47वें वर्ष में प्रवेश कर रही उसकी देन कमेटी ने 7 दिनों तक बिलासपुर को दिया हुसैनी पैगाम, कौमी एकता और इंसानियत की रोशनी से किया सराबोर

बिलासपुर, 8 मोहर्रम। उसकी देन कमेटी द्वारा आयोजित सात दिवसीय मजलिस, तकरीर और शोहदाए कर्बला की याद में आयोजित कार्यक्रम का समापन भावपूर्ण माहौल में हुआ। कमेटी के गौरवशाली 47वें वर्ष के अवसर पर आयोजित इस श्रृंखला में प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान एवं शिक्षाविद प्रोफेसर मुख्तार अशरफ ने लगातार सात दिनों तक बिलासपुर की अवाम को कर्बला के संदेश, इंसानियत, शिक्षा, कौमी एकता और सामाजिक जागरूकता का पैगाम दिया।

रमजानी बाबा हॉल में आयोजित कार्यक्रम में प्रोफेसर मुख्तार अशरफ ने कहा कि कर्बला केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं बल्कि इंसाफ, सत्य, त्याग और मानवता की रक्षा का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम अमन, भाईचारे और इंसानी सम्मान का धर्म है तथा जिहाद का वास्तविक अर्थ अन्याय, बुराइयों और अपने भीतर की कमजोरियों के विरुद्ध संघर्ष करना है।

उन्होंने अपने संबोधन में भारत की सूफी परंपरा, औलिया-ए-किराम और बुजुर्गाने-दीन की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदुस्तान की धरती प्रेम, सद्भाव और आध्यात्मिक विरासत से समृद्ध रही है। हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, हजरत निजामुद्दीन औलिया और अन्य सूफी संतों ने समाज को मोहब्बत, सेवा और इंसानियत का रास्ता दिखाया, जिसकी आज पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है।

प्रोफेसर अशरफ ने कहा कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और अहले बैत की जिंदगी पूरी मानवता के लिए आदर्श है। हजरत इमाम हुसैन की शहादत ने यह संदेश दिया कि अत्याचार और अन्याय के सामने कभी सिर नहीं झुकाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्बला हमें सिखाती है कि सत्य और न्याय के लिए दी गई कुर्बानी कभी व्यर्थ नहीं जाती और इंसानियत जब तक जिंदा रहेगी, इमाम हुसैन का नाम सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा।

उन्होंने युवाओं से शिक्षा को अपनाने, समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और नफरत के बजाय मोहब्बत का रास्ता चुनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अगर समाज को आगे बढ़ाना है तो इल्म, अखलाक और इंसानी रिश्तों को मजबूत करना होगा।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उसकी देन कमेटी ने पिछले सात दिनों में केवल धार्मिक कार्यक्रम ही आयोजित नहीं किए, बल्कि कर्बला के संदेश को आम जीवन से जोड़ते हुए समाज को नई सोच देने का प्रयास किया। कमेटी ने युवाओं को अपने इतिहास, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के साथ-साथ कौमी एकता, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का संदेश भी दिया।

इस अवसर पर कमेटी के संयोजक शेख नजीरुद्दीन (पूर्व सभापति नगर निगम) की सेवाओं की सराहना करते हुए प्रोफेसर मुख्तार अशरफ का स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे विद्वानों और चिंतकों की आज देश को आवश्यकता है, जो समाज को मुख्यधारा से जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

कार्यक्रम के समापन पर महिलाओं के लिए विशाल लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने सहभागिता की। उपस्थित जनसमूह ने शोहदाए कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश करते हुए अपने जीवन में कर्बला के किरदार, त्याग, सब्र और इंसाफ के संदेश को अपनाने का संकल्प लियाइस अवसर पर फरहान बक्स, हसनैन अली, जियाउद्दीन प्यारे, इकराम भैया, अदनान अली, शाहिद लालखदान, शाहिल शेख, अब्दुल कलीम , मोहम्मद अली, अब्दुल रज्जाक बड़े, इंसान अली बब्बू, आदिल भाई, असद, अब्दुल रशीद, रिजवान शानू, ज़ैद, वसीम बक्स, हाजी कादिर, हाजी निशार, हाजी जफर, खालिद भाई (सिटी मैन टेलर), प्यारू भाई, अबरार भाई, आरिफ बेग, शेख निजामुद्दीन, मिर्जा वसीम बेग, शबाब अली, शाहिद सहित कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य एवं शहर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

सात दिनों तक चले इस आयोजन ने बिलासपुर की अवाम को हुसैनी रंग में रंगते हुए यह संदेश दिया कि कर्बला केवल इतिहास नहीं, बल्कि इंसाफ, इंसानियत, शिक्षा, एकता और मानव मूल्यों की जीवंत पाठशाला है।

निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176

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