रतनपुर में विश्व हिंदू परिषद का 2 दिवसीय जिला अभ्यास वर्ग प्रारम्भ
रतनपुर, 13 अगस्त 2026। विश्व हिंदू परिषद द्वारा रतनपुर के श्री सिद्धि विनायक मंदिर परिसर में जिला अभ्यास वर्ग का आयोजन किया गया। अभ्यास वर्ग के उद्घाटन सत्र में संत समाज के आशीर्वचन के साथ संगठनात्मक एवं सामाजिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में जिले एवं प्रांत के विभिन्न दायित्ववान कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इसके पश्चात गिरजाबंद हनुमान मंदिर के पूज्य संत श्री श्री तारकेश्वर पुरी जी महाराज का आशीर्वचन प्राप्त हुआ। उन्होंने समाज एवं धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सेवा कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गौमाता की सेवा आज समाज के सामने एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसके लिए केवल गौशालाओं तक सीमित प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को गौसेवा एवं गौसंवर्धन से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू राष्ट्र की दिशा में आगे बढ़ने के लिए विश्व हिंदू परिषद के सामने अभी अनेक कार्य शेष हैं, जिन्हें समाज की सक्रिय सहभागिता के साथ पूरा करना होगा।
अभ्यास वर्ग के उद्घाटन सत्र में विश्व हिंदू परिषद के प्रांत सह कोषाध्यक्ष श्री संदीप गुप्ता मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि संगठन का कार्य केवल कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि कार्यकर्ताओं को निरंतर समाज के बीच संपर्क, संवाद और सेवा के माध्यम से अपनी भूमिका निभानी होगी। श्री गुप्ता ने कहा कि कार्यकर्ता के लिए संगठन के प्रति आत्मीयता, अनुशासन और निरंतर सक्रियता सबसे महत्वपूर्ण है। संगठन द्वारा निर्धारित योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब जिला, प्रखंड और ग्राम स्तर तक कार्यकर्ता उन्हें अपनी जिम्मेदारी मानकर आगे बढ़ाएँ। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे केवल कार्यक्रमों में सहभागिता तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच निरंतर संपर्क स्थापित करें और संगठन के सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता तथा धर्म जागरण से जुड़े कार्यों को गति दें।
मुख्य वक्ता ने अशोक सिंघल के जन्मशताब्दी वर्ष को संगठनात्मक एवं सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि यह केवल स्मरण का वर्ष नहीं, बल्कि उनके जीवन, विचारों और संगठन के प्रति समर्पण को समाज तक पहुंचाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि अशोक जी के जीवन में धर्म के प्रति अटूट निष्ठा, समाज के प्रति आत्मीयता और संगठन के प्रति पूर्ण समर्पण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनके विचारों को कार्यकर्ताओं के व्यवहार और कार्यशैली में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने सामाजिक समरसता को संगठन के प्रमुख विषयों में रखते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ संपर्क, संवाद और आत्मीय संबंध स्थापित करना आवश्यक है। इस वर्ष सामाजिक समरसता संत यात्रा, समरसता गोष्ठियों तथा संत समाज के व्यापक संपर्क जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा। संतों के नेतृत्व में सेवा बस्तियों में संपर्क एवं पदयात्रा तथा समाज के बीच आत्मीय संवाद जैसे प्रयासों को भी आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई।
अभ्यास वर्ग में गौसंवर्धन एवं गौ-आधारित प्राकृतिक कृषि पर भी विशेष रूप से चर्चा हुई। मुख्य वक्ता ने कहा कि गौमाता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय ग्राम व्यवस्था, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारभूत कड़ी हैं। आवश्यकता है कि गौशालाओं को केवल निराश्रित गौवंश की सेवा तक सीमित न रखते हुए समाज और ग्राम व्यवस्था से जोड़ा जाए। परिवारों में गौपालन को प्रोत्साहन देने तथा गौ-आधारित प्राकृतिक कृषि के प्रति किसानों में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी कार्य करने की आवश्यकता बताई गई।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि के माध्यम से भूमि, जल एवं पर्यावरण के संरक्षण के साथ किसानों की लागत को कम करने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं। इसके लिए जिला एवं प्रखंड स्तर पर किसान गोष्ठियों, गौपालक परिवारों से संपर्क तथा प्राकृतिक कृषि से जुड़े किसानों के अनुभवों को समाज तक पहुंचाने जैसे कार्यक्रम किए जाने चाहिए।
अभ्यास वर्ग में पूज्य संत रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर समाज में उनके जीवन, अध्यात्म, कर्म एवं सामाजिक समरसता के संदेश को पहुंचाने पर भी चर्चा हुई। जिला स्तर पर संत रविदास जी से जुड़े मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित करने तथा समाज के विभिन्न वर्गों को इन कार्यक्रमों से जोड़ने का आह्वान किया गया। साथ ही स्थानीय स्तर पर संत रविदास जी के जीवन एवं विचारों पर गोष्ठियों और सामाजिक समरसता के कार्यक्रम आयोजित करने की कार्ययोजना पर भी विचार किया गया।
मुख्य वक्ता ने कहा कि संगठन की योजनाओं की सफलता का वास्तविक आधार जिला एवं प्रखंड स्तर के कार्यकर्ता हैं। प्रांत द्वारा बनाई गई योजनाओं का प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब प्रत्येक जिले में कार्यक्रमों के लिए प्रभारी निर्धारित किए जाएँ, आवश्यक समितियों का गठन हो, स्थानीय समाज के प्रमुख लोगों से संपर्क किया जाए तथा पूरे वर्ष निरंतर संपर्क एवं जनजागरण का कार्य चलता रहे।उद्घाटन सत्र में जिला अध्यक्ष श्री सौमित्र गुप्ता ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। उन्होंने अभ्यास वर्ग की आवश्यकता बताते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं के नियमित प्रशिक्षण और संगठनात्मक विषयों के अध्ययन से कार्य की गुणवत्ता एवं प्रभावशीलता बढ़ती है। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से संगठन के निर्धारित कार्यक्रमों को गंभीरता से लेते हुए जिला स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिंदू लगना और हिंदू होना दोनों अलग बातें हैं। केवल बाहरी पहचान पर्याप्त नहीं है; जब तक संगठन हित में कार्यकर्ता दिल से प्रयास और कार्य नहीं करेंगे, तब तक अपेक्षित एवं लक्षित परिणाम प्राप्त नहीं होंगे।
कार्यक्रम के दौरान जुलाई माह में छतरपुर, दिल्ली में आयोजित केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक में पारित प्रस्तावों का वाचन भी किया गया। प्रस्तावों का वाचन श्रीमती सोनल अग्रवाल, श्री गौरव धनकर एवं श्री रिंकू शर्मा द्वारा किया गया। केंद्रीय स्तर पर लिए गए निर्णयों एवं प्रस्तावों को जिला स्तर तक पहुंचाते हुए उनके अनुरूप आगामी कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
अभ्यास वर्ग में प्रांत उपाध्यक्ष श्रीमती प्रेमलता बिसेन, प्रांत सह कोषाध्यक्ष श्री संदीप गुप्ता, बजरंग दल प्रांत संयोजक श्री शुभम नाग, दुर्गा वाहिनी प्रांत संयोजिका श्रीमती भारती सिंह, विभाग मंत्री श्री विकास शर्मा, जिला अध्यक्ष श्री सौमित्र गुप्ता, बजरंग दल प्रांत विद्यार्थी सह प्रमुख श्री अंकुश ठाकुर, धर्म प्रसार विभाग के प्रांत टोली सदस्य श्री प्रमोद कश्यप, जिला मंत्री श्री विक्रांत केशरवानी, मातृ शक्ति जिला संयोजिका श्रीमती सोनल अग्रवाल एवं दुर्गावाहिनी जिला संयोजिका भूमिका रायल सहित बड़ी संख्या में दायित्ववान कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
अभ्यास वर्ग का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को संगठन की आगामी योजनाओं, सामाजिक सरोकारों एवं सेवा कार्यों के प्रति अधिक सक्रिय बनाना रहा। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि संगठन का विस्तार केवल संख्या बढ़ाने से नहीं, बल्कि समाज के बीच आत्मीय संपर्क, सेवा, संस्कार, समरसता और निरंतर सक्रिय कार्य के माध्यम से होना चाहिए। अभ्यास वर्ग के माध्यम से कार्यकर्ताओं में आगामी कार्यों को लेकर नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ। कार्यक्रम को सफल करने हेतु जिला दीपक सिंह ठाकुर , पुलिकत अग्रवाल विशेष रूप से सक्रिय रहे।

