बिलासपुर। जातियों और समाज के लोगों तथा आराध्य देवों के खिलाफ अशोभनीय और अभद्र टिप्पणी करने का आजकल फैशन सा निकल पड़ा है जिसके विरोध में पीड़ित समाज के लोग पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवा कार्रवाई की मांग करते है । अभी दो दिन पहले ही छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना के प्रमुख पदाधिकारी अमित बघेल को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार करते हुए जुबान को नियंत्रण में रखने और जहां जहां जिन राज्यों में उनके खिलाफ जुर्म दर्ज हुआ है वहां वहां जाने का आदेश देते हुए कहा है कि आप पूरे भारत भ्रमण करिए। यह तो अमित बघेल का मामला हो गया लेकिन मध्यप्रदेश के एक आई ए एस ने ब्राह्मण समाज की बेटियों के प्रति जो कुछ कहा है वह निःसंदेह अक्षम्य है लेकिन ब्राम्हण समाज ने इसके विरोध में लगता है औपचारिकता भर निभाने के पक्ष में है । ब्राह्मण समाज के एक प्रमुख पदाधिकारी जो रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर है और जो कानून की भाषा अच्छी तरह समझते है ,उन्होंने अपने सहयोगी पदाधिकारियों के साथ मप्र के आई ए एस अफसर के खिलाफ कार्रवाई के लिए बजाय पुलिस में रिपोर्ट लिखाने के बजाय आईएएस कलेक्टर को ज्ञापन सौंपी है । बड़ा सवाल यह है कि एक आईएएस किसी दूसरे आईएएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार रखता है? वह भी मप्र के आईएएस अधिकारी के खिलाफ ।समाज की बेटियों के खिलाफ अनर्गल टिप्पणी करने वाले आईएएस के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई करवाने के लिए पुलिस में एफआईआर के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं है । ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर और विधि के ज्ञाता द्वारा बिलासपुर के कलेक्टर भर को ज्ञापन देने का निर्णय कुछ जम नहीं रहा है।
पढ़िए बिलासपुर कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में ब्राह्मण समाज के 3 पदाधिकारियों ने क्या कहा है :
प्रति,
11/26/25
श्रीमान कलेक्टर बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
विषयः- दिनांक 23 नवंबर 2025 को मध्यप्रदेश के अजाक्स के नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष एवं IAS ऑफिसर संतोष वर्मा ने ब्राह्मण कन्याओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है कि जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान न कर दें या उससे संबंध न बना दें तब तक आरक्षण मिलना चाहिए श्री संतोष वर्मा के सार्वजनिक एवं प्रशासनिक पद पर रहते हुए ऐसी टिप्पणी की जिसकी जितनी भर्त्सना की जाए उतनी कम है। उक्त कथन से ब्राह्मण समाज में असंतोष अपमान एवं विद्रोह के स्वर उभर रहे हैं।
उक्त आपत्तिजनक वक्तव्य से एवं अत्यंत आपत्ति जनक जातिवादी टिप्पणी से ब्राह्मण महिला समाज में अत्यंत असंतोष एवं अपमान अनुभव किया जा रहा है।
माननीय,
जातिवादी टिप्पणियों को भारतीय दंड संहिता के तहत अन्य अपराधों, जैसे कि मानहानि (IPC की धारा 499) या लोक सेवक द्वारा जातिगत भेदभाव के लिए भी जिम्मेदार
ठहराया है।
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 मानहानि को परिभाषित करती है, जिसमें किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के इरादे से या ऐसा करने के कारण को जानते हुए, उसके बारे में झूठे शब्द, संकेत या चित्रण के माध्यम से कुछ भी कहना या प्रकाशित करना शामिल है। इसमें झूठे आरोप लगाना और अपमानजनक बातें कहना शामिल है. और इसके लिए पारा 500 के तहत दो साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
इस बयान का सीधे तौर पर समाज विशेष, धर्म विशेष, जाति विशेष की भावना को आघात पहुंचाना, अपमानित करना और ठेस पहुंचाना उद्देश्य नजर आ रहा है। इसलिए शासन प्रशासन से आग्रह पूर्व निवेदन है कि संबंधित के विरुद्ध स्वयं संज्ञान आधार पर एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई करें। अन्यथा अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज म.प्र. ही नहीं, महिलाओं, नारी शक्ति, बेटियों की रक्षा, सुरक्षा के लिए बहन बेटियों के सम्मान के लिए सामाजिक के साथ धार्मिक और राजनीतिक रूप से जो भी संगठन है, वह एकजुट होकर प्रदेश ही नहीं संपूर्ण देश में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
जयश्री शुक्ला,अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ी सरयूपारीण ब्राह्मण
अरविंद दीक्षित अध्यक्ष कान्याकुबज ब्राम्हण समाज
डॉ. प्रदीप शुक्ला अध्यक्ष छत्तीसगढ़ी विकास परिषद मो. 9827114573, 989388844




