बिलासपुर। कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अभय नारायण राय ने रलिया-भिलई में प्रस्तावित अरपा कोल बेनिफिकेशन ग्रीनफील्ड लिमिटेड की जनसुनवाई का तीव्र विरोध करते हुए कहा कि पूर्व में जब एक बार सुनवाई रद्द हो चुकी है तो अधिकारियों को इतनी जल्दबाजी क्यों है ? फिर से जनसुनवाई करने में अधिकारियों का आखिर क्या स्वार्थ है ? यह सुनवाई हर हालत में नहीं होनी चाहिए । अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर वे क्यों इतनी रुचि दिखा रहे है? सुनवाई आज खैरा स्टेडियम में हो रही है और ग्रामीण इसे किसी भी हाल में स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। जिस विकास का झुनझुना कंपनी और प्रशासन बजा रहा है, उसे ग्रामीण “विनाश की घंटी” कह रहे हैं।से जबरदस्ती सुनवाई के दौरान यदि कोई कोई गड़बड़ होती है तो उसका जवाबदार सुनवाई करने में उतारू अधिकारी ही होंगे ।
श्री राय ने बताया कि उन्होंने ग्रामीणों से भी बात की है कोलवाशरी के विरोध में खड़े लोगों का कहना है कि जहां प्रोजेक्ट लगाया जा रहा है, वहां 500 मीटर के दायरे में स्कूल है। कोलवाशरी से उड़ने वाली कोयले की धूल बच्चों की सेहत पर सीधा असर करेगी। खेती-किसानी नाले-नहर पर निर्भर है, इस प्रोजेक्ट के स्थापित गांवों में चर्चा यह भी है कि विरोध की धार को कुंद करने के लिए “लेन-देन” का खेल खूब चल रहा है।
आसपास के कुछ जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने हाल ही में मोर्चा खोलते हुए जनसुनवाई रद्द करने और प्रोजेक्ट को स्थायी रूप से बंद करने की मांग की थी। उनका साफ कहना है, जहां बच्चों की सेहत और किसानों की जिंदगी दांव पर हो, वहां किसी भी उद्योग का कोई औचित्य नहीं है।
इधर जनसुनवाई को देखते हुए प्रशासन ने खैरा स्टेडियम को छावनी में बदल दिया है। पुलिस के जवानों की तैनाती की गई है। लेकिन प्रशासन की सख्ती से ग्रामीणों का गुस्सा कम नहीं हुआ है। गांव-गांव से जत्थे बनाकर लोग खैरा पहुंचने की तैयारी में लगे है। माहौल गरम है और टकराव की आशंका गहराने लगा है। ग्रामीणों की एक ही मांग है की हमें स्वच्छ हवा और पानी चाहिए, रोजगार और विकास के नाम पर बीमारी नहीं चाहिए और यह सुनवाई बंद होनी चाहिए।



