आधारशिला विद्या मंदिर न्यू सैनिक स्कूल में SPIC MACAY के अंतर्गत भरतनाट्यम एवं कुचिपुड़ी की मनमोहक प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति से जोड़ा

*बिलासपुर,।भारतीय शास्त्रीय कला, संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत को युवा पीढ़ी तक पहुँचाने और विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध परंपराओं से जोड़ने के उद्देश्य से **SPIC MACAY (Society for the Promotion of Indian Classical Music and Culture Amongst Youth)** के तत्वावधान में **आधारशिला विद्या मंदिर न्यू सैनिक स्कूल, बिलासपुर** में 16 एवं 17 सितंबर 2026 को दो दिवसीय शास्त्रीय नृत्य समारोह का भव्य आयोजन किया गया।

विद्यालय के सभागार में आयोजित इस सांस्कृतिक समारोह में देश की प्रतिष्ठित शास्त्रीय नृत्यांगनाओं ने क्रमशः **भरतनाट्यम एवं कुचिपुड़ी** की मनोहारी प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय कला की विविधता, गहराई और आध्यात्मिक सौंदर्य से परिचित कराया। प्रस्तुतियों के साथ कलाकारों ने विद्यार्थियों को नृत्य की विभिन्न मुद्राओं, भाव-भंगिमाओं, ताल, लय तथा **नाट्यशास्त्र** के विविध पक्षों की जानकारी भी दी।प्रथम दिवस — भरतनाट्यम की भावपूर्ण प्रस्तुति**

कार्यक्रम के प्रथम दिन  बेंगलुरु की प्रतिष्ठित भरतनाट्यम कलाकार सुश्री शिवरंजनी हरीश जी  ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित कलाकार ने अपनी सधी हुई पदचाप, मुद्राओं, भाव-भंगिमाओं और लयबद्ध नृत्य के माध्यम से भरतनाट्यम की शास्त्रीय गरिमा को जीवंत किया।

सुश्री शिवरंजनी हरीश जी को भरतनाट्यम के क्षेत्र में 36 वर्षों की साधना एवं 26 वर्षों के शिक्षण अनुभव का गौरव प्राप्त है। वे कर्नाटक कलाश्री एवं गुरु श्री किरण सुब्रह्मण्यम की वरिष्ठ शिष्या हैं। वे दूरदर्शन द्वारा ‘A’ एवं ‘Top Grade’ से सम्मानित कलाकार हैं तथा ICCR की सूचीबद्ध कलाकार के रूप में देश-विदेश में भारतीय शास्त्रीय नृत्य का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उन्हें ‘कर्नाटक नृत्यश्री’ एवं ‘युवा प्रतिभा’ जैसे सम्मानों से भी नवाजा गया है।

उन्होंने बीजिंग, शंघाई एवं हांग्जो सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया है। अपने दीर्घकालीन कला-साधना एवं शिक्षण के माध्यम से वे विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने तथा शास्त्रीय नृत्य के प्रति युवा पीढ़ी में रुचि जागृत करने में योगदान दे रही हैं।*द्वितीय दिवस — कुचिपुड़ी की लय, गति और भावाभिव्यक्ति*

समारोह के दूसरे दिन दिल्ली की प्रतिष्ठित कुचिपुड़ी नृत्यांगना सुश्री टी. रेड्डी लक्ष्मी जी ने अपनी ऊर्जावान एवं प्रभावशाली प्रस्तुति से सभागार में उपस्थित विद्यार्थियों और दर्शकों को अभिभूत कर दिया।

सुश्री टी. रेड्डी लक्ष्मी जी ने **पद्मश्री गुरु जयरामा राव एवं वनश्री राव** के मार्गदर्शन में दो दशकों से अधिक समय तक कुचिपुड़ी नृत्य का गहन एवं अनुशासित प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उनकी प्रस्तुतियों में कुचिपुड़ी की विशिष्ट गतिशीलता, लय, ताल, अभिनय एवं भावाभिव्यक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

प्रस्तुति के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को कुचिपुड़ी की तकनीकी विशेषताओं के साथ-साथ इसके सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पक्षों से भी परिचित कराया। उनकी प्रस्तुति में नृत्य की तीव्र गति, सटीक पदसंचालन और प्रभावशाली अभिनय ने विद्यार्थियों में विशेष उत्साह उत्पन्न किया।

*कला के माध्यम से संस्कृति और संस्कारों का संदेश*

दोनों दिवसों की प्रस्तुतियों के दौरान कलाकारों ने केवल नृत्य का प्रदर्शन ही नहीं किया, बल्कि विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित करते हुए विभिन्न मुद्राओं, भावों, ताल एवं नाट्यशास्त्रीय अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया।

*विद्यालय प्रबंधन ने बताया समग्र शिक्षा में कला का महत्व*

विद्यालय के  अध्यक्ष श्री अजय श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा,“आज के तकनीकी एवं तीव्र गति से बदलते समय में SPIC MACAY जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को भारतीय कला एवं संस्कृति की समृद्ध परंपरा से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक एवं सैन्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना, अनुशासन, संवेदनशीलता और अपनी जड़ों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना भी है। आधारशिला विद्या मंदिर न्यू सैनिक स्कूल इसी समग्र शिक्षा की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।”

*विद्यालय के निदेशक  संजीव जनस्वामी जी ने अपने संबोधन में कहा,

 “भारतीय शास्त्रीय कलाएँ हमारी सभ्यता, संस्कारों और जीवन-दर्शन की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। विद्यार्थियों को इन कलाओं से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना उनके व्यक्तित्व के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। SPIC MACAY के माध्यम से आयोजित ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को हमारी सांस्कृतिक विरासत को केवल जानने का ही नहीं, बल्कि उसे अनुभव करने और उसके मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करने का अवसर प्रदान करते हैं। हमारा प्रयास है कि आधारशिला विद्या मंदिर के विद्यार्थी आधुनिक ज्ञान और तकनीकी दक्षता के साथ-साथ अपनी भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति भी जागरूक और गौरवान्वित रहें।”

विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती जी. आर. मधूलिका जी ने दोनों कलाकारों तथा **SPIC MACAY छत्तीसगढ़ चैप्टर** के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय शास्त्रीय कलाओं से विद्यार्थियों का प्रत्यक्ष परिचय उनके व्यक्तित्व के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में **एकाग्रता, अनुशासन, सौंदर्यबोध, रचनात्मकता तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान** की भावना विकसित करते हैं।

दो दिवसीय इस आयोजन में विद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारीगण एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विद्यार्थियों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों को अत्यंत रुचि एवं उत्साह के साथ देखा और शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों को समझने का अवसर प्राप्त किया।

कार्यक्रम का समापन भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत को समझने, सम्मान देने तथा आने वाली पीढ़ियों तक उसकी समृद्ध परंपरा को पहुँचाने के संकल्प के साथ हुआ।

निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176

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