वाह रे सिस्टम!जिंदगी की कीमत सिर्फ दो लाख रू?मीना बाजार के झूले से गिरा इंसान और सौ रू के स्टाम्प पर बिक गया अंधा कानून !aa

वाह रे सिस्टम!जिंदगी की कीमत सिर्फ दो लाख रू?मीना बाजार के झूले से गिरा इंसान और सौ रू के स्टाम्प पर बिक गया अंधा कानून !

खरसिया मीना बाजार में बड़ा हादसा,छोटे छोटे बच्चों के सर से उठ गया  पिता का साया 

 कहते हैं कानून अंधा होता है मगर उस के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन खरसिया के टाउनहाल मैदान में लगे मीना बाजार में कानून के हाथ शायद 2 लाख रुपये की गड्डी और 100 रुपए के नोटरी पेपर के नीचे दबकर असहाय हो गए हैं क्योंकि कानून के हाथ बंधे हुए भी होते है।

बीते 20 अक्टूबर को पुसौर निवासी नकुल निषाद हालनिवास पठानपारा खरसिया अपने मासूम बच्चों को मीना बाजार में झूला झुलाने लाए थे। झूला झूलते समय संतुलन बिगड़ा, नकुल नीचे गिरे और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अब होना तो यह चाहिए था कि पुलिस प्रशासन झूला संचालक की सुरक्षा व्यवस्था, एनओसी और फिटनेस सर्टिफिकेट की धज्जियां उधेड़ता, लेकिन यहां तो कानून की जगह बाज़ारू न्याय ने ले ली।

दो लाख में खरीद ली गई एक इंसान की सांसें

घटना के अगले ही दिन 21 अक्टूबर, मीना बाजार के संचालक दीपक मौर्य और मृतक की असहाय पत्नी मिथिला निषाद के बीच नोटरी के सामने एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ तैयार हुआ। दस्तावेज़ का मजमून बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक है-

पति की मौत पर मीना बाजार संचालक द्वारा दो लाख रुपये की मुआवजा राशि दी गई, जिससे मैं पूरी तरह संतुष्ट हूँ… भविष्य में कोई शिकायत की तो उसे झूठा माना जावेगा।

वाह! क्या गजब की व्यवस्था है। यानी अगर आपके पास 2 लाख रुपए हैं, तो आप मेला चलाइए, झूलों की सुरक्षा की धज्जियां उड़ाइए और किसी की जान जाने पर कागज़ पर साइन करवाकर साफ-सुथरे होकर निकल जाइए !

कानून का मज़ाक या पुलिस की ढिलाई

कानून के जानकारों की मानें तो किसी व्यक्ति की मौत पर इस तरह का आपसी राजीनामा करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (1) (लापरवाही से मौत) एक गैर-शमनीय नॉन कम्पाउंडेबल अपराध है। यानी इस अपराध में पैसे देकर समझौता या राजीनामा करने का कोई प्रावधान ही नहीं है!

यदि झूले के मेंटेनेंस में जानबूझकर लापरवाही बरती गई थी, तो यह मामला बीएनएस की धारा 105 सदोष मानव वध के दायरे में भी आता है।

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या खरसिया पुलिस और स्थानीय प्रशासन को इस 2 लाख रुपये वाले नोटरी न्याय की भनक नहीं है? क्या किसी की जान की कीमत तय करने का अधिकार अब मीना बाज़ार के संचालकों को मिल गया है?

जनता पूछे सवाल

क्या सुरक्षा मानकों सेफ्टी ऑडिट की जांच हुई? क्या झूले का फिटनेस सर्टिफिकेट सही था? A नोटरी वाले इस कागज़ को ही अंतिम फैसला मानकर फाइल बंद कर दी जाएगी?

अगर इस तरह के राजीनामे को मूक सहमति मिलती रही, तो कल को कोई भी ठेकेदार सुरक्षा ताक पर रखकर मेले चलाएगा और हादसों के बाद 2 लाख रुपए का लिफाफा थमाकर कानून को चिढ़ाता रहेगा। प्रशासन को चाहिए कि इस कागजी राजीनामे को दरकिनार कर संचालक के खिलाफ बीएनएस की सुसंगत धाराओं में कड़ी कार्रवाई करे, ताकि कानून का खौफ कागज़ के टुकड़ों पर भारी पड़े !इस संबंध में चौकी प्रभारी त्रिनाथ त्रिपाठी से बात करने पर उन्होंने कहा कि अभी मर्ग में जांच चल रही है और एफआईआर दर्ज नहीं की गई है हालांकि बाद में पता चला है कि पुलिस ने एफ आई आर दर्ज कर ली है और मामले कि जाँच शुरू हों गई है।

यहां सोचने वाली बात यह भी है कि 24 घंटे बीत जाने के बाद  यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि घटनास्थल को सील करते हुए झूले बंद किए गए हैं। लेकिन बाज़ार संचालक द्वारा मृतक की पत्नी को दो लाख रुपए देकर समझौता कर लिया गया है। यह समझ से बाहर की बात है कि एक व्यक्ति की जान जाती है और उसकी जान की कीमत लगाते हुए स्टांप पेपर में तीन गवाहों के समक्ष समझौता कर लिया जाता है। यह कानून की कौन सी धारा में आता है? 

 जन हानि के लिए निकटतम वारिस को आर्थिक सहायता अनुदान  के संबंध में  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता लवकुश साहू का अभिमत है कि  प्राकृतिक आपदा से, नैसर्गिक विपत्तियों के कारण, नदी, तालाब, बांध, कुंआ, नहर, नाला या गड्ढे में गिरकर डबूने से, सर्प, बिच्छू, गुहेरा या मधुमक्खी के काटने से, नाव दुर्घटना से, आग में जलने से, रसोई गैस का सिलेण्डर या स्टोव फटने से, खदान धसकने से, (sun stroke) से, आकाशीय बिजली या आंधी, तूफान, अतिवृष्टि, बाढ़ की स्थिति के दौरान पेड़ डंगाल के गिरने अथवा विद्युत प्रवाह/तार से मृत्यु हो जाने पर मृत व्यक्ति के परिवार के निकटतम व्यक्ति/वारिस को रूपये 4,00,000 (रूपये चार लाख की आर्थिक सहायता कलेक्टर द्वारा स्वीकृत की .जाती है।’मृत व्यक्ति’ में बच्चा भी शामिल समझा जाएगा।

. परिवार में एक से अधिक मृत्यु होने पर वारिस को सहायता अनुदान प्रत्येक मृतक के मान से देय होगा।

. इसके लिए मृत्यु की सूचना प्राप्त होने पर अनुविभागीय अधिकारी/तहसीलदार/नायब तहसीलदार द्वारा घटनास्थल पर शीघ्र पहुंचकर मृत्यु होने एवं उसके कारणों की जांच की जाएगी और डॉक्टर से मृतक का परीक्षण भी तत्काल कराया जाएगा।

 राज्य के किसी भी व्यक्ति की मृत्यु प्राकृतिक आपदा से अपने गृह जिले के अतिरिक्त अन्य जिले में होती है, तो मृतक व्यक्ति के परिवार को उसके मूल गृह जिले से अनुदान सहायता प्रदान की जाये। मृत्यु स्थल से घटना का सत्यापन प्राप्त कर संबंधित कलेक्टर अनुदान सहायता की स्वीकृति देते है.

इसी तरह आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्य में लगे अधिकारी एवं कर्मचारियों की मृत्यु होने पर उनके परिवार को भी अनुदान सहायता की पात्रता होगी। 

 

8. ऐसे भारतीय नागरिक, जो

निर्मल माणिक/ प्रधान संपादक मोबाइल:- / अशरफी लाल सोनी 9827167176

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Like

Breaking News