
गेड़ी, पारंपरिक खेल, लोकगीत और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने बांधा समां; भगवान शिव, गौमाता और कृषि औजारों की विधि-विधान से हुई पूजा
रायपुर। छत्तीसगढ़ की मिट्टी की सोंधी महक, खेत-खलिहानों की परंपराएं, लोकगीतों की स्वर लहरियां, मांदर की थाप, गेड़ी का उल्लास और पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू के बीच प्रदेश का प्रथम लोकपर्व हरेली तिहार बुधवार को पूरे उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। रायपुर स्थित भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में भाजपा महिला मोर्चा की ओर से हरेली तिहार पर विशेष आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, लोक परंपराओं और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव दिखाई दिया।
कार्यक्रम में भगवान शिव, गौमाता और कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश में अच्छी वर्षा, भरपूर फसल, किसानों की समृद्धि तथा सभी परिवारों की सुख-खुशहाली की कामना की गई। इस दौरान पारंपरिक खेलों, लोकगीत-संगीत और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति को जीवंत किया गया।
गौरी-गणेश और नवग्रह पूजन से हुई शुरुआत
हरेली कार्यक्रम की शुरुआत गौरी-गणेश एवं नवग्रह पूजन के साथ हुई। मंत्रोच्चार के बीच शिवलिंग का अभिषेक किया गया। इसके बाद नांगर, रापा, कुदाल, फावड़ा सहित खेती-किसानी में उपयोग होने वाले विभिन्न कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को नमन कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की गई।आयोजन में शामिल भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष विभा अवस्थी ने कहा कि हरेली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के बीच आत्मीय रिश्ते का उत्सव है। यह पर्व अपनी धरती, पशुधन, कृषि उपकरणों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और प्रदेश की बड़ी आबादी की आजीविका खेती-किसानी से जुड़ी है। ऐसे में किसान की समृद्धि ही गांव और प्रदेश की खुशहाली का मजबूत आधार है।
कृषि औजारों की पूजा पुरखों की प्रकृति के प्रति समझ का प्रतीक
हरेली के समय तक खेती के अनेक प्रमुख कार्य पूरे हो चुके होते हैं। इसके बाद किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा कर आने वाले कृषि वर्ष में अच्छी फसल और समृद्धि की कामना करते हैं।
महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ ममता साहू ने इस अवसर पर कहा कि यह परंपरा हमारे पुरखों की प्रकृति और कृषि व्यवस्था के प्रति गहरी समझ तथा सम्मान को दर्शाती है।हरेली पर पशुधन को लोंदी खिलाने की लोक परंपरा भी निभाई गई। इसे पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और रोगों से बचाव की कामना से जोड़कर देखा जाता है। ग्रामीण जीवन में पशुधन परिवार और कृषि व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा रहा है। हरेली की परंपरा पशुओं के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और संरक्षण का संदेश भी देती है।
इस अवसर पर मौजूद प्रदेश महामंत्री डॉक्टर नवीन मार्कंडेय ने कहा कि आधुनिकता के दौर में अपनी उपयोगी और प्रकृति-सम्मत परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है। हरेली इसी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम है।
मांदर की थाप पर झूमे, पारंपरिक खेलों में लिया हिस्सा
हरेली उत्सव के दौरान मांदर, ढोलक और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के बीच छत्तीसगढ़ी लोकधुनों ने वातावरण को उत्सवी बना दिया। महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक गीत-संगीत का आनंद लिया और लोकधुनों पर उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
इस दौरान गेड़ी चढ़ने सहित विभिन्न पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया। खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। खेलों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की ग्रामीण और लोक परंपराओं की झलक देखने को मिली।
ठेठरी-खुरमी और बड़ा ने बढ़ाया स्वाद
हरेली उत्सव में छत्तीसगढ़ी पारंपरिक खानपान का भी विशेष रंग देखने को मिला। ठेठरी, खुरमी, बड़ा सहित विभिन्न पारंपरिक व्यंजनों ने आयोजन में छत्तीसगढ़ी स्वाद और संस्कृति की खुशबू बिखेरी। महिलाओं ने पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की खानपान परंपरा को भी प्रदर्शित किया।
किसानों की समृद्धि को बताया प्रदेश की खुशहाली का आधार
कार्यक्रम में किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं और प्रयासों का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में शुरू हुए किसान क्रेडिट कार्ड ने किसानों को खेती के लिए सहज रूप से पूंजी उपलब्ध कराने का रास्ता खोला।
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने सहकारी कृषि ऋण की ब्याज दरों को चरणबद्ध तरीके से कम करते हुए अंततः शून्य प्रतिशत तक पहुंचाया। आज किसानों को सहकारी बैंकों से शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध होने की बात भी कार्यक्रम में कही गई।
वक्ताओं ने कहा कि फसल बीमा को सरल बनाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिक कृषि तकनीक किसानों तक पहुंचाने की दिशा में भी लगातार काम किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इससे प्रदेश के लाखों किसान परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है।
प्रकृति से लेने के साथ उसे सहेजने का भी संदेश
हरेली के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए कहा गया कि यह पर्व हमें प्रकृति से केवल लेने की नहीं, बल्कि उसे सहेजने और उसे लौटाने की भी सीख देता है। कृषि, पशुधन, जल, जंगल और जमीन के साथ छत्तीसगढ़ के लोगों का सदियों पुराना रिश्ता हरेली की परंपराओं में दिखाई देता है।
आयोजन में उपस्थित अतिथियों ने कहा कि हरेली हमारी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नई पीढ़ी को गेड़ी, पारंपरिक खेल, लोकगीत, लोकवाद्य, पारंपरिक खानपान और कृषि से जुड़ी परंपराओं से जोड़कर ही इस विरासत को आगे बढ़ाया जा सकता है।
ये अतिथि रहे मौजूद
कार्यक्रम में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष विभा अवस्थी, रायपुर मेयर मीनल चौबे, महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, किरण बघेल, चंद्रकांती वर्मा, शताब्दी पांडे, प्रदेश महामंत्री डॉ नवीन मार्कंडेय, अशोक बजाज, नवीन अग्रवाल जिला पंचायत अध्यक्ष, हेमलता चंद्राकर प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
कार्यक्रम की जिम्मेदारी रश्मि वर्मा और सविता चंद्राकर ने संभाली। पूजा की व्यवस्था संगीता शर्मा और प्रीति परगनिया के नेतृत्व में की गई। नाश्ता व्यवस्था में मिली बैनर्जी, तिलेश्वरी धुरंधर, भारती बागल और प्रतिज्ञा गुप्ता की भूमिका रही। मीडिया की जिम्मेदारी प्रियंका गिरी ने संभाली।
खेल प्रतियोगिताओं की व्यवस्था किरण सिंह, योगिता सिन्हा, चंद्रकला और माधुरी साहू ने संभाली।इसके अलावा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी से स्वाति वर्मा, ओमकुमारी, रानी जैन, मैना वर्मा, सीमा वर्मा, सावित्री वर्मा, हेमलता साहू, धनमती साहू, सीता साहू, पदमनी साहू, पूजा साहू, पूजा बघेल और मीना साहू सहित प्रदेश एवं रायपुर ग्रामीण के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
पूरे आयोजन के दौरान महिला मोर्चा की पदाधिकारी और कार्यकर्ता पारंपरिक उत्साह में नजर आईं। पूजा-अर्चना, लोकगीत-संगीत, गेड़ी और पारंपरिक खेलों के साथ हरेली तिहार ने छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, लोक जीवन, प्रकृति प्रेम और सामाजिक एकजुटता की तस्वीर प्रस्तुत की।


