
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडेय ने कहा:इमरजेंसी लोकतंत्र का सबसे बड़ा काला अध्याय
भाजपा प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने कहा :कांग्रेस सरकार ने सत्ता बचाने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं, संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का दमन किया था
बिलासपुर। केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार आने के बाद इमरजेंसी का जिन्न फिर बोतल से बाहर आ गया है। 50 साल पहले देश में लागू किए गए इमरजेंसी के स्याह पक्ष को भाजपा के नेता पूरे प्रदेश में पिछले कई साल से उजागर करने और लोगों को बताने का प्रयास करते आ रहे है और इस कार्य को भाजपा का कांग्रेस के खिलाफ हथियार से स्पष्ट इनकार कर रहे है।
आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ के अवसर पर बिलासपुर में भाजपा ने एक नहीं दो प्रेस कांफ्रेस करके कांग्रेस को एक बार फिर कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सत्ता बचाने के लिए संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों को कुचल दिया था।भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में श्री पाण्डेय ने कहा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर संविधान की धारा-352 के तहत देश में आपातकाल लागू किया था। उन्होंने कहा कि 21 महीने तक चले इस दौर में चुनाव स्थगित कर दिए गए, नागरिक स्वतंत्रता को समाप्त कर दिया गया और लोकतांत्रिक व्यवस्था को गंभीर क्षति पहुंचाई गई।
पाण्डेय ने कहा कि कांग्रेस ने भाजपा ,समाजवादी पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाला । लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने भी आपातकाल को भारतीय इतिहास का काला अध्याय बताया था। उस समय सत्ता के खिलाफ उठ रही आवाजों को दबाने के लिए विपक्षी नेताओं को बिना कारण जेलों में बंद कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला आने के बाद सत्ता पर संकट मंडराने लगा था, जिसके बाद आपातकाल का रास्ता चुना गया।
श्री पाण्डेय ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को शारीरिक और मानसिक यातनाएं झेलनी पड़ीं। आपातकाल के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सबसे बड़ा हमला हुआ। मीडिया पर सेंसरशिप लागू कर दी गई थी और अखबारों के प्रकाशन पर नियंत्रण स्थापित किया गया था। पत्रकारों की गिरफ्तारियां हुईं और विदेशी पत्रकारों पर भी प्रतिबंध लगाए गए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ उस दौर में पूरी तरह दबाव में था। उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी द्वारा दिए गए बयान कि आज के हालात को देखते हुए इमरजेंसी की ओर बढ़ रहा देश से साफ इनकार कर दिया। प्रेस वार्ता में गुलशन ऋषि,दीपक सिंह,सोमेश तिवारी आदि मौजूद थे
सवालों से घिरे भाजपा प्रवक्ता मुकेश शर्मा
भारतीय जनता पार्टी बिलासपुर ग्रामीण द्वारा आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता को भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सत्ता बचाने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं, संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का दमन किया था।
प्रदेश प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने कहा कि आपातकाल के दौरान देशभर में विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और लोकतंत्र समर्थकों को जेलों में बंद किया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई तथा न्यायपालिका एवं अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले हजारों कार्यकर्ताओं और नेताओं के त्याग एवं बलिदान को देश कभी नहीं भूल सकता।
श्री शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी आपातकाल की विभीषिका को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है, ताकि लोकतंत्र की रक्षा और संविधान के प्रति जनजागरूकता बनी रहे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता से ही मजबूत होता है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और आज भारत विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। प्रेस वार्ता के दौरान खूब सवाल जवाब होने से श्री शर्मा असहज महसूस करने लगे थे।
प्रेस वार्ता में पूर्व केबिनेट मंत्री डॉ कृष्णमूर्ति बाँधी, छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष राजा पाण्डेय भाजपा जिला महामंत्री जनक देवांगन, प्रणव शर्मा समदरिया पवन कश्यप मोनू रत्नाकर श्रीवास शैलू गोरख कमल पटेल उपस्थित रहे।
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Wed Jun 24 , 2026
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