Mahasamund प्रमुख हैं—में भी कलाकारों की प्रस्तुतियां आयोजित की गईं।
पूरी श्रृंखला में लगभग 8 प्रतिष्ठित कलाकारों द्वारा 50 के आसपास प्रस्तुतियां दी गईं।
युवाओं को विरासत से जोड़ने का प्रयास
स्पिक मैके का उद्देश्य केवल मंचीय प्रस्तुति कराना नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत को युवाओं के जीवन से जोड़ना है। ‘सप्तारंग’ के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न नृत्य परंपराओं के कलाकारों से सीधे संवाद करने, उनकी कला को समझने और भारतीय संस्कृति की विविधता का अनुभव करने का अवसर मिला।
कार्यक्रमों के दौरान कलाकारों के अनुशासन, साधना, समर्पण और अपनी कला-विधा के प्रति प्रतिबद्धता को देखकर विद्यार्थी भी प्रेरित हुए। इससे उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि भारतीय शास्त्रीय एवं पारंपरिक कलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, इतिहास और जीवन-दर्शन की जीवंत अभिव्यक्ति हैं।
50 वर्षों से संस्कृति और युवा पीढ़ी के बीच सेतु
स्पिक मैके पिछले लगभग 50 वर्षों से देश के श्रेष्ठ शास्त्रीय संगीत, नृत्य, लोककला, लोकसंगीत, कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं के कलाकारों को विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों से जोड़ने का कार्य कर रहा है।
छत्तीसगढ़ में ‘सप्तारंग’ श्रृंखला इसी उद्देश्य की एक महत्वपूर्ण पहल रही, जिसने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के हजारों विद्यार्थियों को भारत की विविध नृत्य परंपराओं से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराया।
स्पिक मैके छत्तीसगढ़ चैप्टर ने सभी कलाकारों, शिक्षण संस्थानों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, सहयोगी संस्थाओं एवं आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की इस यात्रा को आगे भी निरंतर जारी रखा जाएगा।

