
बिलासपुर । कोई बलिष्ठ ,बलशाली और तंदुरुस्त इंस्पेक्टर हो तो उसे फील्ड में तैनात किया जाना चाहिए। ऐसा इंस्पेक्टर अकेले गुंडों और असामाजिक तत्वों पर निःसंदेह भारी पड़ता है । ऐसे इंस्पेक्टर से चोर , गिरहकट गुंडा और असामाजिक तत्व भी भय खाते है। सिम्स के चौकी प्रभारी मरकाम में वह सब गुण विद्धमान है,उनकी पर्सनालिटी ही ऐसी है कि सिम्स कि सिम्स के मार्च्यूरी में रखे मुर्दों को भी पसीना छूट जाए लेकिन उन्हें न जाने क्यों सिम्स चौकी में ड्यूटी में लगा दिया गया है । उनका उपयोग गुंडों,असामाजिक तत्वों से निपटने के लिए क्यों नहीं किया रहा यह पुलिस के आला अफसर ही जानें लेकिन एक माह के भीतर मरकाम ने पुलिस की छवि दागदार करने में कोई कसर नहीं छोड़ा है.। एक गंभीर आरोप की जांच रिपोर्ट एस एस पी को सौंपे दो ही दिन हुआ है और मरकाम के खिलाफ फिर एक गंभीर आरोप ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगली उठ रही है। संभव यह भी है कि मरकाम खुद अपना पोस्टिंग दूसरे जगह करवाने ऐसी कार्रवाई कर रहा हो ,लेकिन अबकी बार उनके खिलाफ जो मामला सामने आया है वह न केवल अति गंभीर है बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाला है।
कोटा ब्लॉक के रिंगरीगा गांव के रहने वाले 64 वर्षीय गणेश सिंह सरटीया की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए सिम्स भेजा गया, लेकिन जब बेटा भारत सिंह सरटीया पिता का शव लेने पहुंचा तो उससे 500 रुपए की मांग की गई। आरोप सिम्स चौकी प्रभारी ढोला राम मरकाम पर लगे हैं, जिन्होंने पंचनामा की प्रक्रिया के नाम पर रिश्वत मांगी।
इतना ही नहीं, मरच्यूरी के सफाईकर्मी राकेश मौर्य पर भी 300 रुपए मांगने का आरोप है। वीडियो में बेटा अपने पिता का शव पाने के लिए खाकी पहने पुलिसकर्मी से हाथ जोड़कर गुहार लगाते दिख रहा है, मगर इंसानियत की जगह वहां पैसों की मांग गूंजती रही।
बेबस बेटा गांव में जाकर लोगों से उधार मांगता रहा ताकि पिता की लाश घर ले जा सके। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सिम्स प्रशासन और पुलिस मौन रही। जब मामला मीडिया तक पहुंचा, तब आनन-फानन में शव परिजनों को सौंप दिया गया।
सिम्स से निकला यह वीडियो और आरोप सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जहां इंसानियत अब “वसूली” की कीमत पर बि
क रही है।


