
35 साल के राजनीतिक सफर पर बोले अटल श्रीवास्तव—“राजनीति जनता के काम आने का माध्यम है”
हमर पहुना में कोटा विधायक ने साझा किया संघर्ष, सफलता, राजनीतिक अनुभव और भविष्य का विजन; स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और पर्यटन को लेकर सरकार पर उठाए सवाल
बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब के लोकप्रिय कार्यक्रम “हमर पहुना” में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने अपने करीब 35 वर्षों के राजनीतिक सफर, छात्र राजनीति से लेकर विधायक बनने तक के संघर्ष, राजनीतिक अनुभव, पारिवारिक जीवन, खेल और छत्तीसगढ़ के विकास को लेकर अपने विचार साझा किए। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की मौजूदा सरकार की कार्यशैली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और पर्यटन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथि के स्वागत के साथ हुई। इस अवसर पर प्रेस क्लब पदाधिकारियों और पत्रकारों ने अटल श्रीवास्तव से उनकी राजनीति, संघर्ष, सफलता और जनता के प्रति सेवा भावना को लेकर विस्तार से संवाद किया।
पूर्व मंत्री बी आर. यादव को माना राजनीतिक गुरु
अटल श्रीवास्तव ने अपने राजनीतिक सफर का श्रेय वरिष्ठ कांग्रेस नेता और अविभाजित मप्र के कई बार केबिनेट मंत्री रहे स्व बी आर. यादव को देते हुए उन्हें अपना राजनीतिक गुरु बताया। उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति के दौर में श्री यादव के साथ काम करते हुए उन्हें राजनीति को करीब से समझने और लोगों की समस्याओं के लिए काम करने की प्रेरणा मिली।
उन्होंने कहा कि उस दौर में राजनीति को उन्होंने समाजसेवा का माध्यम माना। किसी व्यक्ति की समस्या लेकर जाने पर यह नहीं देखा जाता था कि वह किस राजनीतिक दल से जुड़ा है। उनकी सीख रही कि जो व्यक्ति उम्मीद लेकर आपके पास आया है, उसकी समस्या को गंभीरता से लेकर उसके काम के लिए प्रयास करना चाहिए।
अटल श्रीवास्तव ने कहा कि “राजनीति जनता की सेवा और लोगों के काम आने का माध्यम है, इसे केवल पार्टी या चुनाव तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।”
1998 में मिली पहली राजनीतिक जिम्मेदारी
अटल श्रीवास्तव ने बताया कि वर्ष 1998 में उन्हें शहर कांग्रेस कमेटी का महामंत्री बनाया गया। करीब 14 वर्षों तक उन्होंने इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया।
वर्ष 2014 में भूपेश बघेल के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महामंत्री बनाया गया और विभिन्न क्षेत्रों का प्रभार सौंपा गया।
टिकट नहीं मिली, लेकिन संघर्ष नहीं छोड़ा
2018 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति में कभी भी चीजें अंतिम नहीं होतीं। टिकट नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने निराश होने के बजाय संघर्ष जारी रखा।
उन्होंने बताया कि तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने फोन कर टिकट नहीं दिला पाने की बात कही थी। उस समय उन्होंने कहा था कि संघर्ष लंबा है, टिकट नहीं मिली तो कोई बात नहीं, वे सभी के लिए काम करते रहेंगे।
इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी बनाया गया। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ चुनाव लड़ा, हालांकि परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा।
पर्यटन बोर्ड अध्यक्ष के रूप में राम वन गमन पर्यटन परिपथ पर काम
लोकसभा चुनाव के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश के पास प्राकृतिक संपदा के साथ समृद्ध परंपराएं, आदिवासी संस्कृति, जल, जंगल, जमीन और ऐतिहासिक एवं पौराणिक धरोहरें हैं।
उन्होंने राम वन गमन पर्यटन परिपथ का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़े अनेक स्थल हैं, जिनका विकास और संरक्षण पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
माता कौशल्या मंदिर, शबरी माता मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पर्यटन क्षमता को देश-दुनिया के सामने लाने की जरूरत है।
जल, जंगल, जमीन और आदिवासी संस्कृति बने छत्तीसगढ़ की पहचान
अटल श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश को पर्यटन के क्षेत्र में अपनी अलग USP बनानी होगी। छत्तीसगढ़ की पहचान उसके जल, जंगल, जमीन और आदिवासी संस्कृति से बनाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में अनेक नदियां, जलाशय, वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, गुफाएं, जलप्रपात और धार्मिक स्थल हैं। बस्तर, सरगुजा, अचानकमार, कुटुमसर की गुफाएं, कांगेर वैली और इंद्रावती जैसे क्षेत्रों को व्यवस्थित पर्यटन सर्किट से जोड़ने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए सबसे पहली जरूरत सुरक्षा की भावना है। छत्तीसगढ़ में आने वाले पर्यटक को यह भरोसा होना चाहिए कि वह यहां सुरक्षित होकर घूम सकता है।
उन्होंने कहा कि बरसात छत्तीसगढ़ घूमने का सबसे खूबसूरत मौसम है, जब पूरा प्रदेश हरियाली की चादर ओढ़ लेता है और पहाड़ों से झरने बहने लगते हैं।
साय सरकार के ढाई साल के कार्यकाल पर सवाल
मौजूदा सरकार के ढाई साल के कार्यकाल पर सवाल पूछे जाने पर अटल श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़कों की स्थिति को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कोटा विधानसभा क्षेत्र के वनांचल इलाकों में मलेरिया और डेंगू की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि बीमारी फैलने के बाद व्यवस्था करने के बजाय पहले से रोकथाम की तैयारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले मच्छरदानियों और क्लोरीन की गोलियों जैसी व्यवस्थाएं की जाती थीं, लेकिन अब इनमें कमी दिखाई देती है।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र के कई स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। कुछ स्कूलों में एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है, जबकि कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शिक्षक पर्याप्त नहीं हैं।
आत्मानंद स्कूलों की व्यवस्था पर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि शुरुआत में इन स्कूलों से शिक्षा के क्षेत्र में एक नई उम्मीद जगी थी, लेकिन अब उनकी स्थिति कमजोर होती नजर आ रही है।
घोषणाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल
अटल श्रीवास्तव ने बेलगहना में महाविद्यालय खोलने और कोटा ब्लॉक में आदिवासी समाज के लिए भवन निर्माण की घोषणाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि घोषणा के बाद भी जमीन पर अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार की घोषणाओं के साथ उनके क्रियान्वयन की समय-सीमा भी तय होनी चाहिए।
“मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश के हैं”
उन्होंने बस्तर में विकास कार्यों का स्वागत करते हुए कहा कि नक्सल समस्या के कारण लंबे समय तक बस्तर में विकास प्रभावित रहा है। इसलिए वहां विकास होना जरूरी है, लेकिन मुख्यमंत्री पूरे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हैं। प्रदेश के सभी क्षेत्रों में समान रूप से विकास होना चाहिए।
उन्होंने सड़कों की खराब स्थिति, टेंडर प्रक्रिया में देरी और विकास कार्यों की धीमी गति पर भी सवाल उठाए।
“सरकार का स्पष्ट विजन दिखाई नहीं देता”
अटल श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान सरकार की प्राथमिकताएं अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास छत्तीसगढ़ को किस दिशा में ले जाना है, इसका स्पष्ट रोडमैप दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग सरकारों के अपने विजन रहे हैं। किसी सरकार ने अधोसंरचना पर जोर दिया तो किसी ने ग्रामीण और किसान अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर काम किया।
बिलासपुर के विकास के लिए मास्टर प्लान जरूरी
बिलासपुर के विकास पर उन्होंने कहा कि शहर के लिए दीर्घकालीन मास्टर प्लान जरूरी है। अधिकारियों के बदलने के साथ विकास की प्राथमिकताएं बदलने से शहर का विकास प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि बिलासपुर प्रेस क्लब ने पहले भी शहर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को नेतृत्व दिया है। इसलिए बिलासपुर के विकास के लिए प्रेस क्लब को राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर सभी वर्गों को साथ लेकर पहल करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रेस क्लब के बैनर तले होने वाली पहल में सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक वर्गों के लोग शामिल हो सकते हैं। इसलिए बिलासपुर के विकास को लेकर साझा रोडमैप तैयार करने में प्रेस क्लब प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
सिविल इंजीनियरिंग के बाद राजनीति में आए
अपने निजी जीवन के बारे में उन्होंने बताया कि उनका परिवार मूल रूप से सरकारी नौकरी से जुड़ा रहा है। परिवार में किसी ने व्यवसाय नहीं किया था। उनके दादा भी चाहते थे कि वे सरकारी नौकरी में जाएं और इंजीनियर बनें।
उन्होंने बिलासपुर में प्रारंभिक शिक्षा के बाद नागपुर से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इंजीनियरिंग के बाद दो-तीन वर्ष प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। एक परीक्षा में वे महज कुछ अंकों से पीछे रह गए। इसके बाद मित्रों के सुझाव पर ठेकेदारी के क्षेत्र में आए और धीरे-धीरे व्यवसाय से अधिक राजनीति में उनकी रुचि बढ़ती गई।
अब उनका व्यवसाय छोटा भाई संभालता है और वे पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हैं।
क्रिकेट, बैडमिंटन और तैराकी में भी रहे खिलाड़ी
अटल श्रीवास्तव ने खुद को खेल प्रेमी बताते हुए कहा कि स्कूल के समय वे क्रिकेट में राज्य स्तर पर खेल चुके हैं। बैडमिंटन में विश्वविद्यालय स्तर के खिलाड़ी रहे और तैराकी में भी राज्य स्तर पर प्रतिनिधित्व किया।
उन्होंने कहा कि खेल आज भी उनकी पसंदीदा गतिविधियों में शामिल है।
परिवार के लिए भी समय निकालते हैं
पारिवारिक जीवन पर उन्होंने कहा कि राजनीति में व्यस्तता के कारण परिवार को समय देना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन वे इसके लिए समय निकालने की कोशिश करते हैं। उनके दो बच्चे हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें घूमने का भी शौक है और पर्यटन में रुचि होने के कारण वे समय निकालकर छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में जाते रहते हैं। बस्तर की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को समझने के लिए उसके प्राकृतिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों को करीब से देखना जरूरी है।
प्रेस क्लब की परंपरा के तहत अटल श्रीवास्तव का सम्मान
कार्यक्रम के समापन अवसर पर बिलासपुर प्रेस क्लब की परंपरा के तहत कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव का सम्मान किया गया। प्रेस क्लब पदाधिकारियों एवं उपस्थित पत्रकारों ने उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में अटल श्रीवास्तव ने प्रेस क्लब और पत्रकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों पर संवाद का यह मंच लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर बिलासपुर और छत्तीसगढ़ के विकास के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।


