बेलतरा में ₹100 प्रति वर्गफुट वसूली का आरोप बना सियासी बारूद, सत्ता की कार्यप्रणाली पर उठे रहें गंभीर सवाल..

बिलासपुर/बेलतरा विधानसभा क्षेत्र इन दिनों एक ऐसे गंभीर आरोपों के घेरे में है, जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि सत्ता पक्ष की पूरी कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इस पर टीवी चैनलों में भी बहस हो चुकी है।  क्षेत्र में निर्माण कार्यों, प्लाटिंग, अवैध प्लाटिंग और जमीन की खरीदी–बिक्री से जुड़े मामलों में ₹100 प्रति वर्गफुट की कथित वसूली का मुद्दा अब सियासी बारूद बनता जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों, जमीन कारोबारी वर्ग और छोटे बिल्डरों का आरोप है कि पिछले लगभग दो वर्षों से एक संगठित और सुनियोजित सिस्टम के तहत यह वसूली की जा रही है। आरोप यह भी है कि बिना तय “राशि” चुकाए न तो निर्माण कार्यों की अनुमति मिलती है और न ही नामांतरण, डायवर्सन और अन्य दस्तावेजी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो पाती हैं।

*भय का माहौल, शिकायत करने से लोग डरे*

इस कथित वसूली व्यवस्था को लेकर सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आज तक कोई भी पीड़ित व्यक्ति औपचारिक शिकायत दर्ज कराने सामने नहीं आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में भय और दबाव का माहौल इतना गहरा है कि आवाज उठाने वाले को परेशान किए जाने का डर बना रहता है। आम नागरिकों का आरोप है कि इस सिस्टम का सबसे बड़ा शिकार किसान, छोटे प्लाट मालिक, मध्यम वर्गीय परिवार और छोटे बिल्डर हो रहे हैं, जिनके लिए अपनी जमीन पर घर बनाना या वैध रूप से लेन-देन करना भी मुश्किल होता जा रहा है।

*व्यक्तिगत नहीं, संगठित वसूली का आरोप*

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति या अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक पूरी नेटवर्क आधारित व्यवस्था के तहत संचालित किया जा रहा है। जमीन से जुड़े हर छोटे-बड़े काम में कथित रूप से “रेट” तय होने की बातें सामने आ रही हैं।

*कांग्रेस नेता अंकित गौरहा का सख्त बयान*

इस पूरे प्रकरण पर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा यदि बेलतरा विधानसभा में इस तरह की वसूली की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो यह बेहद गंभीर विषय है। कांग्रेस किसी पर बिना प्रमाण आरोप लगाने की राजनीति नहीं करती, लेकिन जब जनता भय के कारण सामने नहीं आ पा रही हो, तब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह स्वयं संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराए।”

उन्होंने आगे कहा कि बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत जमीन के जुड़े प्लाटिंग,अवैध प्लाटिंग जमीन खरीदी–बिक्री, नामांतरण,डायवर्सन से जुड़े मामलों की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता है।

*राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल*

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच नहीं हुई, तो यह मुद्दा आने वाले समय में केवल बेलतरा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे जिले और राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल क्षेत्र की जनता और राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ₹100 प्रति वर्गफुट की कथित वसूली का सच क्या है ? इस कथित सिस्टम के पीछे कौन लोग हैं ? प्रशासन कब स्वतः संज्ञान लेकर जांच शुरू करेगा ? सवाल तो जनता के हैं पर जवाब सत्ता को देने होंगे।

निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176

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