
सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य बघेल को अवैध हिरासत में लिए जाने वाले मामले को हाई कोर्ट में उठाने के लिए कहा
चैतन्य के द्वारा मनी लांड्रिंग एक्ट की धारा 50 और 63 को दी गई चुनौती को एक पृथक याचिका के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में लगाने की छूट दी

चैतन्य बघेल की याचिका उनके वकील ने उक्त निर्देश पर वापस ली
नई दिल्ली 4 अगस्त छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल जिन्हें उनके जन्मदिन के दिन 18 जुलाई को ईडी द्वारा हिरासत में लिया गया था ने अपने हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी जिस पर आज जस्टिस सूर्यकांत और जॉय माल्या बागची के खंडपीठ में सुनवाई हुई।
चैतन्य बघेल की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी बिना सम्मन दिए हुई है और जो गिरफ्तारी के आधार बताए गए हैं वह पूरी तरह बेबुनियाद है और उन आधारों पर कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकती। अधिवक्ता ने बताया कि 10 मार्च 2025 को उनके घर में जो रेड हुई थी उसमें भी ऐसा कुछ भी नहीं मिला था जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी की जाए । मार्च से लेकर 18 जुलाई तक कोई नया सबूत या नई जानकारी के आधार पर चैतन्य बघेल को कोई सम्मन ई डी के द्वारा जारी नहीं हुआ इसके बावजूद ई डी ने जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाकर गिरफ्तारी की है।
चैतन्य बघेल की याचिका में मनी लांड्रिंग एक्ट की धारा 50 और 63 को भी चुनौती दी गई है कि इन धाराओं के आधार पर ई डी किसी भी व्यक्ति को यह मजबूर करती है कि वह अपने खिलाफ स्वयं बयान दे। यह आपराधिक कानून की बुनियादी अवधारणा के खिलाफहै। किसी भी व्यक्ति को अपने विरुद्ध गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
आज की सुनवाई में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बागची की बेंच दें यह कहा कि जहां तक धारा 50 और 63 को चुनौती देने की बात है उसके लिए आप एक पृथक याचिका लगाकर चुनौती दे सकते हैं परंतु क्योंकि गिरफ्तारी हो चुकी है इसलिए अवैध गिरफ्तारी और जमानत आदि के लिए आपको हाई कोर्ट जाना चाहिए। इस स्तर पर वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी दें एक पृथक याचिका दायर कर मनी लांड्रिंग एक्ट की धारा 50 और 63 की संवैधानिकता को चुनौती देने की बात स्वीकार की और अवैध हिरासत एवं जमानत आदि के लिए हाई कोर्ट जाने पर सहमति दे जताई और अपनी आज की याचिका को वापस ले लिया।
*दूसरी याचिका पर सुनवाई 6 अगस्त को *
____________________________________
सुप्रीम कोर्ट के द्वारा छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा लगाई गई दो याचिकाओं में से एक पर आज सुनवाई से इनकार किया वही दूसरी को आगे और सुनवाई के लिए 6 अगस्त को सूचीबद्ध किया है।
प्रथम याचिका जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बहस की उसमें कहा कि लगातार जांच प्रक्रिया जारी रखने के कारण टुकड़े टुकड़े में चालान पेश करने और 90 दिन में चालान पेश नहीं होने के कारण जमानत मिलने का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस याचिका पर खंडपीठ ने कहा कि इन आरोपों पर आधारित याचिका वे हाई कोर्ट के सामने प्रस्तुत करें।
वहीं दूसरी याचिका जिसमें मनी लांड्रिंग एक्ट की धारा 44 को चुनौती दी गई है में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को यह बताया गया है कि अब तक दिए गए फैसलों में किसी अपराध के बारे में एक बार चालान प्रस्तुत होने के बाद आगे की जांच करने के लिए मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी पड़ती है इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के अलग-अलग फसलों में अलग-अलग नजीर दी गई है। जहां विनय त्यागी के मामले में यह कहा गया है कि बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के एक बार चालान होने के प्रस्तुत होने के बाद आगे की जांच नहीं की जा सकती वही कुछ मामलों में यह कहा गया है कि मजिस्ट्रेट की जांच की आवश्यकता नहीं है और जांच एजेंसी अपने विवेक पर आगे की जांच कर सकती है। इस विरोधाभास का छत्तीसगढ़ के मामलों में ई डी और आर्थिक अपराध जांच ब्यूरो मनमाना प्रयोग कर रहा है और तीन-तीन चार-चार साल से आपराधिक जांच को जारी रख जब मन में आता हैं तब किसी न किसी की गिरफ्तारी कर देता है। अत इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट को एक स्पष्ट नजीर देने की जरूरत है कि बिना मजिस्ट्रेट या जज के आदेश के किसी भी प्रकरण में एक बार चालान प्रस्तुत होने के बाद आपराधिक जांच अंतहीन तरीके से जारी नहीं रह सकती।
सुप्रीम कोर्ट कि जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमालया बागची की खंडपीठ ने इस मामले में पहले से स्पष्ट दिशा निर्देश होने का हवाला दिया परंतु भूपेश बघेल की ओर से प्रस्तुत वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने खंडपीठ को बताया कि पीएमएलए की धारा 44 के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट एक याचिका की सुनवाई कर रहा है अतः इस याचिका को उसे याचिका के साथ जोड़कर सुनने की जरूरत है। खंडपीठ को यह भी जानकारी दी गई के उक्त याचिका जो पहले से पेंडिंग है वह 6 अगस्त को सुनवाई के लिए आ रही है कपिल सिब्बल ने कहा कि वे 6 अगस्त को इस मामले की सुनवाई का निवेदन कर रहे हैं जिससे कि वह बता सके कि उन याचिकाओं में मनी लांड्रिंग एक्ट की धारा 44 और अंतहीन जांच प्रक्रिया जारी रखने के खिलाफ चुनौती दी गई है। इस सुनवाई के बाद खंडपीठ ने भूपेश बघेल की इस याचिका को 6 अगस्त की सुनवाई के लिए रख दियाहै।।
निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176
Mon Aug 4 , 2025
बिलासपुर । वन्दे मातरम् मित्र मंडल की 208वीं बैठक जल संसाधन विभाग कार्यालय परिसर में स्थित प्रार्थना भवन में आहुत की गई। बैठक में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व विभाग संघचालक प्रदीप देशपांडे के बिलासपुर से पुणे शिफ्ट होने पर विदाई समारोह का भी आयोजन किया गया। बैठक में […]