
अभा कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षक नवज्योति पटनायक बिलासपुर पहुंचे
बिलासपुर। एसआईआर के मुद्दे को लेकर आज अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षक नवज्योति पटनायक बिलासपुर पहुंचे। उन्होंने कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी करने और लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की। उन्होंने 1 नवंबर को इस मुद्दे को लेकर दिल्ली में होने वाले कांग्रेस का देश व्यापी आंदोलन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
श्री पटनायक ने प्रेसवार्ता में कहा कि वोट चोरी का मुद्दा केवल मौजूदा एस आई आर प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। कांग्रेस ने कई चुनावों के दौरान मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने, दोहरे पंजीकरण, चुनाव संबंधी आँकड़ों में पारदर्शिता, इवीएम और वीवीपेट की कार्यप्रणाली तथा चुनाव आयोग के आचरण पर लगातार सवाल उठाए हैं। मूल सवाल यह है कि क्या प्रत्येक पात्र नागरिक अपने संवैधानिक मताधिकार का प्रयोग कर सकता है और क्या चुनाव एक निष्पक्ष संस्था की निगरानी में कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाने के लिए बार-बार निर्वाचन क्षेत्र के स्तर के ऑकड़े और चुनावी तुलनाएँ सार्वजनिक की हैं। इसमें 7 फरवरी 2025 को महाराष्ट्र में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस, 7 अगस्त 2025 को महादेवपुरा से जुड़े ऑकड़ों की प्रस्तुति, सितंबर 2025 में आलंद से जुड़े आरोप, नवंबर 2025 में हरियाणा से जुड़े आरोप और सितंबर 2026 में चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों के खुलासे के बाद उठाए गए नए सवाल शामिल हैं। इन प्रयासों को एस आई आर से शुरू हुआ मुद्दा नहीं, बल्कि ऑकड़ों, सार्वजनिक जाँच-पड़ताल और संस्थागत जवाबदेही के माध्यम से जवाब माँगने की एक निरंतर कोशिश के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 25 सितंबर 2026 को प्रकाशित द इंडियन एक्सप्रेस की एक अहम पड़ताल में बताया गया कि मतदाता सूची में किसी नाम का छूटना या हटना संबंधित नागरिक के मताधिकार को प्रभावित कर सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड, निर्धारित प्रक्रिया और शिकायत निवारण व्यवस्था के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक का मताधिकार सुरक्षित रहना चाहिए। ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के जरिए पार्टी मतदाता सूची की पारदर्शिता, निर्वाचन आयोग की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा मजबूत करने के मुद्दे को देशव्यापी बहस के केंद्र में लाना चाहती है।


