
अधिष्ठाता कार्यालय और चिकित्सालय परिसर में आयोजित हुए कार्यक्रम, अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने ईमानदारी, पारदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा का दिया संदेश
बिलासपुर, 28 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अवसर पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध जनजागरूकता बढ़ाने, शासकीय कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से दो अलग-अलग स्थानों पर सत्यनिष्ठा शपथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। पहला कार्यक्रम सुबह सिम्स के अधिष्ठाता कार्यालय में आयोजित हुआ, जबकि दूसरा कार्यक्रम दोपहर 12 बजे सिम्स चिकित्सालय परिसर में संपन्न हुआ। दोनों कार्यक्रमों में अधिकारियों, चिकित्सकों, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ तथा कार्यालयीन कर्मचारियों ने सत्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सजग रहने का संकल्प लिया।
अधिष्ठाता कार्यालय में डॉ. रमणेश मूर्ति ने दिलाई शपथ
सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत आयोजित पहले कार्यक्रम में सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने अधिष्ठाता कार्यालय में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सत्यनिष्ठा की शपथ दिलाई। इस दौरान उन्होंने स्वयं भी शपथ ग्रहण करते हुए ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि किसी भी शासकीय संस्थान की विश्वसनीयता उसके कार्यों की पारदर्शिता, कर्मचारियों की ईमानदारी और प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही पर निर्भर करती है। शासकीय सेवाओं में कार्यरत प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी का यह दायित्व है कि वह अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करे। व्यक्तिगत लाभ, अनुचित दबाव अथवा किसी अन्य प्रलोभन के कारण अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्थानों के प्रति आम नागरिकों के विश्वास को भी कमजोर करता है। इसलिए भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए केवल प्रशासनिक नियमों और कानूनी प्रावधानों का पालन करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर नैतिक जिम्मेदारी और आत्मानुशासन की भावना भी होनी चाहिए। जब अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यों में ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे, तभी प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बन सकेगी।
उन्होंने सभी कर्मचारियों से अपील की कि वे अपने दैनिक कार्यों में सत्यनिष्ठा को व्यवहार का हिस्सा बनाएं तथा संस्थान की प्रतिष्ठा और जनविश्वास को बनाए रखने के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करें।
चिकित्सालय परिसर में चिकित्सा अधीक्षक के नेतृत्व में हुआ शपथ ग्रहण
सिम्स में दूसरा सत्यनिष्ठा शपथ कार्यक्रम दोपहर 12 बजे चिकित्सालय परिसर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने किया। इस अवसर पर चिकित्सालय के मेडिकल, नर्सिंग, पैरामेडिकल एवं कार्यालयीन कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से सत्यनिष्ठा की शपथ ली।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा का पालन करेंगे। वे कानून एवं नियमों के प्रति सम्मान बनाए रखेंगे, न तो रिश्वत लेंगे और न ही रिश्वत देंगे तथा भ्रष्टाचार से संबंधित किसी भी अनुचित गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। इसके साथ ही उन्होंने भ्रष्टाचार के उन्मूलन, पारदर्शी कार्यप्रणाली और स्वच्छ प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि अस्पताल जैसी जनसेवा से जुड़ी संस्था में ईमानदारी, संवेदनशीलता और जवाबदेही का विशेष महत्व है। यहां आने वाला प्रत्येक मरीज बेहतर चिकित्सा सेवा और उचित व्यवहार की अपेक्षा रखता है। ऐसे में चिकित्सकों, नर्सिंग कर्मचारियों, पैरामेडिकल स्टाफ और कार्यालयीन कर्मचारियों सहित प्रत्येक कर्मचारी को अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्ठा से करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शासकीय अस्पताल में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। सभी कर्मचारियों को नियमों का पालन करते हुए मरीजों एवं उनके परिजनों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए। कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी प्रकार की अनियमितता से दूर रहना प्रत्येक कर्मचारी की व्यक्तिगत तथा संस्थागत जिम्मेदारी है।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध सामूहिक प्रयास जरूरी
दोनों कार्यक्रमों के दौरान अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने संयुक्त रूप से भ्रष्टाचार के विरुद्ध जागरूकता और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार किसी भी संस्थान की कार्यक्षमता, प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है। यह एक दीमक की तरह है, जो धीरे-धीरे व्यवस्था को अंदर से कमजोर कर देता है। इसे समाप्त करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से शुरुआत करनी होगी।
उन्होंने कहा कि केवल शपथ लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शपथ में व्यक्त किए गए संकल्पों को अपने व्यवहार और कार्यप्रणाली में उतारना भी आवश्यक है। ईमानदारी का वास्तविक अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी अनुचित दबाव या प्रलोभन के अपने कर्तव्यों का पालन करे, नियमों के अनुरूप निर्णय ले और अपने कार्यों के प्रति जवाबदेह रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि सतर्कता जागरूकता सप्ताह का उद्देश्य केवल भ्रष्टाचार के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करना नहीं, बल्कि समाज और संस्थानों में ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना भी है, जिसमें ईमानदारी, निष्पक्षता और पारदर्शिता को सर्वोच्च स्थान प्राप्त हो। जब प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन निष्ठापूर्वक करेगा, तब भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने में सहायता मिलेगी।
चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं कर्मचारियों की रही सहभागिता
कार्यक्रम में सिम्स के विभिन्न विभागों के चिकित्सकों, अधिकारियों, नर्सिंग अधीक्षक, नर्सिंग कर्मचारियों तथा अन्य स्टाफ सदस्यों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से डॉ. ए. आर. बेन, डॉ. मधुमिता मूर्ति डॉ. रश्मि गुप्ता, डॉ. शिक्षा जांगड़े, डॉ. रेखा बारापात्रे, डॉ. अमित ठाकुर उपस्थित रहे।
नर्सिंग अधीक्षक स्वाती कुमार के साथ सरिता बहादुर, उज्ज्वला दास, नमिता वानी, राजकुमारी चौहान, पिंकी दास, पुष्पलता शर्मा, सविता यादव, प्रभा सिन्हा, शीट कुर्रे, सुषमा तिर्की, माया, नीलिमा सिंह एवं मनोरमा लकरा सहित नर्सिंग स्टाफ ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
इसके अतिरिक्त पवन देव साहू, गरिमा पांडेय, सुभाष श्रीवास्तव, राकेश गढ़ेवाल, धीरज सिंह ठाकुर, दरस दास मानिकपुरी, लालाराम ध्रुव, कृपाल देवांगन एवं राजकिशोर राठौर सहित बड़ी संख्या में कार्यालयीन कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान मरीजों एवं उनके परिजनों की उपस्थिति भी रही।
ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ जनसेवा का संकल्प
सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत आयोजित इन कार्यक्रमों ने सिम्स में ईमानदार कार्यसंस्कृति, नैतिक जिम्मेदारी और पारदर्शी प्रशासन के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। शपथ ग्रहण के माध्यम से अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने यह संदेश दिया कि भ्रष्टाचार की रोकथाम केवल किसी एक विभाग या अधिकारी की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह संस्थान से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का सामूहिक दायित्व है।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत के निर्माण, शासकीय कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने, नियमों का पालन करने तथा अपने दायित्वों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करने का संकल्प लिया। सिम्स प्रशासन ने सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और जनसेवा की भावना को मजबूत बनाने की दिशा में ऐसे प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया।


