केंद्र की  भाजपा सरकार  महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन बिल पास कराना चाह रही थी, कांग्रेस कांग्रेस महिला आरक्षण के समर्थन में पहले भी थी और आज भी  है :जिला कांग्रेस 

 भाजपा द्वारा महिला आरक्षण को लेकर लगातार भ्रम फैलाया जा रहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया, इसलिए संसद में बिल पास नहीं हो सका।

भाजपा देश भर में विपक्ष के खिलाफ अब नाटक करेगी उसका माकूल जवाब कांग्रेस देगी । कांग्रेस भी जनता के सामने भाजपा सरकार की पोल खोलेगी

>बिलासपुर। जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा और ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने आज प्रेस वार्ता कर कहा कि भारतीय जनता पार्टी झूठ बोल रही है, महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) 128वां संविधान संशोधन 2023 में संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुका है तथा राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू इस पर हस्ताक्षर कर चुकी है तथा यह कानून भी बन चुकी है। भाजपा ने 16 अप्रैल 2026 को जो विधेयक संसद में प्रस्तुत किया 131वां संविधान संशोधन अधिनियम इसमें महिला आरक्षण के संदर्भ में नहीं भाजपा महिला आरक्षण को मुखौटा बनाकर परिसीमन संशोधन बिल तथा केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल को पास करवाना चाहती थी।

कांग्रेस नेता द्वय ने कहा सरकार ने 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किया. संसद में जो विधेयक गिरा उसमें इस विधेयक में लोकसभा परिसीमन की सीटें 850 करने का प्रस्ताव था राज्यों में 815 सीटें तथा केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें।परिसीमन विधेयक- जिसमें परिसीमन के लिये 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात की गयी थी।. विधेयक में पांडुचेरी, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन की बात की गयी थी ताकि परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक लागू किया जा सके।

उन्होंने कहा सरकार देश को अंधेरे में रखकर  परिसीमन बिल पास करना चाहती है।भाजपा सरकार का परिसीमन बिल पर देश के अन्य राज्यों को आपत्ति थी.  भाजपा 2011 के जनगणना को आधार मान कर परिसीमन करना चाहती है। जब 2026-27 की जनगणना शुरू है तथा सरकार जाति जनगणना की भी बात कर चुकी है तो जनगणना के बाद आये नये आंकड़ों के आधार पर परिसीमन क्यों नहीं कराया जा रहा?

उन्होंने कहा महिला आरक्षण बिल को यदि तुरंत लागू करना है तो परिसीमन का इंतजार किये बिना वर्तमान विपक्षी दल इसके लिए तैयार है। सदस्य संख्या में ही 33 प्रतिशत का आरक्षण क्यों नहीं देना चाहती सरकार?जबकि  कांग्रेस सहित सभी दल इसके लिए सरकार 2023 के महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर महिला आरक्षण को तुरंत लागू कर सकती थी उसने ऐसा क्यों नहीं किया?जबकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 जो कानून बन चुका है 2036 से मूर्त रूप लेगा संशोधन से तुरंत लागू हो जाता।उन्होंने कहा भाजपा की मंशा महिला आरक्षण की नहीं अपने मनमुताबिक सीटों के परिसीमन की थी जो विपक्षी दलों की एक जुटता से पूरा नहीं हो चुका।

 

कांग्रेस महिला आरक्षण की प्रबल समर्थक

श्री मिश्रा और श्री गंगोत्री ने कहा पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण मिल रहा तो यह भी कांग्रेस की नीतियों से संभव हो पाया। सबसे पहले राजीव गांधी ने 1989 के मई महीने में पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। वह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया था लेकिन सितंबर 1989 में राज्यसभा में पास नहीं हो सका। अप्रैल 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को फिर से पेश किया। दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए। महिलाओं के लिए संसद और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह संविधान संशोधन विधेयक लाए। विधेयक 9 मार्च 2010 को राज्यसभा में पारित हुआ। कांग्रेस की सरकारों के प्रयास से ही आज देशभर में पंचायतों और नगर पालिकाओं में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं। परिसीमन का भाजपा का षड़यंत्र विफल हो गया है, अतः वह महिला आरक्षण के नाम पर पूरे देश में भ्रम फैला रही है । कांग्रेस इसका जवाब देगी । संगोष्ठी के द्वारा भाजपा सरकार के इस षड्यंत्र को उजागर किया जाएगा । प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक शैलेश पाण्डेय,सिया राम कौशिक पूर्व महापौर रामशरण यादव पूर्व अध्यक्ष विजय केशरवानी,विजय पांडेय , राजेंद्र शुक्ला ,जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद नायक  सीमा पाण्डेय समेत कई कांग्रेस नेता मौजूद थे ।

निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176

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