न्याय की नींव सत्य, समानता और निष्पक्षता पर आधारित :चीफ जस्टिस  

बिलासपुर। जिला न्याय की आधारशिला” न्यायालय परिसर, बलौदाबाजार में “विधि के शासन विषय पर महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन जिला अधिवक्ता संघ बलौदाबाजार द्वारा शुक्रवार को किया गया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की उपस्थिति रही। मुख्य न्यायाधिपति ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया तथा विषय पर विस्तृत, प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी वक्तव्य दिया ।

न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा मुख्य न्यायाधीश ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए अपने उद्बोधन में विधि के शासन’ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारे लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति यही है कि देश में कानून सर्वोपरि है और कोई भी व्यक्ति, संस्था अथवा पद कानून से ऊपर नहीं है। विधि के शासन यह सुनिश्चित करता है कि समाज के कमजोर वर्ग, महिलाएँ, बच्चे, पीडित, विचाराधीन बंदी और प्रत्येक व्यक्ति को समान न्याय मिले। विधि के शासन’ ही कमजोरों को शक्तिशाली से सुरक्षा प्रदान करता है तथा शासन में समानता, जवाबदेही एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। न्यायपालिका, अधिवक्ता एवं अभियोजन सभी मिलकर न्याय प्रणाली की इस नींव को मजबूत बनाने के उत्तरदायी हैं।

 मुख्य न्यायाधीश के द्वारा विधि के शासन स्थापित किये जाने में अधिवक्तागण की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा गया कि अधिवक्ता समुदाय न्याय प्रणाली के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, न्याय की यात्रा प्रायः एक अधिवक्ता से प्रारंभ होती है। आम नागरिक सबसे पहले उन्हीं से न्याय की आशा लेकर मिलता है। अधिवक्ता केवल मुकदमों का प्रतिनिधित्व ही नहीं करते, बल्कि वे न्याय के वाहक, अधिकारों के रक्षक और संविधान के प्रहरी होते हैं। अधिवक्ता, पक्षकारों की पीड़ा को अभिव्यक्ति प्रदान करते हैं और न्यायालय के समक्ष दृढ़ता से प्रस्तुत करते हैं। अधिवक्ता का दायित्व न केवल अपने पक्षकार के प्रति है अपितु न्यायालय, समाज एवं सम्पूर्ण व्यवस्था के प्रति होता है। जनता का विश्वास इसी समन्वय से निर्मित होता है कि अधिवक्ता ईमानदारी से तथ्य और कानून प्रस्तुत करें।उन्होंने अधिवक्ताओं को जनता और न्यायालय के बीच मुख्य सेतु बताते हुए उन्हें जिम्मेदारियों के प्रति संवेदनशील रहने के लिए बल दिया।

मुख्य न्यायाधीश के द्वारा वर्तमान समय में न्यायालयीन कार्य एवं प्रक्रिया में अधोसंरचना, मूलभूत सुविधाएँ, प्रौद्योगिकी, कम्प्यूटरीकरण एवं संचार साधनों के उपयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा गया कि डिजिटल कोर्ट, ई-फाइलिंग तथा वर्चुअल सुनवाई की प्रणाली तेजी से विकसित हो रही है, इन बदलावों में अधिवक्ता सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है अतः सीखने की क्षमता में वृद्धि कर नवीन तकनीक को अपनाने में अधिवक्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। तकनीक, न्याय की गति एवं पारदर्शिता को और अधिक सुदृढ़ कर सकती है। मुख्य न्यायाधीश के द्वारा संबोधन के समापन में “विधि के शासन” विषय को केवल एक दिन की चर्चा में न रखते हुए कार्यप्रणाली की निरंतरता में शामिल करने हेतु आह्वान किया गया।

उपरोक्त कार्यक्रम में श्रीमती न्यायमूर्ति रजनी दुबे, न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय, न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की उपस्थिति रही, जिन्होंने विधि के शासन’ के विभिन्न आयामों पर अपने विचार व्यक्त किया और कार्यशाला को उपयोगी एवं सफल बनाने में योगदान दिया। कार्यक्रम की शुरुआत भूपेंद्र ठाकुर वरिष्ठ अधिवक्ता के स्वागत भाषण से हुई और समापन मोहम्मद शारिक खान अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

 कार्यक्रम में रजनीश श्रीवास्तव रजिस्ट्रार जनरल, सुब्रमण्यम स्वामी पी.पी.एस., रविन्द्र सिंह नेगी प्रोटोकॉल अधिकारी, छ.ग. उच्च न्यायालय तथा जिला बलौदाबाजार के न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारीगण, अधिवक्तागण, न्यायालयीन कर्मचारी शामिल थे।

 

निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176

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