
शरद पूर्णिमा आयोजन समिति ड्रीम सिटी के संयोजक डॉ. शरद कौशिक द्वारा बताया गया कि विगत 10 वर्षों से चली आ रही सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन की परम्परा को कायम रखते हुए, इस वर्ष विराट हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी , विशिष्ट अतिथि फिल ग्रुप के डायरेक्टर प्रवीण झा , डॉ. सी.व्ही. रमन विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अरविंद तिवारी , चौकसे ग्रुप ऑफ कॉलेजेस के प्रबंध निदेशक डॉ. आशीष जायसवाल , शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ के कुलसचिव डॉ. तरूणधर दीवान , डी.एल.एस. कॉलेज के संरक्षक संजय शर्मा , फिल्म निर्माता डॉ. जेठू साहू एवं वार्ड क्रमांक 58 के पार्षद श्रीमती कमला पुरूषोत्तम पटेल द्वारा उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों ने शरद पूर्णिमा उत्सव की महत्ता पर प्रकाश डाला एवं सामाजिक तथा सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने के प्रयास पर आयोजन समिति की प्रसंशा की। इस अवसर पर वार्ड पार्षद श्रीमती कमला पटेल ने रू. 2.00 लाख कालोनी में शेड निर्माण हेतु देने की घोषणा की। उसके पश्चात हास्य कवि सम्मेलन प्रारंभ हुआ, जिसका संचालन कवि बंशीधर मिश्रा ने गुदगुदा गुदगुदा कर किया। कवियों ने ऐसा समा बांधा कि सभी श्रोता रात्रि 12:30 बजे तक अपने स्थान में ही जमे रहे। गुलाबी ठंड के बावजूद हंसी के फव्वारे से आनंद के सराबोर में डूब कर कवियों के हास्य का अनंद लेते रहे।

“माना माँ की ममता सागर सी गहराई है पिता की क्षमता ब्रम्हांड की ऊंचाई है माना माँ की ममता को कोई नाप नही सकता पर पिता की क्षमता को कोई भाँप नही सकता पिता का किरदार रहता बड़ा निराला है दिखता जहर, होता अमृत का प्याला है” कवि राकेश जैन, ओडिशा।
“ये दुनिया के लोगों कभी प्यार नहीं करना प्यार हो गया तो इजहार नही करना, मिल जाए अगर कोई सच्चा आशिक तो उसकी मोहब्बत से कभी इंकार नही करना”
कवि अंजू लता अंजू पवनी:“एक बार रात के मैं मर गया जैसे सब मठवासी थे, डर गए थे, दरवाज़ा म यमराज दे रहे थे मस्त अपन भाई ऊपर चढ़े रहे मोला आवाज लगात रहे जल्दी आ मोला अब्बड़ काम मोर लिस्ट में अभी कई जन के नाम हे” कवि बंशीधर मिश्रा, अकल तारा“जैसे जईजे मोर उमर भागे लागे लागीस मोला वैसे-वैसे एने बने लागे लागीस एक दिन सपना म देखिए प्रियंका चोपड़ा औ मोर ले कह थे आई लव यू डोकरा” कृष्णा भारती, चिचोली कवि नंदघाट, अजीब पागल है वे लोग जो जघन्य अपराधों पर धार्मिक मुल्लमा चढ़ते, वीरता का दंभभरते हैं निर्दोषों पर गोली चलाते हैं। एकता की बस्ती में अलगाव की आग लगाना चाहते है जो बड़े देश को तोड़कर छोटा सा देश बनाना चाहते है। “कवि काशीपुरी कुंदन, राजिम
“जब से घर में बुजुर्गों की संगत चली गई, तब से रिश्तों की रंगत चली गई, शहरों में खाने का ऐसा बना रिवाज, की गांव से अच्छी भली पंगत चली गई” कवि अशर्फी लाल सोनी, बिलासपुर
“नंदा जाही का रे नंदा जाही का रे नंदा जाही का रे उमर अउ खुमरी अरि-तुतारी अर रररर होत हनिया पखरा के आगी टेडगा हे चोंगी टेडगा हे पगी नुई जुले जस गर्कस मला धर कासेलि दउदत हे गुवाला टेडगाउ लेड़ी ल बांखा दबाए बंसी के धुन मा धेनु चारद्या नंदा जाही का अउ खुमरी अरि तुतारी” कवि मीर अली मीर, रायपुर
“किसी में दम नही इतना की भारत को हरायेगा, बुरी नजरों से देखेगा वो भी मुंह की खायेगा, रहेगा तिरंगा मेरे देश का ऊंचा ही सदा स्वर्णिम पल यहाँ सबका एक दिन आयेगा” कवि सीमा तिवारी, रायगढ़
इस कार्यक्रम में शहर के विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक एवं बुद्धिजीवी उपस्थित थे इनमें प्रमुख रूप से श्री बसंत अंचल, डॉ. शाहिद शेख, श्री प्रणव शर्मा, मिडिया प्रभारी, भाजपा, श्री धर्मेंद्र शर्मा, श्री जितेंद्र पाटले, श्री मोहन सेंडे, (अम्बेडकर ज्ञान केंद्र), श्री लखन साहू, श्री अशोक राठौर, श्री विनोद पाठक, श्री एस. के. साहू, श्री आर.एस. कटकवार, डॉ. के.के. चंद्रा, डॉ. सुनील थवाईत, श्री हर्षवर्धन चंदेल, श्री जे.एस. राज, श्री शुभेदु चटर्जी, श्री विकास साहू, श्री जितेद्र मिश्रा, श्री विजय किरण, श्री बी.पी. साहू, डॉ. विवेक चंदेल, श्रीमती, राजकुमारी साहू, श्रीमती अंजली चंदेल, श्रीमती कल्पना झा, श्रीमती रश्मी कौशिक, श्रीमती यशस्वी शर्मा, उपस्थित रहे। सहसंयोजक डॉ. प्रमोद शर्मा द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।

