
प्रदेश के किसी भी पंचायत में ऐसा आइडिया अभी तक नहीं
गांव के बच्चे शहरों के ट्यूशन क्लास और एकेडमी में पढ़ने वाले युवाओं का मुकाबला कर सकेंगे
बिलासपुर। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सेलर में सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए किताबी ज्ञान के अलावा सामान्य ज्ञान से पूरी तरह अवगत कराने के लिए जो कोशिश की जा रही है वह 11 वि और 12 कक्षा के छात्र छात्राओं के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकेगा । ऐसा प्रयोग शायद पूरे प्रदेश में पहला होगा । यह प्रयास सफल होता है तो सेलर गांव पूरे पदेश के लिए एक मॉडल के रूप में जाना जाएगा ।
दर असल 12 वीं कक्षा उतीर्ण करने के बाद छात्र कई तरह के प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने के उत्सुक रहते है लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सवालों से वे अनभिज्ञ रहते है और मंहगी किताबों का सहारा लेते है इसी तथ्य को ध्यान में रखकर ग्राम पंचायत सेलर के युवा सरपंच धनंजय सिंह और बिल्हा ब्लाक के जनपद उपाध्यक्ष विक्रम सिंह ने मिलकर एक नए प्रकार का उपयोग किया ।
उन्होंने मिडिल और हाईस्कूल के छात्र छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षा के सवालों को अभी से ही अवगत कराने और इन सवालों के उत्तर भी जानने के लिए स्कूल की दीवारों और पूरे गांव के मकानों के दिवाल पर वाल पेंटिंग से चित्र युक्त प्रमुख सवाल और उसके तीन उत्तर भी लिखवा कर छात्र छात्राओं से पढ़वा रहे और किसी एक छात्र से सही उत्तर के लिए प्रेरित कर रहे है ।
सभी छात्र छात्राएं इन प्रश्नों के सही उत्तर को याद कर दिलों दिमाग में बिठा ले उसके बाद 15 दिन पश्चात दिवाल में लिखे प्रश्न उत्तर को मिटा कर दूसरे प्रश्न लिखे जायेंगे और फिर सवाल जवाब किये जाएंगे । यह प्रयास एक तरह से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से कम नहीं है । ग्राम पंचायत के इस प्रयास से गांव के नागरिक भी प्रभावित हुए है ।
ग्रामीण अंचल के बच्चों को आधुनिक और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से सेलर पंचायत ने गांव की सूनी दीवारों को अब स्कूली छात्र छात्राओं के लिए ज्ञान के केंद्र में बदल दिया गया है। पंचायत द्वारा स्कूल परिसर से लेकर गांव की लगभग 35 से 40 दीवारों पर सामान्य ज्ञान के ऑब्जेक्टिव प्रश्न लिखवाए गए हैं, जो आते-जाते बच्चों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।
इस मुहिम की सबसे खास बात यह है कि दीवारों पर सिर्फ प्रश्न और उनके चार विकल्प लिखे गए हैं, उसमें उत्तर नहीं। जनपद पंचायत बिल्हा के उपाध्यक्ष विक्रम सिंह के मुताबिक बच्चों से कहा गया है कि वे इन प्रश्नों को देखें,सोचे समझे और अपना ज्ञान बढ़ाए । ये सवाल स्कूली किताबों में नहीं मिलेंगे । कोई छात्र 12 वीं कक्षा उतीर्ण होने केबाद कोई प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होता है तो आज का ज्ञान उनके लिए काफी मददगार होगा ।
सिर्फ दीवार पर लिख देने तक ही यह योजना सीमित नहीं है। रिवीजन का समय पूरा होते ही पंचायत स्तर पर इन प्रश्नों के आधार पर एक परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में जो भी बच्चा पहला स्थान हासिल करेगा, उसे बकायदा मंच पर पुरस्कृत और सम्मानित किया जाएगा। इनाम मिलने की इस व्यवस्था से बच्चों के बीच पढ़ाई को लेकर एक स्वस्थ प्रतियोगिता का माहौल बन रहा है।60 दिन बीत जाने के बाद, पंचायत की ओर से सही विकल्प पर राइट टिक लगा दिया जाएगा। उत्तर दिखने के बाद बच्चों को याद करने और दोहराने के लिए 10 से 15 दिनों का अतिरिक्त समय मिलेगा।साल में 200 सामान्य ज्ञान प्रश्न कराने का लक्ष्य है।
सरपंच धनंजय सिंह का कहना है यह कोई एक बार का आयोजन नहीं है, बल्कि पंचायत इसे एक रूटीन की तरह हमेशा चलाने की तैयारी में है। जैसे ही पहली परीक्षा खत्म होगी, दीवारों को साफ करके उन पर नए प्रश्न लिख दिए जाएंगे। इस निरंतर प्रयास से पंचायत का लक्ष्य है कि गांव का हर बच्चा सालभर में खेल-खेल में ही कम से कम 150 से 200 सहत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान के सवालों को पूरी तरह याद कर लें ।हमारा यह छोटा सा प्रयास ग्रामीण बच्चों को बड़े शहरों के बच्चों की तरह जागरूक और तज तर्रार बनाएगा। इसके लिए पंचायत ने गांव के दीवारों को बच्चों को सिखाने के लिए ब्लैकबोर्ड की तरह उपयोग करने का निर्णय लिया है।
ग्राम पंचायत सेलर के इस अदभुत प्रयास से कोचिंग की भारी-भरकम फीस और शहरों की दौड़ से दूर ग्राम पंचायत सेलर के बच्चों के लिए पूरा गांव ही ओपन बुक बन गया है। जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों की एक अनोखी सोच ने गांव की गलियों को चलती-फिरती पाठशाला में बदल दिया है। अब यहां के बच्चे खेलते-कूदते, स्कूल आते-जाते दीवारों पर लिखे सामान्य ज्ञान और करंट अफेयर्स के सवाल हल कर रहे हैं। बिना किसी तामझाम के हो रही इस डिजिटल-फ्री तैयारी को देखकर लोग कह रहे हैं बल्कि एक नई सोच की जरूरत होती है। कि शिक्षा में बदलाव के लिए बड़े बजट की जरूरत नहीं है।बिना किसी तामझाम के गांव के बच्चे खेल खेल में ही अपडेट हो रहे है।
सेलर गांव जिला मुख्यालय बिलासपुर से 20 मिनट में पहुंचा जा सकता है। गांव की मुख्य सड़क और गांव की सड़के बता रही है कि यहां का विकास बेहतर ढंग से हुआ है। इसे प्रगतिशील और विकासशील गांव कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

