लोकतंत्र की पाठशाला: एवीएम न्यू सैनिक स्कूल में युवा संसद का आयोजन ,विद्यार्थियों ने AI, सोशल मीडिया और डिजिटल सुरक्षा पर प्रस्तुत किए दूरदर्शी समाधान

लोकसभा की कार्यप्रणाली पर आधारित मॉक पार्लियामेंट में विद्यार्थियों ने गहन शोध, तार्किक संवाद और नीति-निर्माण की प्रक्रिया का सजीव अनुभव प्राप्त किया।

एवीएम न्यू सैनिक स्कूल में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक चिंतन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “मॉक पार्लियामेंट 2026” का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था— “Responsible AI & Social Media Policy Bill, 2026”, जिसमें विद्यार्थियों ने लोकसभा के वास्तविक सत्र का अनुकरण करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सोशल मीडिया, डीपफेक, साइबर सुरक्षा, बच्चों की सुरक्षा तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे समकालीन राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर चर्चा की।

विद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री, विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों तथा विपक्ष के नेताओं की भूमिका निभाते हुए यह प्रदर्शित किया कि संसद में केवल बहस नहीं होती, बल्कि तथ्यों, संविधान और जनहित के आधार पर बेहतर कानून बनाए जाते हैं।

*विपक्ष ने रखा समस्या का व्यापक पक्ष*

लोकसभा की कार्यवाही प्रश्नकाल से प्रारंभ हुई, जहाँ विपक्ष के सदस्यों ने AI और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से उत्पन्न गंभीर चुनौतियों को प्रभावशाली ढंग से सदन के सामने रखा। विद्यार्थियों ने साइबर बुलिंग, ऑनलाइन यौन उत्पीड़न, किशोरों में बढ़ती डिजिटल लत, मानसिक स्वास्थ्य संकट, व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, डीपफेक वीडियो, फर्जी समाचार तथा चुनावों और लोकतंत्र पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव जैसे विषयों पर शोध आधारित तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक स्वयं समस्या नहीं है, बल्कि उसका अनैतिक और गैर-जिम्मेदार उपयोग समाज के लिए बड़ा खतरा बन रहा है।

*सत्ता पक्ष ने सुझाए व्यावहारिक समाधान*

इसके पश्चात प्रधानमंत्री एवं विभिन्न मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व कर रहे विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय नीति का प्रारूप प्रस्तुत किया। सरकार की ओर से AI जनित सामग्री पर अनिवार्य लेबलिंग, डीपफेक की पहचान हेतु डिजिटल वॉटरमार्क, प्रत्येक विद्यालय में डिजिटल एवं AI साक्षरता पाठ्यक्रम, साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान, महिलाओं और बच्चों के लिए त्वरित शिकायत निवारण प्रणाली, 1930 साइबर हेल्पलाइन को सुदृढ़ बनाने तथा सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए। विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि नवाचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखते हुए नागरिकों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना इस नीति का मूल उद्देश्य होना चाहिए।

*संशोधनों से और सशक्त हुआ विधेयक*

खुली चर्चा के चरण में विपक्ष ने सरकार के प्रस्तावों का रचनात्मक परीक्षण करते हुए अनेक महत्वपूर्ण संशोधन सुझाए। विद्यार्थियों ने AI नियमन के लिए प्रस्तावित कोलेजियम में सदस्यों की संख्या और विविध प्रतिनिधित्व बढ़ाने की अनुशंसा की, ताकि न्यायाधीशों, शिक्षकों, मनोवैज्ञानिकों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिक समाज की संतुलित भागीदारी सुनिश्चित हो सके। साथ ही उन्होंने फर्जी एवं हानिकारक सामग्री को ट्रैक कर हटाने की समय-सीमा को और कम करने, तथा AI एवं सोशल मीडिया के मामलों में निष्पक्ष निर्णय और सतत निगरानी के लिए न्यायाधीशों एवं प्रशासकों का एक स्वतंत्र एवं तटस्थ पैनल गठित करने का सुझाव दिया। सदन ने इन संशोधनों पर गंभीर विचार करते हुए विधेयक को और अधिक प्रभावी एवं जनोन्मुख बनाने की दिशा में सहमति व्यक्त की।

*मुख्य अतिथि का प्रेरणादायी संबोधन*

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एडवोकेट पीयूष कुमार गुप्ता रहे, जो बिलासपुर के प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञ हैं। पीयूष ने किरोड़ी मल कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय), कैंपस लॉ सेंटर तथा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों से विधि शिक्षा प्राप्त की है। वे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं भारत के सर्वोच्च न्यायालय में संवैधानिक, पर्यावरणीय, कॉरपोरेट एवं वाणिज्यिक मामलों के अनुभवी अधिवक्ता हैं। इसके अतिरिक्त वे शोधकर्ता, लेखक तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े एक सक्रिय परिवर्तनकारी व्यक्तित्व भी हैं।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें यह समझना होगा कि हमारा व्यक्तित्व, विचार और ज्ञान क्रमशः कैसे विकसित होते हैं | उन्होंने विद्यालय में मिल रहे अवसरों की सराहना की और विद्यार्थियों को गहरे अध्ययन और अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित किया | साथ ही, उन्होंने विशेष रूप से कुछ विद्यार्थियों की उल्लेखनीय प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि “हम प्रत्येक अनुभव के साथ विकसित होते हैं; हर मंच हमें बेहतर विचारक, बेहतर वक्ता और बेहतर नागरिक बनाता है।” उनके प्रेरणादायी शब्दों ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और संवैधानिक चेतना का नया उत्साह भर दिया।

यह मॉक पार्लियामेंट अमितेश सर, रोविन सर एवं मौसमी मैम के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। तीनों शिक्षकों ने विद्यार्थियों को संसदीय प्रक्रिया, शोध, तर्क-वितर्क तथा विधेयक निर्माण की तैयारी में निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया।

*लोकतंत्र की जीवंत प्रयोगशाला बना विद्यालय*

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के चेयरमैन डा अजय श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि मॉक पार्लियामेंट जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को केवल सार्वजनिक भाषण नहीं सिखातीं, बल्कि शोध, आलोचनात्मक चिंतन, संवैधानिक मूल्यों, सहमति निर्माण और जिम्मेदार नागरिकता का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान करती हैं। विद्यालय के निदेशक श्री एस. के जनास्वामी ने कहा कि आज विद्यार्थियों ने सिद्ध किया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनना भी है। मॉक पार्लियामेंट में उनके तर्क, शोध और संवैधानिक दृष्टिकोण ने भविष्य के नेतृत्व की एक सशक्त झलक प्रस्तुत की। प्राचार्य श्रीमती जी. आर मधुलिका ने कहा कि AI और सोशल मीडिया जैसे समकालीन विषय पर विद्यार्थियों का तथ्यपूर्ण विमर्श प्रेरणादायी रहा। हमें विश्वास है कि ऐसे अनुभव उनमें आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक निर्णय क्षमता और उत्तरदायी डिजिटल नागरिकता का विकास करेंगे।

निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176

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