वरिष्ठ साहित्यकार डा. पालेश्वर शर्मा की अप्रकाशित रचनाओ को   राजभाषा आयोग प्रकाशित करेगा :प्रभात मिश्रा

बिलासपुर. समन्वय साहित्य परिवार छत्तीसगढ़ ने  पालेश्वर प्रसाद शर्मा प्रसंग का आयोजन किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी हिंदी साहित्य और समाज के लिए पालेश्वर शर्मा के अपूर्व योगदान को याद किया गया। इस अवसर पर कई कृतियों का विमोचन हुआ, साथ ही साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में कई विभूतियों का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने घोषणा की कि पालेश्वर शर्मा की अप्रकाशित रचनाओं का प्रकाशन आयोग की ओर से किया जाएगा।

संस्कृत विदुषी पुष्पा दीक्षित ने ने पालेश्वर शर्मा को पाणिनि शोध संस्थान की ओर से कविराज की उपाधि प्रदान करने की घोषणा की। प्रार्थना भवन में यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक, ऋऋषि और कृषि संस्कृति के उपासक, छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य के युग प्रवर्तक, हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी के मूर्धन्य साहित्यकार, भाषाविद, शिक्षाविद पालेश्वर शर्मा की 98वीं जयंती पर स्मरणांजलि के रूप में आयोजित किया गया। इस अवसर पर पालेश्वर शर्मा की पुस्तक ‘छत्तीसगढ़ का इतिहास एवं परंपरा गुड़ी के गोठ’ का विमोचन किया गया।

साथ ही देवधर महंत के संपादन में प्रकाशित ‘कीर्ति शेष पालेश्वर प्रसाद शर्मा’, सरला शर्मा की ‘रात जागा पाखी उवाच’ और बरसाइत दास महंत की ‘महाभारत काल में नारी’ का भी विमोचन किया गया। विजय मिश्रा अमित, महेंद्र कुमार जैन, ऊषा किरण बाजपेई, सरला शर्मा, शशि दुबे, बेला महंत, श्रुति प्रभला, बृजेश श्रीवास्तव, किशोर तिवारी, किशोर सेतपाल, दिनेश कुमार चतुर्वेदी, बजरंग केडिया, प्रेम शंकर पाटनवार, सुभाष वर्मा, जयश्री शुक्ला, बसंत राघव,राजेश चौहान और सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी गोडपारा का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर के साहित्य भाषा अध्ययनशाला के निवर्तमान अध्यक्ष चितरंजन कर ने कहा कि पालेश्वर शर्मा भाषाविद, साहित्यकार, अनुवादक, समीक्षक, चिंतक और शिक्षक थे। उन्होंने इसके आयोजन के लिए राजीव नयन शर्मा, साधना शर्मा, अनन्या शर्मा और दीपांजलि शर्मा को साधुवाद दिया।

प्रभात मिश्रा ने कहा कि पालेश्वर शर्मा छत्तीसगढ़ के गौरव हैं। वे संस्कृति पुरुष थे। आयोग की ओर से पालेश्वर शर्मा को समर्पित जिला सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। उनकी जो भी कृति अप्रकाशित है, उसका प्रकाशन आयोग की ओर से किया जाएगा।

पुष्पा दीक्षित ने कहा कि पाणिनी शोध संस्थान की ओर से पालेश्वर शर्मा को कविराज की उपाधि प्रदान की जाती है। अजय पाठक ने कहा कि पालेश्वर शर्मा का व्यक्तित्व ऐसा था जैसे किसी किसान के भीतर विद्वान की मशीनरी फिट कर दी जाए। दुर्ग की साहित्यकार सरला शर्मा ने कहा कि पालेश्वर शर्मा व्यष्टि से समष्टि की चेतना के पर्याय थे। छत्तीसगढ़ विधानसभा के सचिव दिनेश शर्मा ने कहा कि पालेश्वर शर्मा असाधारण होकर भी साधारण पुरुष थे।

निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176

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